खबरार्थ. यदि आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे निर्णय पहले ही कर लिए जाते तो एमपी, राजस्थान जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा हार नहीं जाती, इसीलिए आर्थिक आधार पर आरक्षण के मुद्दे पर इन प्रदेशों के भाजपा समर्थक ज्यादा खुश नहीं हैं!

इस निर्णय के साथ ही यह धारणा प्रबल होती जा रही हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह केवल पीएम मोदी टीम के पाॅलिटिकल गार्ड हैं. उनकी सारी सियासी गतिविधियां केवल पीएम मोदी के पाॅलिटिकल मेकअप को बनाए रखने के लिए होती हैं, हालांकि विधानसभा चुनावों के बाद से यह पाॅलिटिकल मेकअप बेअसर होता जा रहा है?

एमपी, राजस्थान जैसे राज्यों के चुनाव में भाजपा के हारने में प्रादेशिक मुद्दों से ज्यादा बड़ी भूमिका गैस-पेट्रोल के दाम, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन जैसे कईं केन्द्रीय मुद्दों की थी, लेकिन पीएम मोदी सरकार ने तब इन्हें दूर करने के प्रयास नहीं किए. अब जबकि लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं तो पीएम मोदी सरकार को बचाने के लिए विभिन्न सियासी निर्णय लिए जा रहे हैं. 

दरअसल, विधानसभा चुनाव के समय यह आशंका भी व्यक्त की गई थी कि ये प्रादेशिक चुनाव पीएम मोदी टीम के लिए राजनीतिक प्रयोग की तरह थे और उनके नतीजों के आधार पर ही अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सुधार अभियान चलाया जा रहा है.

बहरहाल, इन विधानसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी टीम का न केवल एकाधिकार कमजोर पड़ा है, बल्कि एकतरफा अनुशासन भी खत्म हो रहा है. यही वजह है कि बतौर पीएम उम्मीदवार, नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी, सीएम योगी आदित्यनाथ आदि के नाम भी सामने आ रहे हैं, तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बदलने के सुझाव भी दिए जा रहे हैं.

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि नितिन गडकरी तो लगातार जो बयान जारी कर रहे हैं, वे पीएम मोदी पर ही अप्रत्यक्ष सियासी हमले हैं? 

उधर, भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना के सांसद संजय राउत का कहना है कि देश खंडित जनादेश की तरफ बढ़ रहा है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ऐसी स्थिति का इंतजार कर रहे हैं? 

खबर है कि... शिवसेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक राउत ने अखबार में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कद घटा है, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कद बढ़ा है. राउत का कहना है कि देश खंडित जनादेश की तरफ बढ़ रहा है और पीएम नरेंद्र मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी को मिला पूर्ण बहुमत- बर्बाद गए मौके, की तरह था. राउत के अनुसार, 2014 में मोदी के समर्थन में लहर थी, क्योंकि वोटरों ने तय कर लिया था कि कांग्रेस को हराना है, लेकिन आज तस्वीर बदल गई है. 

शिवसेना सांसद का कहना है कि मोदी की छवि अब फीकी पड़ गई है. राहुल गांधी का नेतृत्व मोदी के जितना बड़ा नहीं है, लेकिन उसे अब अहमियत मिल रही है, क्योंकि लोग मौजूदा सरकार से निराश हैं. 

राउत के अनुसार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता आगामी चुनावों में पार्टी के संभावित खराब प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं, लेकिन नितिन गडकरी के बयान इस बात के संकेत हैं कि हवा किस ओर बह रही है? गडकरी जैसे नेता की आरएसएस और भाजपा नेताओं के बीच बराबर स्वीकार्यता है. राउत का तो यह भी दावा है कि- गडकरी को भाजपा अध्यक्ष के तौर पर दूसरा कार्यकाल नहीं मिले, इसके लिए राजनीतिक साजिशें रची गईं थीं!

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भाजपा के प्रमुख नेता संघप्रिय गौतम ने कहा था कि- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को डेप्युटी पीएम बना देना चाहिए और गृहमंत्री राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना चाहिए. यही नहीं, संघप्रिय गौतम का तो यह भी कहना था कि- अमित शाह को राज्यसभा में कमान संभालनी चाहिए, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष की बागडोर शिवराज सिंह चैहान को सौंपी जानी चाहिए. इस बदलाव से बीजेपी कार्यकर्ताओं में विश्वास बढ़ेगा!

सियासी संकेत यही हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत की राह आसान नहीं है और पीएम मोदी का फिर-से प्रधानमंत्री बनना तो और भी मुश्किल है, बहुत संभव है कि केन्द्र में सहयोगी दलों के दम पर भाजपा की सरकार तो बन जाए, पर पीएम कोई और हो?

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