जैसे ही सर्दियों की शुरुआत होती है, वैसे ही अस्थमा यानी दमा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए तनाव भरे समय की शुरुआत हो जाती है. दरअसल इस मौसम में होने वाली साधारण सी सर्दी भी अस्थमा की शिकायत को बढ़ा देती है. अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को इसकी शिकायत है तो इस मौसम में अपना खास ख्याल रखने की जरूरत है, बता रही हैं राजलक्ष्मी त्रिपाठी

सर्दियों का मौसम सेहत के लिहाज से काफी अच्छा होता है, लेकिन दिल के मरीजों के साथ-साथ अस्थमा के मरीजों की दिक्कत इस मौसम में काफी बढ़ जाती है. इसका कारण यह है कि इस मौसम में श्वास नलियां सिकुड़ने लगती हैं और कफ भी ज्यादा बनता है. इन सारी बातों के अलावा इस मौसम में ठंड के कारण धुआं और वातावरण में घुले तत्व पूरी तरह से आसमान में ऊपर नहीं उठ पाते, जो एलर्जन का काम करते हैं. इसलिए सर्दियों के मौसम में अस्थमा के अटैक ज्यादा पड़ते हैं. श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सेठ बताते हैं कि इससे बचने के लिए यह बेहद जरूरी है कि इस मौसम में अपनी सेहत का खास ख्याल रखें, ताकि सूखी हवा, प्रदूषण आदि अस्थमा का अटैक न बढ़ा सकें.
अच्छी तरह से धोएं हाथ

सर्दियों के मौसम में अपने हाथों को साबुन या फिर हैंड वॉश से अच्छी तरह से धोएं. डॉक्टरों की मानें तो एल्कोहल युक्त हैंड सैनेटाइजर अस्थमा के अटैक को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे बचने के लिए हाथ धोने के लिए साबुन या अच्छी किस्म के एंटी बैक्टीरियल हैंडवॉश का इस्तेमाल बेहतर है.

सर्दियों में बढ़ जाती है अस्थमा की शिकायत

सर्दियों में अस्थमा के अटैक अन्य मौसम के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाते हैं. इसके दो मुख्य कारण हैं. पहला, इस मौसम में हवा सर्द और रूखी होती है, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है. दूसरा, सर्दियों के मौसम में ही लोगों को गले से संबंधित संक्रमण के साथ-साथ साइनस की शिकायत हो जाती है, जिसकी वजह से उसकी श्वास नली सूखने लगती है. इस कारण व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है और उसे अस्थमा के अटैक पड़ने लगते हैं. साल 2005 में जर्नल एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बात कही गई.

लगवाएं टीके

अगर आप सर्दियों के मौसम में अस्थमा को नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाएं. द सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार सर्दियों में होने वाले मौसमी बुखार और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए बच्चों और बड़ों को हर साल फ्लू के टीके लगवाने चाहिए.

आग के कारण वातावरण में नमी कम है हवा रूखी हो जाती है, जिसकी वजह से गला सूखने लगता है और इस वजह से आपको खांसी का दौरा पड़ने के साथ-साथ अस्थमा भी बढ़ सकता है. इसलिए आग के पास बैठने से बचें. ठंड के मौसम की सर्द और रूखी हवाओं से खुद को बचाने के लिए जब तक जरूरी ना हो, घर से बाहर ना जाएं.

हमेशा मुंह खोलकर सांस लेने की बजाय नाक से सांस लें, क्योंकि जब आप मुंह खोलकर सांस लेते हैं तो मुंह के रास्ते आपके फेफड़े तक बहुत सारे जम्र्स पहुंच जाते हैं, जो फेफड़े तक संक्रमण फैलाने का कारण बनते हैं. इससे बचने के लिए मुंह बंद रखने की कोशिश करें या बाहर जाएं तो मुंह ढककर रखें. नियमित तौर पर डॉक्टर द्वारा दी गयी दवाओं का सेवन करें और इन्हेलर हमेशा अपने साथ रखें. अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना भी जरूरी है.

(विनायक हॉस्पिटल के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सेठ से की गई बातचीत पर आधारित)

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