नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मामले की सुनवाई टालने के बाद इसे लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. एक तरफ संत समाज दिल्ली में धर्मादेश आयोजित कर मोदी सरकार पर अध्यादेश का दबाव बना रहा है तो दूसरी तरफ विपक्ष हमला कर रहा है कि 2019 के चुनाव को देखते हुए बीजेपी मंदिर मुद्दा उठा रही है. इस बीच रविवार को धर्मादेश में पहुंचे आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि देश के लाखों लाख लोग चाहते हैं कि अयोध्या में मंदिर बने.

श्री श्री रविशंकर ने धर्मादेश में अयोध्या के साथ-साथ सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा भी उठाया. अयोध्या में सभी पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश में जुटे आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला पर फैसला दिया है उससे लोगों को दुख हुआ और अयोध्या का फैसला नहीं आया, इसपर भी दुख हुआ. श्री श्री ने कहा कि हम सब सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन सबरीमाला पर कहना चाहूंगा कि भारत हमेशा से माताओं को मानता आ रहा है.

श्री श्री रविशंकर ने कहा कि कुछ मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी एक प्रथा चली आ रही है. उन्होंने सबरीमाला के संदर्भ में कहा, 'वहां 41 दिन का व्रत करने वाले लोग ही जाते थे. महिलाएं मासिक धर्म के अंतर्गत रहती थीं तो उनके लिए 41 दिन का व्रत असंभव था इसलिए प्रवेश का नियम बना.' श्री श्री ने कहा कि हमारा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय रिव्यू पिटिशन को स्वीकार करेगा.

संतों के लिए नहीं, आम जनता चाहती है मंदिर: रविशंकर

श्री श्री ने कहा कि संतों को मंदिर की जरूरत नहीं होती है. संत जहां होते हैं मंदिर वहीं होता है, लेकिन आम जनता चाहती है कि मंदिर बने. उन्होंने आगे कहा कि मंदिर के लिए हम प्रयत्न और प्रार्थना, दोनों का ही रास्ता अपनाएंगे. जाहिर तौर पर श्री श्री मध्यस्थता की वकालत करते दिखे.

संघ ने दिए हैं 1992 जैसे आंदोलन के संकेत

आपको बता दें कि पिछले दिनों संघ ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए 1992 जैसा आंदोलन भी किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में मामला टलने के बाद संघ सहित अन्य हिंदूवादी संगठन अध्यादेश लाकर मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि इस बार राम के नाम का दिया जलाएं, अयोध्या में काम जल्द शुरू होगा. हालांकि स्पष्ट नहीं बताया है कि काम मंदिर का शुरू होगा या राम की मूर्ति का. मोदी सरकार के मंत्रियों ने भी राम मंदिर को लेकर बयानबाजी की है. उमा भारती ने कहा है कि इसके लिए वह हर तरह की मदद को तैयार हैं, वहीं दूसरे केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी सीधे कानून की वकालत कर रहे हैं. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और बीजेपी को इस मसले पर घेरा है. कांग्रेस ने कहा है कि 2019 का चुनाव आ रहा है और मोदी सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा उठा रही है.

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