रांची. आज के समय में जहां भारतीय परिवेश में बिना शादी के रहना ट्रेंड में है और धूमधाम से शादी रचाने के लिए लाखों, करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं झारखंड के गुमला जिले के एक गांव में लोग मजबूरन लिव इन में रहते हैं क्योंकि उनके पास शादी की दावत तक के पैसे नहीं है. गुमला के चरकटनगर गांव में राजू महली और मनकी देवी पिछले 20 साल से साथ रह रहे थे लेकिन अपनी मर्जी से नहीं. गरीबी के चलते, वह शादी की दावत आयोजित नहीं कर सके जो कि उनके समुदाय में शादी को मान्यता देने के लिए जरूरी है. 

सोमवार को ऐसे तमाम कपल्स के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया जहां राजू और मनकी जैसे 132 जोड़ों की शादी हुई. शादी की परंपरा के अनुसार, दोस्तों और रिश्तेदारों को भोज भी कराया गया. झारखंड के ओरांव, मुंडा और हो आदिवासियों के बीच शादी के बिना लिव-इन में रहने की परंपरा सामान्य है, क्योंकि इन समुदायों के लोग आर्थिक रूप से काफी पिछड़े होते हैं और शादी दावत के लिए खर्च वहन कर पाने में सक्षम नहीं होते हैं. 

स्थानीय बोलचाल में इन्हें धुकुआ कहा जाता है. इसमें महिलाओं को अपने पार्टनर के साथ रहने के लिए समाज की अनुमति लेनी होती है लेकिन पत्नी के बजाय वह धुकनी कहलाती है जिसका मतलब है- बिना शादी के महिला का घर में रहना. 

शादी आयोजित कराने वाले एनजीओ ने कहा कि यह प्रयास इस तमगे को हटाने के लिए है. राजू महली ने बताया, 'मैंने जमीन के एक छोटे हिस्से पर जुताई करता हूं और मेरे पास अपने साथी से शादी करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं हैं. हमारा एक बेटा और बेटी है. जब एनजीओ निमित्त ने हमें सामूहिक विवाह के बारे में बताया तो हम तुरंत तैयार हो गए.' 

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