शौक के आगे कुछ नहीं इसका पर्याय छत्तीसगढ़ के रायपुर में  अलग-अलग बाइक राइडिंग ग्रुप बनते जा रहे हैं. मोबाइल में 29 राज्यों को कैद कर छोटी-छोटी टुकड़ी में देश भर का भ्रमण करने निकल पड़ते हैं. खास बात ये है कि हर बाइक के नाम से ग्रुप बना हुआ है. इसमें सबसे ज्यादा प्रचलित ग्रुप बुलेट, पल्सर और एवेंजर शामिल हैं. ये ग्रुप देश के अन्य राज्यों में बने ग्रुप से वॉट्सअप पर जुड़े हैं.

गु्रप में जुड़ने का फायदा ये है कि देश भ्रमण करते समय किसी भी प्रकार की दिक्कत हो तो एक-दूसरे की मदद की जा सके. गौर करने वाली बात तो ये है कि लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी बाइक की रफ्तार से अछूती नहीं हैं.

ग्रुप में शामिल होने से पहले नए सदस्य को बाकायदा सप्ताह भर का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि लंबी राइडिंग करने पर किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े. इसके साथ ही गाड़ी सुधारने और तकनीकी दिक्कतों को दूर करने की प्रारंभिक जानकारी दी जाती है.

तकनीक से लैस रहती है बाइक

एवेंजर बाइक ग्रुप के शानू अंसारी ने बताया कि राइडर की बाइक तकनीक से लैस रहती है. सामान्य बाइक लेने के बाद करीब उसमें 50 हजार से लेकर एक लाख तक खर्च किया जाता है. इसमें हैलमेट में कैमरा, बाइक के पीछे कैमरा और सिक्युरिटी सिस्टम लगाया जाता है. इसके साथ ही एक्सट्रा लाइट और टुल बाक्स लगाया जाता है. साथ ही बाइक को एप्स से जोड़ा जाता है. इसमें बाइक के लोकेशन और ऑटो मैटिक स्ट्रॉट से कनेक्ट रहती है.

जीपीएस सिस्टम से सभी को एक दूसरे की मिलती है जानकारी

बुलेट ग्रुप के सदस्य साकेत सिंह ने बताया कि जो भी राइडर होता है, उसकी बाइक में जीपीएस सिस्टम लगा होता है. ताकि ग्रुप के सभी सदस्यों को समय-समय पर गाड़ी का लोकेशन मिलता रहे. यदि छह सदस्य की टीम देश भ्रमण में निकली है तो सभी एक दूसरे से कनेक्ट रहते हैं. किसी भी प्रकार की दिक्कत में तत्काल रुक जाते हैं.

देश भर से राइडर जुड़े हैं एक-साथ

बुलेट ग्रुप और एवेंजर ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि राइडर समय-समय पर अलग-अलग राज्यों से आते-जाते हैं. हमारे बनाए नियम के अनुसार जो भी ग्रुप जिस शहर में पहुंचता है, वहां के ग्रुप मैंबर्स उनकी रुकने की व्यवस्था करते हैं. वहीं उक्त शहर के राइडर जब उनके शहर जाते हैं तो वे उनकी मदद करते हैं.

ऐसे तैयार करते हैं गाड़ी

-रिले लगाकर चार अतिरिक्त हेड लाइट, ताकि समय पड़ने पर न हो दिक्कत.

- सिक्यूरिटी सिस्टम और सेंसर से जुड़ी रहती है बाइक, पल-पल की देती है मोबाइल पर जानकारी.

- मोबाइल के एप्लीकेशन से ही स्टार्ट होती है बाइक.

ग्रुप ने बनाए हैं नियम-शर्त, तोड़ने वाले को निकाल देते हैं

- बिना हैलमेंट के नहीं चला सकते बाइक

- वरिष्ठ लोगों का करना होता है सम्मान

- दूसरे राज्यों से आए राइडर की करना है मदद

- सभी गाड़ी एप्स से रहेंगी कनेक्ट

- बिना बताए एप्स से नहीं हटाया जा सकती बाइक

- शहर में रहने वाले राइडर को भ्रमण में निकली टीम की करनी होती है निगरानी

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