पलपल संवाददाता, जबलपुर. अंतत: भाजपा ने जबलपुर शहर की दो सीटों पर भी आखिरकार अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर ही दी, भाजपा ने पिछले चुनावों में रहे प्रत्याशियों पर ही इस बार भी विश्वास जताया. पश्चिम क्षेत्र से सरदार जी अन्य दावेदारों पर ज्यादा असरदार हुए, वहीं मंत्री जी शरद जैन भी कटती टिकट पाने में सफल रहे. यहां तक तो बात ठीक है, किंतु इन सीटों पर जो दावेदार थे, वे टिकट की घोषणा होते ही अवसाद में चले गये हैं, उनके ठौर-ठिकानों व समर्थकों मेें सन्नाटा छा गया है. वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिरकार वे अब करें तो क्या करें. क्या राजनीति से ही संन्यास ले लें, क्योंकि इतने सालों से लगातार दरी-फट्टी उठाते-उठाते जवानी से प्रौढ़ता की ओर कदम बढ़ चुके हैं, किंतु उनकी मेहनत का फल उन्हें नहीं मिल पा रहा है.

कमलनाथ किसे टिकट दिलाएं, बना है असमंजस..

- जबलपुर शहर की दो सीटों पर कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, उत्तर पश्चिम व आरक्षित सीट पूर्व क्षेत्र के दावेदारों में असमंजस की स्थिति है कि आखिरकार पार्टी किसे टिकट देती है. शहर की राजनीति में चल रही चर्चाओं की माने तो दोनों ही सीटों पर कमलनाथ अड़े हुए हैं, किंतु बात इस बात पर अटकी है कि दो में से एक ही सीट पर उनके समर्थक को टिकट दी जाये. अब देखने वाली बात यह है कि दोनों ही सीट पर जो प्रबल दावेदार हैं, उन्हें कमलनाथ से ही आस है कि वे ही उनकी नैया पार लगा सकते हैं. चर्चा तो यह भी है कि मामला एक ही सीट पर सेटल हो सकता है, यानी कमलनाथ दो में से एक ही सीट पर अपना दांव खेल सकते हैं.

दिल छोटा मत करो, मुर्दानगी क्यों है छाई...

- पूर्व क्षेत्र से टिकट की आस में पूर्व विधायक जी की आंखें पथरा गई हैं, उनके निवास स्थान पर देर रात से तड़के तक समर्थकों का जमावड़ा हैं, वे सभी दिल्ली से पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं कि कहीं से कोई पॉजीटिव न्यूज मिले, ताकि उन्हें भी दीवाली का त्यौहार मनाने का आनंद प्राप्त हो सके, किंतु उनके मन की मुराद पूरी नहीं हो पा रही है. समर्थक इतने मायूस हैं कि उन्हें पश्चिम क्षेत्र के कांग्रेसी प्रत्याशी ढांढस बंधाने व मनोबल बढ़ाने के लिए उनके पास ही पहुंच गये और कहा कि निराश नहीं हों, टिकट भैया को ही मिलेगी, अब उनके ढांढस बंधाने का कार्यकर्ताओं पर कितना असर हुआ है, यह तो पता नहीं लेकिन कार्यकर्ता तो यही चाह रहा है कि उनके भैयाजी को ही टिकट मिले.

कितने पहरे बैठा लो, गिफ्ट देना है तो देना है..

- प्रशासन व प्रत्याशियों के बीच इन दिनों लुका-छिपी का खेल जमकर चल रहा है. प्रशासन हर प्रत्याशियों की मूवमेंट पर नजर रखे हुए है कि कहीं नेताजी आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं कर रहे, किंतु तू डाल-डाल, मैं पात-पात की कहावत को चरितार्थ करते हुए प्रत्याशी स्वयं सामने नहीं आ रहे हैं, बल्कि अपने ऐसे समर्थकों के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं, मतदाताओं को लुभाने के लिए दीपावली गिफ्ट पहुंचाने का काम लगातार कर रहे हैं. अब प्रशासन के पास दिक्कत इस बात की है कि वह प्रत्याशी पर तो नजर रख सकती है, किंतु हर कार्यकर्ता की जासूसी करना संभव नहीं है.

रिपोर्ट प्रदीप मिश्रा, अजय श्रीवास्तव.

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