पलपल संवाददाता, जबलपुर. प्रत्याशियों की घोषणा होते ही जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी में अंतरकलह बढ़ गया है, उत्तर मध्य में भाजपा के दो नेता बागी हो गये हैं और निर्दलीय चुनाव लडऩे का निर्णय लिया है, जिससे अधिकृत प्रत्याशी की टेंशन बढ़ गई है, इसी तरह की स्थिति पनागर विधानसभा क्षेत्र में भी नजर आ रही है.

बताया जाता है कि पूर्व प्रदेश भाजयुमो के अध्यक्ष धीरज पटेरिया और आलोक ओंकार तिवारी ने शहर की उत्तर मध्य सीट से  निर्दलीय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. भाजपा प्रत्याशी शरद जैन की नाम की घोषणा के साथ ही टिकट की दावेदारी कर रहे राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य धीरज पटेरिया ने पार्टी की स्थाई सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है, वहीं भाजपा के दिग्गज स्वर्गीय ओमकार प्रसाद तिवारी के पुत्र आलोक तिवारी भी टिकट न मिलने से नाराज हैं . इन दोनों नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे की तैयारी करनी शुरू कर दी है. वहीं पनागर विस सीट पर भी सुशील तिवारी इंदू के खिलाफ पूर्व विधायक नरेंद्र त्रिपाठी, पूर्व जिला पंचायत यादव भारत सिंह यादव, रजनी यादव सहित दर्जनों भाजपा के नेताओं द्वारा टिकट बदलने के लिये दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम भी समाप्त हो गया है, इस क्षेत्र के बागियों पर भी नजर रखी जा रही है.

भाजपा को ज्यादा अंतरकलह से जूझना पड़ रहा

प्रदेश में 15 साल से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी को इस बार विधानसभा चुनाव में जबरदस्त अंतर्कलह से जूझना पड़ रहा है. प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद से ही हर क्षेत्र से उम्मीदवारों के खिलाफ विरोध के स्वर उपज रहे हैं. यह स्थिति तब है जब भाजपा ने अंतर्कलह को रोकने के लिए बाकायदा मैनेजरों की तैनाती कर रखी थी, लेकिन पहली सूची जारी होने के बाद से भाजपा में मायूसी है और मैनेजर गायब हैं. अभी तक प्रदेश भर से दो दर्जन से ज्यादा टिकट बदलने की मांग प्रदेश भाजपा के सामने आ चुकी हैं, साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि टिकट नहीं बदला तो हार के लिए तैयार रहें. आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और नेता भाजपा छोड़ चुके हैं. 

पिछले दो चुनावों में डैमेज कंट्रोल रहा सफल, इस बार परेशानी बढ़ी

भाजपा को 2008 एवं 2013 के चुनाव में टिकट चयन के बाद भी अंतर्कलह एवं विरोध का सामना करना पड़ा था, तब भाजपा डैमेज कंट्रोल करने में सफल रही. इस बार विरोध के स्वर कुछ ज्यादा ही तेज हैं. पार्टी ने जिस तरह से टिकटों का चयन किया है, उसको लेकर ज्यादा नाराजगी है. यही वजह है कि कार्यकर्ता अब पार्टी की ओर से थोपे गए प्रत्याशियों के साथ काम करने को तैयार नहीं है. प्रत्याशी चयन से नाराज कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदेश कार्यालय पहुंच रहे हैं,

कार्यकर्ताओं के रूठने का यह है प्रमुख कारण

भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी का कारण यह है कि पार्टी के विधायक, मंत्रियों ने पिछले साल तक उनकी जमकर उपेक्षा की. चुनाव जीतने के बाद उनके काम नहीं किए. यही वजह है कि कार्यकर्ता टिकट चयन को लेकर विरोध कर रहे हैं. ज्यादातर विरोध उन प्रत्याशियों का हो रहा है, जिन्हें भाजपा ने फिर से चुनाव मैदान में उतारा है. 

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