इनदिनों. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबारी सहूलियत के मोर्चे पर भारत ने लंबी छलांग लगाई है. विश्व बैंक की इस रैंकिंग 2019 में भारत 23 पायदान की छलांग के साथ 77वें स्थान पर आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा ‘मिनिमम गवर्नमेंट टू मैक्सिमम गवर्नेस’ के मंत्र पर अमल और लंबित सुधारों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों से देश की रैंकिंग में यह सुधार आया है. इस मामले में पिछले साल भारत 100वें स्थान पर था. भारत की रैंक में सुधार का मतलब यह है कि इससे दुनियाभर में निवेशकों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में सकारात्मक संदेश जाएगा. निश्चित ही यह देश के लिये आर्थिक एवं व्यापारिक दृष्टि से एक शुभ सूचना है.

एक नयी रोशनी है एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आर्थिक एवं व्यापारिक प्रयोगों एवं नीतियों की सफलता एवं प्रासंगिकता पर मोहर है. उपयोगिता का एक तगमा है. जिससे लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यदि उत्साहित हो तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है. जो भी हो. रेटिंग सुधरना सबके लिए अच्छी खबर है. सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि माहौल सुधरने का लाभ सभी सेक्टर्स यानी बड़ी कम्पनियों के साथ मझौली एवं छोटी कम्पनियों एवं व्यापारियों को मिले.

कारोबारी सुगमता सूचकांक में उछाल विभिन्न विभागों के सतत प्रयासों का परिणाम है. सुधार की मानसिकता और दृष्टि में परिवर्तन से हमें यह सफलता हासिल हुई है. यह इसलिए और भी महत्वपूर्ण है कि इससे हम और सुधारवादी कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे. भावी सुधार इस बात पर निर्भर करेंगे कि हम आज भी जिन क्षेत्रों में पिछडे़ है. उनमें सुधार कर पाते हैं या नहीं? भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में सबसे अहम भूमिका उसके बढ़ते मार्केट की हो सकती है. इस दृष्टि से भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने में कारोबारी सुगमता सूचकांक में उछाल की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

विश्व बैंक की यह रैंकिंग विश्व समुदाय को भारत की ओर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगा. यह एक सुखद संयोग है कि विश्व बैंक के निष्कर्ष ने मोदी सरकार की नीतियों पर ठीक उस समय मुहर लगाई जब एक अमेरिकी संस्था के सर्वेक्षण से यह सामने आया कि तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय प्रधानमंत्री की लोकप्रियता न केवल कायम है. बल्कि उसमें वृद्धि भी हो रही है. नोटबंदी और जीएसटी से लगे घावों को भरने के लिये सरकार के द्वारा हर दिन प्रयत्न किये जा रहे हंै. घोर विरोध. नोटबंदी एवं जीएसटी के घावों को मोदी गहराई से महसूस कर रहे हंै.

ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था को पहले से सक्षम और भरोसेमंद बताने वाली रैंकिंग मोदी सरकार के साथ-साथ उद्योग-व्यापार जगत के लिए भी एक खुशखबरी है. दक्षिण एशियाई देशों में भारत को सबसे ऊंची रैंकिंग मिली है. पिछले तीन वषों में भारत ने इसमें 65 पायदान की अनूठी छलांग लगाई है. भारत के आकार और जटिलता वाले कुछ ही देशों को ऐसी सफलता मिली है. इस सूचकांक में सुधार ‘मेक इन इंडिया’ के लिए इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है. क्योंकि व्यापार के लिए माहौल बनाने में धारणा का अहम योगदान होता है. इसके लिए लागू किए गए सुधार दर्शाते हैं कि हमने व्यापार के लिए स्वयं को उदार बनाया है. परिवर्तनवादी बने हैं.

आज देश बिजली. छोटे निवेशकों के संरक्षण और ऋण सुविधा के पैमाने पर शीर्ष 25 देशों में शामिल हो गया है. इसी तरह निर्माण परमिट और विदेशी व्यापार के मामले में चोटी के 80 देशों में से एक है. यह बड़ी उपलब्धि रातोंरात हासिल नहीं हुई है. इसके पीछे केन्द्र सरकार. कई एजेंसियों की चार वर्षों की कड़ी मेहनत है जिससे ऐसा सुधारवादी माहौल बना है. हम अपने देश में भले ही नोटबंदी एवं जीएसटी को लेकर विरोधाभासी हो लेकिन इन आर्थिक सुधारों का विदेशों में व्यापक स्वागत हुआ है और माना गया है कि पहले नोटबंदी के द्वारा आर्थिक अनियमितताओं और फिर जीएसटी के जरिये भारतीय अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया गया.

