पलपल संवाददाता, जबलपुर. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में देश का दूसरे नंबर का सबसे लंबा रेलवे टनल (सुरंग) का काम पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़ चुका है, इसका कारण जमीन का अधिग्रहण कार्य पूर्ण नहीं होना बताया जा रहा है. यह काम पश्चिम मध्य रेलवे का इंजीनियरिंग निर्माण विभाग दरा कराया जा रहा है, लगभग 4 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज की लागत 106 करोड़ रुपए है.

पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा ललितपुर-सिंगरौली 541 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना में छुहिया घाटी टनल का निर्माण कार्य पिछले कुछ समय तक काफी तेजी से चला, लेकिन अब इस कार्य में भू-अर्जन का रोड़ा आ चुका है. उल्लेखनीय है कि देश में यह दूसरे नंबर की सबसे लंबी टनल है, जबकि मध्य प्रदेश की यह सबसे लंबी टनल मानी जा रही है.

टनल की लागत 106 करोड़

रीवा और सीधी के बीच छुहिया घाटी में बनने वाली मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी सुरंग पर निर्माण कार्य साल भर पहले से शुरू कर दिया गया है. बताया गया है कि 106 करोड़ रुपए की लागत से कंपनी बेहद दुर्गम छुहिया घाटी में सुरंग का निर्माण कर रही है. बताया गया है कि उक्त सुरंग को टीबीएम मशीन के सहारे पूरा किया जाना है, छुहिया घाटी में उक्त मशीन अपने कार्य में लगी भी हुई है. रेलवे ने एजेंसी को निर्माण की गति बढ़ाने का आदेश भी दिया हुआ है, किंतु इस प्रोजेक्ट में कई जगह भू-अधिग्रहण के कारण काम अटका पड़ा है.

2019 में प्रोजेक्ट पूरा करने रेलमंत्री ने दिया था निर्देश

विदित हो कि मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के इस ड्रीम प्रोजेक्ट रीवा-सिंगरौली रेल लाइन को तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 2019 तक सीधी तक रेल पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक पटरी निर्माण तो दूर भू-अर्जन की कार्यवाही भी राजस्व विभाग पूरी नहीं कर सका है. छुहिया पहाड़ में 4 किलोमीटर टनल का निर्माण का कार्य में भी पेंच फंसता नजर रहा है. मुआवजा वितरण नहीं होने और नौकरी नहीं मिलने से किसान टनल निर्माण में खलल डाल रहे हंै. 4 किलोमीटर टनल का खनन करने के लिए 2020 तक समय दिया गया है.

यह है प्रोजेक्ट का टारगेट

रीवा से सीधी तक 53 किमी का अर्थवर्क दिसंबर 2019 तक पूर्ण करना है. सोन नदी पर 750 मीटर लंबे पुल निर्माण की भी अनुमति मिली है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं किया जा सका है. रीवा से गोविंदगढ़ तक अर्थवर्क पूरा होने के बाद 20 किलोमीटर रेलमार्ग में पटरी बिछाने का काम 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रेलवे ने दिया है. इसमें बांसा में रेलवे स्टेशन भवन काम पूर्णता की ओर है. इसके अलावा सिलपरा व बांसा में कर्मचारियों के आवास का निर्माण भी हो रहा है. रेलवे 2018 तक यहां ट्रेन दौड़ाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन समय से कार्य पूरा नहीं होने से दो साल के लिए आगे बढ़ा दिया है.

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