खबरार्थ. बिहार में सीटों के बंटवारे की चर्चा के बीच सीएम नीतीश कुमार दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे, खबर है कि... दोनों नेताओं के बीच लगभग आधे घंटे तक बातचीत हुई? 

वैसे तो इसे औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है, किन्तु सियासी सयानों का मानना है कि यकीनन बिहार के विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई होगी! 

एम्स में रेगुलर चेकअप कराने के बाद नीतीश कुमार पीएम मोदी से मिलने के लिए प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे और इसके बाद उनकी मुलाकात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी हुई.

आम चुनाव 2019 के लिए अब कुछ ही महीनों का वक्त बचा है, लिहाजा केंद्र की सत्ताधारी भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ लोकसभा सीटों के बंटवारे पर विचार-विमर्श तेज कर दिया था! 

खबर है कि... इन मुलाकात के बाद बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों के बंटवारे का मामला सुलझ गया है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के बीच मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच लोकसभा में बिहार में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी!

इस बैठक के बाद अमित शाह ने प्रेस को इसकी जानकारी दी. अमित शाह के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बातचीत हो चुकी है. अमित शाह द्वारा किए गए ऐलान पर सहमति बन गई है कि दोनों पार्टियां बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी?

किस सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा? इसकी जानकारी भी जल्दी ही दे दी जाएगी! इस फैसले से दूसरे सहयोगी दलों को परेशानी हो सकती है, लेकिन अमित शाह का कहना था कि उपेन्द्र कुशवाहा और रामविलास पासवान हमारे साथ बने रहेंगे? सभी सहयोगी दलों के बिहार के नेता मिलकर सीटों पर फैसला लेंगे!

हालांकि, रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी पहले ही सीट बंटवारे के फार्मूले से नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं.

बिहार में जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी), तीनों ही एनडीए के सहयोगी हैं, किन्तु इन घटक दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी घमासान मचा था और भाजपा के लिए कुछ जीती हुई सीटों तक का त्याग करने के बावजूद यह बंटवारा आसान होता नजर नहीं आ रहा था? 

दरअसल, दिक्कत यह थी कि बिहार में पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा, आरएलएसपी और एलजेपी ने मिलकर लड़ा था, लेकिन बाद में प्रदेश की सत्ता पर काबिज जेडीयू भी एनडीए का हिस्सा बन गई, लिहाजा अब सीटों का बंटवारा बड़ी परेशानी का कारण था? 

वैसे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम नीतीश कुमार की जेडीयू की सियासी सोच पीएम मोदी की भाजपा से कुछ खास नहीं मिलती है, यही नहीं जेडीयू और भाजपा, दोनों के वोट बैंक का नेचर भी अलग-अलग है, लेकिन लालू यादव से तालमेल नहीं बैठने के कारण मजबूरन नीतीश कुमार को भाजपा के साथ जाना पड़ा था, लिहाजा राजनीतिक जानकारों के समक्ष बड़ा प्रश्न यह है कि- जेडीयू-भाजपा का तेल-पानी गठबंधन कब तक चलेगा?

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