सिंगापुर. पूरी दुनिया में लोगों के रहने के लिए लगातार जगह कम होती जा रही है. ऐसे में सिंगापुर बिल्कुल नया मॉडल लेकर सामने आया है. उसके इस मॉडल का नाम अंडरग्राउंड मास्टर प्लान है. सुनकर भले ही आपको ये कुछ अटपटा लगे, लेकिन यह सच है. दरअसल , सिंगापुर में जनसंख्या के बढ़ने के साथ कम होती जगह को नए सिरे से मास्टर प्लान के तहत बसाने का फैसला किया है. आपको बता दें कि यह मास्टर प्लान जमीन के नीचे के लिए है. अब भी यदि आप इसको नहीं समझ पा रहे हैं तो आपको ये भी बता देते हैं कि सिंगापुर में जमीन के ऊपरी हिस्से को इंसानों के रहने के लिए और उसके निचले हिस्से को अन्य चीजों के इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा है.

सिंगापुर का यह बिल्कुल नया तरह का मास्टर प्लान इसी वर्ष से लागू होने वाला है. इसकी खासियत ये है कि जमीन के अंदर के हिस्से का इस्तेमाल अब पूरी तरह से बदल जाएगा. इस हिस्से में ट्रांसपोट सिस्टम से लेकर अन्य जरूरी जीजें बनाईं जाएंगी. इससे सिंगापुर अपनी एक नई पहचान भी बनाने जा रहा है. अंडरग्रांड मास्टर प्लान के तहत इंसानों के इस्तेमाल वाली सुविधाएं जैसे रेल लाइन, पैदल चलने के लिए रास्ते, पांच-लेन वाले राजमार्ग और एयर-कंडीशनिंग की पाइपों को जमीन के नीचे किया जाएगा.

प्लान के तहत इनमें से काफी कुछ काम को कर भी लिया गया है. सिंगापुर की पहचान आपको बता दें कि सिंगापुर अपने सुपरट्री वर्टिकल गार्डन की मीनारों से लेकर रात में फॉर्मूला वन रेसिंग के लिए पहचाना जाता है. इसके अलावा भी यहां कई दूसरी चीजें आकर्षण का केंद्र हैं. लेकिन अब सिंगापुर बिल्कुल नया कंसेप्ट लेकर सामने आ रहा है. यदि इसमें वह सफल हो गया तो वह पूरी दुनिया को एक क्रांतिकारी राह दिखा देगा. रीक्लेम पॉलिसी हुई बंद सिंगापुर में करीब 56 लाख लोग रहते हैं जिनकी संख्या 2030 तक 69 लाख हो जाएगी. ऐसे में लोगों के लिए जमीन का कम पड़ना कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.

सिंगापुर के इस अंडरग्राउंड मास्टर प्लान के पीछे दूसरी बड़ी वजह ये भी है कि सिंगापुर में कई दशकों से नई जमीन को चली आ रही रीक्लेम पॉलिसी को अब बंद कर दिया. इसके तहत खाली और बेकार पड़ी जमीन को रिहाइश के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा था. सिंगापुर के साथ एक बड़ी समस्या ये भी है कि क्लामेट चेंज के तहत हो रहे बदलावों के बाद समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. अंडरग्राउंड मास्टर प्लान में डाटा सेंटर, यूटिलिटी प्लांट, बस डिपो सहित गहरी-सुरंग वाली सीवेज प्रणाली, भंडारण और पानी के जलाशय भी होंगे.

यहां पर आपको ये भी बता दें कि सिंगापुर का एक्सप्रेस-वे नेटवर्क लगभग 180 किलोमीटर का है. इसमें से करीब दस फीसद जमीन के अंदर ही है. आने वाले समय में इसका विस्तार किया जाएगा. जानकार भी मान रहे हैं कि बदलते मौसम का असर कई चीजों पर पड़ रहा है. ऐसे में कई बार हालात बेहद कम समय में सोच से कहीं अधिक खराब हो जाते हैं. इसलिए उनको जमीन के नीचे ले जाना अच्छा उपाय है. इस मास्टर प्लान के लिए 3D तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. इस 3D तकनीक की मदद से बहुत से डाटा का विश्लेषण हो सकेगा, जिससे ना सिर्फ शहरी नियोजन में मदद मिलेगी बल्कि कोई आपदा भी संभाली जा सकती है. हालांकि सिंगापुर में जिस कंसेप्ट पर काम किया जा रहा है वह पूरी तरह से नया नहीं कहा जा सकता है.

लेकिन बड़े और व्यापक पैमाने पर इसकी शुरुआत करना जरूर नया है. यहां पर ये भी बताना लाजमी हो जाता है कि हाल ही में टेस्ला कंपनी के प्रमुख एलन मस्क की कंपनी ने अमेरिका में एक करोड़ डॉलर की लागत से तकरीबन दो किलोमीटर लंबी एक अंडरग्राउंड टनल बनाई है. यह सुरंग ट्रैफिक की समस्या से निजात पाने के लिए बनाई गई है. इस सुरंग में 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाई जा सकती है.

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