किसी भी जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों की बनती-बिगड़ती स्थिति इंसान को अहंकारी बनाती है तो आइए हम आपको बताते हैं कि कौन से ग्रह आपको अहंकारी बनाते हैं और अहंकार से कैसे बिगड़ सकता है आपका भाग्य. पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं.

सूर्य सहनशक्ति है तो मंगल अक्रामक और चंद्रमा शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों का प्रतीक. पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया यदि जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह एक-दूसरे के साथ किसी रूप में सम्बद्ध है तो व्यक्ति के अन्दर क्रोध अधिक रहता है. इसके अलावा मंगल शनि की युति क्रोध को जिद के रूप बदल देती है. राहु के लग्न, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बडा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है.

जनिए कौन से ग्रह बनाते हैं अहंकारी–

अहंकार मन से जुड़ी हुई भावना है. मन से आगे बढ़कर ये व्यवहार तक पहुंच जाता है. हर ग्रह अलग तरह का अहंकार पैदा करता है. अहंकारी बनाने में सबसे बड़ी भूमिका बृहस्पति और चन्द्रमा की होती है. ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  बृहस्पति व्यक्ति को परम अहंकारी बनाता है. दूसरे ग्रहों के साथ मिलकर बृहस्पति अलग तरह का अहंकार पैदा करता है. अलग-अलग अहंकार से अलग समस्या भी पैदा होती है.

कैसे जातक होते है झगड़ालू प्रवृत्ति–

वे सभी जातक जिनकी कुंडली मे मंगल राहु और शनि ज्यादा प्रभावित होते है वो लोग अधिक झगड़ालू प्रवृत्ति के होते है. यदि मंगल के साथ राहु होगा तो ज्यादा झगड़ा करते है, कयोंकि राहु शरीर मे गर्मी बढ़ाता है. यदि कुंडली में शनि कमजोर होगा तो भी झगड़े बहुत होते है. यदि चंद्रमा लग्न में या तीसरे स्थान में मंगल, शनि या केतु के साथ युत हो तो क्रोध के साथ चिडचिडापन देता है. वहीं यदि सूर्य मंगल के साथ योग बनाये तो अहंकार के साथ क्रोध का भाव आता है.

जानिए सूर्य और अहंकार का ज्योतिषीय संबंध–

पुश्तैनी जायजाद, दौलत और शोहरत अक्सर इंसान के दिमाग पर हावी हो जाते हैं. अहंकार उसी का नतीजा है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो कुंडली में सूर्य अगर मजबूत हो तो वह भी बना सकता है आपको अहंकारी.

– सूर्य वैभवशाली परंपरा और खानदान का अहंकार पैदा करता है

– कुंडली में सूर्य के ज्यादा मजबूत होने से ये अहंकार पैदा होता है

– आमतौर पर मेष, सिंह और धनु राशि वालों को ये अहंकार ज्यादा होता है

– सूर्य से मिला अहंकार संतान से जुड़ी समस्या देता है

जानिए मंगल और अहंकार का ज्योतिषीय संबंध–

जो अपने अहंकार पर जीत हासिल कर लेते हैं उन्हें ही मिलती है जिंदगी के हर पहलू में जीत. लेकिन ज्योतिष के जानकारों की मानें तो जिनकी कुंडली में मंगल मज़बूत होता है, उनमें ताकत को लेकर अहंकार बढ़ने लगता है और यह उनकी तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है.

– मंगल शक्ति का अहंकार पैदा करता है.

– इस तरह के अहंकार में इंसान अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगता है.

– वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ राशि में ये अहंकार ज्यादा होता है.

– ये अहंकार रिश्तों से जुड़ी समस्याएं देता है.

जानिए शनि और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध ––

काम हर इंसान करता है लेकिन कुछ लोगों को अपने काम करने की क्षमता और हुनर पर गुमान होने लगता है. ये होता है कुंडली के शनि के मज़बूत होने के कारण. आइए जानते हैं, शनि कैसे बना सकता है आपको अहंकारी.

– शनि काम करने की योग्यता का अहंकार देता है.

– ये लोग किसी और के काम को अपने काम और मेहनत के सामने कुछ नहीं समझते.

– वृष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों को ये अहंकार ज्यादा होता है.

– ये अहंकार करियर में उतार-चढ़ाव की वजह बनता है.

जानिए कैसे बचें अहंकार से?

–चांदी के गिलास में जल व दूध का सेंवन करें.

–11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें.

–गणेश स्त्रोत का नियमित पाठ करें.

— रोज सुबह उठकर अपने बड़ों के चरण स्पर्श करें.

— रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें.

— सूर्य के सामने गायत्री मंत्र का जाप करें.

अहंकार (क्रोध) शान्ति हेतु  विधि पूर्वक नकुल मंत्र का जाप कराना चाहिए या स्वयं करना चाहिए–

जिस प्रकार नकुल ने अहि का विच्छेद करके सत्य का रूप धारण किया था उसी प्रकार आप अपने जीवन में मधुरता की कामना से नकुल मंत्र का जाप करें या करवाएं.

- यथा नकुलो विच्छिद्य संदधात्यहिं पुनः. एवं कामस्य विच्छिन्नं धेहि वो यादितिः..

का जाप दुर्गादेवी के षोडषोपचार पूजन के उपरांत विधिवत् संकल्प लेकर इस मंत्र का जाप करने से रिश्तों की समस्त विषमाताऐं  समाप्त होकर जीवन में सुख प्राप्त होता है.

किसी ने बिल्कुल सटीक कहा है कि अपने भीतर से अहंकार को निकालकर खुद को हल्का कीजिए क्योंकि ऊंचा वही उठता है जो हल्का होता है. अगर आप अपनी खूबियों और तरक्की को ताउम्र बरकरार रखना चाहते हैं तो अहंकार से दूर ही रहिए. अपनी तरक्की और सुख के लिए ईश्वर को धन्यवाद करते रहें. अहंकार के राक्षस से बचने का यही सबसे कारगर रास्ता है.

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