इनदिनों. क्या आम चुनाव- 2014 में संघ द्वारा जुटाई गई ताकत को पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संभाल नहीं पाए हैं? आम चुनाव- 2019 के नतीजों की आशंका तो यही संकेत दे रही है!

अभी एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के चुनावी नतीजों पर नजर रखी जा रही है और यदि इन राज्यों में पिछले चुनावों के नतीजों के सापेक्ष बेहतर कामयाबी नहीं मिली तो पीएम मोदी टीम की सियासी क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा? हालांकि, कोशिश यही की जा रही है कि इन राज्यों में हारने की स्थिति में सारी जिम्मेदारी प्रादेशिक नेतृत्व पर डाल दी जाए, लेकिन लगता नहीं है कि ऐसा करने में कामयाबी मिलेगी!

दरअसल, 2014 में केन्द्र में भाजपा सरकार बनने के बाद पीएम मोदी, सेफ्पी... सेल्फ फोकस्ड पाॅलटिक्स में जुट गए, नतीजा? इस इमेज बिल्ंिडग के चक्कर में भाजपा के भीतर ही पीएम मोदी के विरोधी बढ़ते गए. ये विरोधी प्रादेशिक चुनावों के नतीजों के बाद खामोश रहेंगे, इसमें शक है!

तो होगा क्या? भाजपा के भीतर उठने वाली सत्ता विरोधी लहर को दबाने के लिए नेतृत्व परिवर्तन ही एकमात्र रास्ता है! यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो इस वक्त भाजपा में सबसे सशक्त चेहरा- राजनाथ सिंह ही हैं?

वर्ष 2014 के आम चुनाव तक भाजपा के पास लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, शिवराज सिंह चैहान सहित आधा दर्जन नेता पहली पंक्ति के थे, लेकिन ये सारे नाम, क्यों? और कैसे? धुंधले पड़े यह बेहतर तरीके से वे ही जानते हैं!

इस वक्त नजर डालें तो पीएम पद के लिए पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर केवल राजनाथ सिंह का नाम ही है, और इसीलिए राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि संघ ने चाहा तो अगले प्रधानमंत्री पद के दावेदार राजनाथ सिंह हो सकते हैं?

दरअसल, नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी टीम ने कांग्रेस मुक्त भारत पर तो काम किया ही, केन्द्रीय भाजपा पर एकाधिकार के मद्देनजर विरोधियों को किनारे करने के भी प्रयास किए, वह कामयाब भी हो जाती लेकिन पीएम मोदी जनहित के कार्यों के मोर्चे पर ध्यान नहीं दे पाए, गैस-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने अच्छे दिनों को बुरे दिनों में बदल दिया तो एससी-एसटी एक्ट में संशोधन जैसे निर्णय ने भाजपा के वोट बैंक- सामान्य वर्ग को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दों पर तो जैसे तैसे मन को मनाते रहे, लेकिन राम मंदिर मुद्दे ने भाजपा को हिला कर रख दिया है. गैस-पेट्रोल के मुद्दे पर कभी पीएम मोदी के सबसे बड़े प्रशंसक रहे बाबा रामदेव ने खुद को दल निरपेक्ष घोषित कर दिया तो राम मंदिर को लेकर भाजपा के सबसे बड़े समर्थक रहे साधु-संत ही अब भाजपा की नियत पर सवाल उठा रहे हैं?

सियासी संकेत यही हैं कि अगले आम चुनाव में दल निरपेक्ष जनता तो बाद में, पहले अपनों का सक्रिय समर्थन जुटाना भी पीएम मोदी टीम को भारी पड़ेगा! मोदी मैजिक तो बचा नहीं है, अब यदि प्रादेशिक चुनावों में भी भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती हैं तो भाजपा में नया जोश भरने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत पड़ेगी? और इसीलिए राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संघ ने चाहा तो राजनाथ सिंह अगले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल

2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा

3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार

4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन

6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे

7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर

8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट

9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका

10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत

11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।