नई दिल्ली. आजाद भारत में पहली बार केन्द्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के खिलाफ इस शक्ति का उपयोग किया है. मीडिया में आयी खबर के अनुसार, केन्द्र सरकार ने आरबीआई गवर्नर को हाल ही में एक पत्र भेजकर अपने इस कदम की जानकारी दी है. जिसके तहत सरकार, जनहित के फैसलों जैसे लिक्विडिटी के मुद्दे, बैंकों की कमजोर स्थिति और छोटे और मझले उद्योगों को कर्ज आदि पर आरबीआई गवर्नर को निर्देश देगी.

आपको बता दें कि आरबीआई की स्वायत्तता के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल, केन्द्र सरकार और आरबीआई के बीच चल रही तनातनी अपने चरम पर पहुंच गई है. सरकार ने आरबीआई एक्ट के तहत मिली एक अहम शक्ति का इस्तेमाल करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर को जनहित के मुद्दों पर निर्देश देने का फैसला किया है. बता दें कि आजाद भारत के इतिहास में किसी भी सरकार ने इस शक्ति का अभी तक इस्तेमाल नहीं किया था.

केन्द्र सरकार ने आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल किया है. इस शक्ति के तहत सरकार को अधिकार है कि यदि जनहित से जुड़े कुछ मुद्दों को सरकार अहम और गंभीर समझती है, तो वह आरबीआई गवर्नर को सलाह या निर्देश दे सकती है. गौरतलब है कि सरकार को ये शक्ति भले मिली हुई है लेकिन अभी तक किसी सरकार ने इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया था. यहां तक कि 1991 में जब भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही थी तब भी और जब साल 2008 में वैश्विक मंदी ने अर्थव्यवस्था को घेरा था, तब भी सरकार ने इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया था.

ऐसे में मौजूदा सरकार द्वारा आरबीआई एक्ट द्वारा प्रदत्त शक्ति का इस्तेमाल करने से सरकार और आरबीआई के बीच जारी तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. चूंकि अभी तक किसी भी सरकार ने इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया है तो यह साफ नहीं है कि सरकार इसे कैसे क्रियान्वित करेगी?

आपकी जानकारी में बीते शुक्रवार को रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचायज़् ने एक कायज़्क्रम के दौरान सार्वजनिक तौर पर रिजर्व बैंक की स्वायत्तता बरकरार रखने और सरकार की तरफ से पड़ रहे दबाव का जिक्र किया था. विरल आचार्य का यह बयान ऐसे वक्त आया था, जब सरकार देश में पेमेंट सिस्टम के लिए एक नई रेग्युलेटर बनाने की संभावना पर विचार कर रही है. इसके साथ ही सरकार रिजर्व बैंक द्वारा कई बैंकों को लेंडिंग नियमों में छूट दिए जाने के लिए रिजवज़् बैंक पर कथित दबाव बना रही है.

बहरहाल रिजर्व बैंक ने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए सरकार के इस कदम से नाराजगी जाहिर की. जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सरकार को निशाने पर ले लिया था. आरबीआई और सरकार के बीच की तनातनी सार्वजनिक हो जाने पर सरकार ने काफी नाराजगी जाहिर की थी और इसका जिम्मेदार आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को माना था.

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