नयी दिल्ली. सीबीआई निदेशक पद से गुरुवार को हटाये गये आलोक वर्मा के शुक्रवार को सरकारी सेवा से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राफेल मामले में बचाने के लिए सरकार केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) जैसी संस्था की आड़ में लुकाछिपी खेल रही है.

कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि जिन आरोपों के आधार पर वर्मा को हटाया गया वो मजाकिया हैं. पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार इस तरह से संस्थाओं को खत्म कर रही है. वह सीबीआई को अस्थिर करने और दूसरी संस्थाओं को कमजोर करने की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती. उन्होंने कहा, मोदी सरकार जानती है कि एक व्यक्ति के शासन के दौर के अंत की शुरुआत हो गयी है. सिंघवी ने कहा, उच्चस्तरीय समिति को कम से कम उनका पक्ष सुनना चाहिए था. कोई पक्ष नहीं सुना गया और कोई साक्ष्य नहीं देखा गया. उनको बिना सुने हटाया जाना नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है. जबकि, विपक्ष के नेता खड़गेजी ने पक्ष सुनने की बात कही थी.

उन्होंने दावा किया, सीवीसी जैसी संस्था की आड़ लेकर लुकाछिपी खेली जा रही है ताकि राफेल या किसी मामले में प्रधानमंत्री को बचाया जा सके, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिलेगी. सिंघवी ने कहा, पूरा आधार अगर सीवीसी रिपोर्ट है तो क्या इसका अवलोकन नहीं होना चाहिए था? यह रिपोर्ट खोखली है. इनमें लगाये गये ज्यादातर आरोप मजाकिया हैं. बहाना बनाकर वर्मा को हटाया गया. उन्होंने कहा, यह हैरानी की बात है कि किस प्रकार से सीवीसी का दुरुपयोग किया गया और सीवीसी ने अपना दुरुपयोग होने दिया. हम इसकी निंदा करते हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा, अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांगवाली राकेश अस्थाना की याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है. लेकिन, आरोप पर सीवीसी की रिपोर्ट बनी तथा इसके आधार पर वर्मा को हटा दिया गया. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के एक बयान का हवाला देते हुए सिंघवी ने कहा, अगर खड़गे ने नियुक्ति के समय एक बार विरोध कर दिया, तो फिर जब असंवैधानिक काम हो रहा है, तो उन्हें विरोध क्यों नहीं करना चाहिए. ये क्या बात हुई? आशा करता हूं कि इस सरकार के मंत्री इस तरह के आधार पर मंत्रालय नहीं चलाते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षतावाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने गुरुवार को वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1979 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के अधिकारी वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था. सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो वर्षों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होनेवाला था. लेकिन, इससे 21 दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया. मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने के पक्ष में थे, जबकि खड़गे ने इसका विरोध किया.

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