इनदिनों. पूर्व केबिनेट मंत्री और बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया और डूंगरपुर के पूर्व विधायक पूंजीलाल के बीच बातचीत का एक ऑडिया इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसके बाद वागड़ कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा फिर से जोरो पर है, लेकिन अकेले मालवीया ही नहीं हैं गुटबाजी की सियासत में, उन्हें भी विधानसभा चुनाव में हराने की अप्रत्यक्ष कोशिशें होती रही है तो ताराचन्द भगोरा की राजनीतिक राहों में भी कम कांटे नहीं बिछाए गए हैं!

इसी गुटबाजी का नतीजा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा वागड़ की नौ में से आठ विधानसभा सीटों पर कब्जा करने में कामयाब रही थी? कुछ समय पहले ही मैंने लिखा भी था कि यदि महेन्द्रजीत सिंह मालवीया, ताराचन्द भगोरा और अर्जुन बामनिया एकजुट होकर कांग्रेस के लिए खड़े हो जाएं तो वागड़ में भाजपा 2013 की जीत नहीं दोहरा सकती है!

याद रहे, वागड़ कांग्रेस में यदि गुटबाजी नहीं होती तो अपनी राजनीतिक योग्यता के दम पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी प्रधानमंत्री और आदिवासियों के मसीहा भीखाभाई राष्ट्रपति बन गए होते?

यदि ऐसा नहीं होता तो तेजतर्रार एमएलए नाथूराम बोरी राजस्थान सरकार में मंत्री बन गए होते, महेन्द्र परमार लोकसभा का चुनाव नहीं हारते, दिनेश जोशी विधायक बन जाते, पवन कुमार रोकड़िया जिला प्रमुख का चुनाव नहीं हारते!

वागड़ में कांग्रेस को हराने में कई बार इसी गुटबाजी ने बड़ी भूमिका निभाई है तो वागड़ कांग्रेस के इतिहास में गुटबाजी के किस्सों की भरमार है? 

पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजेश पायलेट का बांसवाड़ा में कार्यक्रम था. हजारों लोग इंतजार करते रहे, लेकिन हवाई जहाज का सही समय पर उतरना संभव ही नहीं हो पाया? राजेश पायलेट ने मुझसे कहा- मैं तो अपने वादे के हिसाब से आ गया था, लेकिन हवाई जहाज को उतारने के लिए निर्देश मिलने में ही देरी होती रही! नतीजा? बांसवाड़ा पहुंच कर भी पायलेट सभा में नहीं पहुंच पाए! 

पं लक्ष्मीनारायण द्विवेदी के नेतृत्व में बांसवाड़ा में राजस्थान ब्राह्मण महासभा का प्रादेशिक सम्मेलन आयोजित हुआ था. इसमें पूर्व राष्ट्रपति डाॅ शंकरदयाल शर्मा को आना था, लेकिन कांग्रेस की प्रादेशिक सरकार के व्यवस्थाओं के सवाल पर यह संभव नहीं हो पाया. हालांकि, यह पहला मौका था जब कांग्रेस के मंत्री भैरूलाल भारद्वाज और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ललित किशोर चतुर्वेदी ने एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन किया!

नवभारत टाइम्स, जयपुर के जमाने में लोकसभा चुनाव के लिए बांसवाड़ा-डंूगरपुर सीट के लिए भीखाभाई के नाम की घोषणा हो गई थी और सूची टाइम्स आॅफ इंडिया में प्रकाशित भी हो गई थी, लेकिन ऐन मौके पर उम्मीदवार बदला गया और महेन्द्र परमार ने चुनाव लड़ा. यह चुनाव महेन्द परमार हार गए!

बागीदौरा से लगातार चुनाव जीतते रहे नाथूराम बोरी का विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की अंतिम सूची में नाम था, लेकिन जब सूची जारी की गई तो नाथूराम नाम के आगे भगत जुड़ा हुआ था?

जो नेता हरिदेव जोशी को राजनीतिक नुकसान नहीं पहुंचा पाए थे, उन्होंने दिनेश जोशी को चुनाव में हरवा दिया और जब बाद में बांसवाड़ा विधानसभा से कांग्रेस के जीतने का माहौल बना तो दिनेश जोशी को टिकट ही नहीं मिला!

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिनकर लाल मेहता सेवानिवृत्ति के बाद बांसवाड़ा में थे. विधानसभा चुनाव होने थे. मैने नवभारत टाइम्स के लिए उनसे बातचीत की थी, क्योंकि वे कांग्रेस के लिए सबसे सशक्त उम्मीदवार हो सकते थे, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया, परिणाम? कांग्रेस हार गई!

इस वक्त भी वागड़ में कांग्रेस के लिए बेहतर संभावनाएं हैं यदि कांग्रेस- महेन्द्रजीत सिंह मालवीया, ताराचन्द भगोरा और अर्जुन बामनिया, तीनों को टिकट देती है और कांग्रेस गुटबाजी-मुक्त होकर चुनाव लड़ती है! लेकिन, सवाल अभी भी कायम है- क्या ऐसा हो पाएगा?

 * यह भी पढ़ें... मालवीया, भगोरा और बामनिया एक हुए तो वागड़ में जीत दोहराना भाजपा के लिए मुश्किल?  

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