जन्म पत्रिका के ग्रहों की विभिन्न स्थितियों के चलते व्यक्ति के जीवन में अनेक गुण-दोष उत्पन्न होते हैं. यदि इनके अर्थ-भावार्थ के अनुरूप कार्य किए जाएं तो दोष, गुण में बदल सकते हैं. इसके विपरित किसी गुण का कमजोर पक्ष उभर जाए तो गुण, दोष में बदल जाएगा. उदाहरण के लिए किसी जन्म पत्रिका में वैवाहिक सुख का अभाव है तो पहली नजर में यह दोष कहा जाएगा. लेकिन यदि यह योग किसी संन्यासी की कुण्डली में है तो यही दोष गुण में बदल जाएगा. क्रोध, मोह, लोभ आदि अवगुण है लेकिन ऐसे अनेक कार्य हैं जिनमें यह अवगुण गुण में बदल सकते हैं.

ऐसे ही दया सज्जनता, विनम्रता आदि गुण हैं लेकिन कई कार्य ऐसे हैं जिनमें ये गुण अवगुण में बदल जाएंगें. किसी व्यक्ति के मन में विशेष दया भाव है यह अच्छी बात है, लेकिन यदि वही व्यक्ति किसी देश की सेना में है तो यह गुण ही उसके कर्तव्य में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है.

सामने वाली सेना के जवान से उसकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी तो है नहीं फिर वह उसे गोली क्यो मारेगा? वह बेवजह किसी की जान क्यों लेगा? वह किसी औरत को क्यों विधवा और बच्चों को अनाथ बनाएंगा? किसी व्यक्ति में चाहे कोई गुण हो या अवगुण, यदि उसके अनुरूप सही कार्य करे तो यकीनन उस कार्य का परिणाम शुभ ही होगा. जिस कार्य-व्यवसाय के लिए जिस गुण की आवश्यकता हो उस गुण एवं क्षमता के अनुरूप ही कार्य-व्यवसाय का चयन करना चाहिए!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 10:23 तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या, 

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ                पहला- अमृत

दूसरा- रोग                 दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग              तीसरा- रोग

चौथा- चर                  चौथा- काल

पांचवां- लाभ                पांचवां- लाभ

छठा- अमृत                 छठा- उद्वेग

सातवां- काल                 सातवां- शुभ

आठवां- शुभ                आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 21 फरवरी 2019

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 11:20:36

मास फाल्गुन

तिथि द्वितीया - 14:02:47 तक

नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी - 26:26:20 तक

करण गर - 14:02:47 तक, वणिज - 24:23:25 तक

पक्ष कृष्ण

योग धृति - 23:10:49 तक

सूर्योदय 06:54:47

सूर्यास्त 18:15:24

चन्द्र राशि सिंह - 10:22:22 तक

चन्द्रोदय 20:15:59

चन्द्रास्त 08:11:59

ऋतु वसंत

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 26:27 तक

चन्द्र वास: पूर्व में 10:23 तक , दक्षिण में 10:23 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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