चूंकि विपक्ष इन दोनों फैसलों को लेकर ही सरकार पर निशाना साधने में लगा हुआ था इसलिए अब उसके समक्ष यह कहकर खीझने के अलावा और कोई उपाय नहीं कि विश्व बैंक का ताजा आकलन कोई मायने नहीं रखता. हकीकत यह है कि इस आकलन की अपनी एक अहमियत है और वे अंतरराष्ट्रीय उद्योग-व्यापार जगत एवं निवेशकों के रुख-रवैये को प्रभावित भी करती हैं. आने वाले समय में भारत का व्यापार इससे निश्चित रूप से प्रभावित होगा. पिछले चार वर्षाें में हमने जो सीखा है वह यह है कि भारत में आमूलचूल बदलाव लाना तब संभव है जब हम उसके लिए पूरे मन. माहौल एवं मनोयोग से कार्य करते हैं. जब हमने इन प्रयासों को शुरू किया तो कुछ लोग ही इनकी सफलता को लेकर आश्वस्त थे कि विश्व बैंक की सूची में भारत की स्थिति में सुधार हो सकता है. हम न केवल 65 पायदान ऊपर चढ़े हैं. बल्कि हमने अपने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा की है.

भारत ने सुशासन की ओर कदम बढ़ाए हैं. अच्छी नीतियां बन रही हैं और अच्छी राजनीति हो रही है. कारोबारी सुगमता को लेकर शीर्ष देशों में स्थान बनाने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें आवश्यक सुधारों को लागू करने के लिए उनमें और गति लाने और इसी भावना से कार्य करते रहने की आवश्यकता है. कम-से-कम भारत की अर्थ व्यवस्था को यदि मजबूती मिलती है जो उस पर तो सर्वसम्मति बननी चाहिए. ऐसे विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सभी में उत्साह का संचार होना चाहिए. उसका तो स्वागत होना ही चाहिए. यह किसी पार्टी को नहीं. देश को सुदृढ़ बनाने का उपक्रम है. इस पर संकीर्णता एवं स्वार्थ की राजनीति को कैसे जायज माना जासकता है? नये आर्थिक सुधारों. कालेधन एवं भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिये मोदी ने जो भी नयी आर्थिक व्यवस्थाएं लागू की है.

उसके लिये उन्होंने पहले सर्वसम्मति बनायी. सबकी सलाह से फैसले हुए हैं तो अब उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं तो इसमें सभी को खुश होना चाहिए. यह अकेली भाजपा की खुशी नहीं हैं. कुछ भी हो ऐसे निर्णय साहस से ही लिये जाते हैं और इस साहस के लिये मोदी की प्रशंसा हुई है और हो रही है. नरेन्द्र मोदी का आर्थिक दृष्टिकोण एवं नीतियां एक व्यापक परिवर्तन की आहट है. उनकी विदेश यात्राएं एवं भारत में उनके नये-नये प्रयोग एवं निर्णय नये भारत को निर्मित कर रहे हैं. विश्व बैंक ने भी इन स्थितियों को महसूस किया है. मोदी की संकल्प शक्ति को पहचाना है. तभी वे रेटिंग एवं रैंकिंग दे रहे हैं. मोदी देश को जिन दिशाओं की ओर अग्रसर कर रहे हैं. उससे राजनीति एवं व्यवस्था में व्यापक सुधार देखा जा रहा है. आर्थिक क्षेत्र में हलचल हो रही है.

नयी फिजाएं बनने लगी है. निश्चित रूप से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण शेयर मार्केट से लेकर कमोटिडी मार्केट तक विदेशी कंपनियों को बेहतर रिटर्न भारत से ही मिल सकता है. इस बात पर दुनिया में एक अनुकूल वातावरण बनने लगा है. सभी की नजरें भारत पर टिकी है. यही कारण है कि वे भारत को काफी तवज्जो दे रही है. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंक पर भारत की स्थिति में एक बार फिर सुधार से विश्वास के नये दीप जले हैं. आर्थिक सुधारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है जो ऐसा माहौल सुनिश्चित करेगी जिससे उद्योगों.

निवेश और अवसरों को प्रोत्साहन मिले और भारत शक्तिशाली बनकर उभर सके. विश्व बैंक ने भारत को रैंकिग देते हुए क्या दृष्टिकोण अपनाया. यह महत्वपूर्ण नहीं है. लेकिन जिन आधारों पर इस तरह की रैंकिंग मिलती है. हमें अपने वे आधार मजबूत करने चाहिए. जिनमें कर्ज लेने की सुगम व्यवस्था. कर अदा करने की सरल प्रक्रिया. बैंकों की ऋण देने की इच्छाशक्ति. उद्योग चालू करने की प्रक्रिया. नये व्यापारियों के लिये कम-से-कम कानूनी व्यवधान एवं व्यापार सुगम बनाने के कदम आदि पर हमें गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए. यह रैंकिंग भारत को आर्थिक एवं व्यापारिक दृष्टि से एक नया मुकाम देगी.

इसके लिये भारत सरकार को जमीनी स्तर पर व्यापार सुगम बनाने के कदम उठाने चाहिए. छोटे उद्योगों के दर्द को दूर करने की जरूरत है. नये व्यापारिक उद्यमों को प्रोत्साहन दे. स्टार्टअप केवल कागजों में न होकर जमीन पर आकार ले. मेकिंग इंडिया कोरा उद्घोष न रहे बल्कि दुनिया में इसका परचम फहराये. बहुत सारे लोग जितनी मेहनत से नर्क में जीते हैं. उससे आधे में वे स्वर्ग में जी सकते हैं. यही मोदी का आर्थिक दर्शन है और यही मोदी के आर्थिक सुधारों का प्रयोजन है और उसी पर विश्व बैंक ने भी मोहर लगायी है.

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