इनदिनों. भाजपा-शिवसेना, इस वक्त केन्द्र और महाराष्ट्र, दोनों जगह साथ जरूर हैं, लेकिन आने वाले चुनावों में दोनों का साथ छूट जाएगा अगर भाजपा ने शिवसेना को उसका सियासी हक नहीं दिया? पीएम हमारा, सीएम आपका जैसे तरीके से ही भाजपा, शिवसेना को मना सकती है! केवल सीटों की गणित के आधार पर शिवसेना को कमजोर आंकने की गलती भाजपा करती है तो यह उसे बहुत भारी पड़ेगी क्योंकि अव्वल तो पिछले विधानसभा चुनाव में सीटें भले ही भाजपा को शिवसेना से लगभग दोगुनी मिली हों, लेकिन प्राप्त मत करीब डेढ़े ही थे.

यही नहीं, केन्द्र की पीएम मोदी सरकार के राम मंदिर निर्माण, धारा- 370 हटाने जैसे वादों के प्रति उदासीनता एवं एससी-एसटी एक्ट में संशोधन जैसे मुद्दों के कारण भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट आई है, जो एमपी, राजस्थान सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में साफ नजर आ जाएगा? पहले लोकसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा भाजपा को शिवसेना के साथ की ज्यादा जरूरत इसलिए है कि इस वक्त मोदी मैजिक खत्म हो चुका है और सभी राज्यों में भाजपा की सीटों में कमी आनी है, इसलिए अगर लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने भाजपा का साथ नहीं दिया तो शिवसेना का तो छोटा नुकसान होगा, परन्तु भाजपा को बड़ा घाटा होगा!

इतना ही नहीं, अगर शिवसेना महाराष्ट्र से बाहर भी लोकसभा चुनाव लड़ती है तो नुकसान भाजपा का ही होना है, क्योंकि दोनों के वोट बैंक का नेचर एक जैसा है और उत्तर भारत में भाजपा के दिखावटी हिन्दूत्व पर से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है? हालांकि, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा सरकारों की लगातार आलोचनाओं के बावजूद शिवसेना 2019 के चुनाव में हिन्दुत्व के मुद्दे पर भाजपा के साथ गठबंधन करेगी!

खबर है कि... उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि जिस किसी को भी सियासत की सामान्य समझ है वो जानते हैं कि भाजपा और शिवसेना चुनाव जीतने के लिए एक साथ लड़ेंगे? जबकि, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में देरी को लेकर पीएम मोदी को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है!

मराठवाडा क्षेत्र में शिवसेना के प्रखंड स्तरीय कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुये ठाकरे ने कहा कि वे 25 नवंबर 2018 को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे और मंदिर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल करेंगे? पीएम मोदी सरकार से उद्धव ठाकरे का कहना था कि... आप राम मंदिर निर्माण का भरोसा देकर सत्ता में आए? आपने हिन्दुत्व के मुद्दे पर लोगों को वोट देने को कहा, लेकिन क्या हुआ? आप मंदिर का निर्माण कब करने जा रहे हैं?

याद रहे, कुछ दिनों पहले ही शिवसेना ने राम मंदिर को लेकर अध्यादेश लाने की मांग की थी! शिवसेना, राम मंदिर, नोटबंदी, कालाधन, बेरोजगारी, पाकिस्तान से संबंध, कश्मीर धारा-370 जैसे मुद्दो पर लगातार पीएम मोदी सरकार पर निशाना साधती रही है और शिवसेना ने 2019 लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का एलान भी किया है, इसलिए यदि भाजपा, शिवसेना को मनाने में कामयाब नहीं रही तो भाजपा को देश और प्रदेश, दोनों जगहों पर खासा नुकसान उठाना होगा?

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