इनदिनों. जिस राम मंदिर की राजनीति ने भाजपा को शून्य से शिखर तक पहुंचाया, वही राम मंदिर राजनीति, पीएम मोदी सरकार के लिए बड़ी उलझन बन गई है!

यदि 2014 का चुनाव जीतने के तुरंत बाद पीएम मोदी सरकार इस विषयक कोई फैसला कर लेती तो राह आसान थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और ऐसे में विरोधी ही नहीं सहयोगी भी राम मंदिर को लेकर पीए मोदी सरकार की नियत पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं? 

इधर, शिवसेना की 52वीं दशहरा रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ंने कहा कि- भाजपा को यह घोषणा कर देनी चाहिए कि राम मंदिर बनाने का उनका वादा एक जुमला था!

इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि- भाजपा हमेशा कहती है कि वो मंदिर बनाएगी, लेकिन कब बनाएगी? इसकी तारीख नहीं बताती! चुनाव के वक्त ही भाजपा को राम मंदिर याद आता है? अब तक कई कारसेवक जान गंवा चुके हैं, उनके बलिदान का सम्मान कीजिए!

ठाकरे ने आगे कहा कि- मैंने फैसला किया है कि मैं 25 नवंबर 2018 को अयोध्या जाऊंगा. वहां भी ये सवाल मैं पीएम मोदी से पूछना चाहता हूं कि वो अयोध्या कब जाएंगे?

हालांकि, ठाकरे ने यह भी कहा कि- हम यह नहीं चाहते कि आप चुनाव हार जाएं और वहां हम सत्ता में आएं, लेकिन जनता की उम्मीदों पर पानी मत फेरिए. अगर ऐसा किया तो आप जल जाएंगे?

उन्होंने कहा- राम मंदिर आप बनाएंगे या हम, अब इस बात का फैसला हो जाने दीजिए? अगर आपने राम मंदिर का निर्माण शुरू नहीं किया तो हम करेंगे! हम हिंदुओं को साथ लेकर ये निर्माण करेंगे, हिंदू किसी की जागीर नहीं हैं?

उधर, भाजपा के कभी प्रमुख सहयोगी रहे हिंदू नेता प्रवीण तोगडिय़ा ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए एक कानून बनाए जाने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि- भाजपा सरकार के पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में ऐसा कानून क्यों नहीं लाया गया?

प्रवीण तोगडिय़ा का सीधा-सीधा आरोप है कि- अब यह मुद्दा इसलिए उठ रह है, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और केन्द्र की पीएम मोदी सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक है! 

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख तोगडिय़ा का प्रश्न है कि- पीएम मोदी सरकार के पास संसद में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद राम मंदिर कानून के लिए साढ़े चार सालों तक देरी क्यों हुई?

उनका कहना है कि- केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सभी मोर्चो पर विफल रहने और कई राज्यों और 2019 में लोकसभा चुनाव होने के मद्देनजर राम मंदिर का मुद्दा उठाया जा रहा है!

आगे उन्होंने कहा कि- केन्द्र और राज्यों में भाजपा सरकारें कथित विकास के लगभग सभी वादों पर लडख़ड़ा गई हंै. समाज के कई वर्ग उसकी अचानक लाई गई नीतियों के कारण खिन्न हैं और इसलिए भाजपा भगवान राम को अब याद कर रही हैं? 

लेकिन... राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब यदि भाजपा राम मंदिर पर कोई निर्णय कर भी लेती है तो उसे कुछ खास फायदा नहीं होना है, क्योंकि अब बहुत देर हो चुकी है, अलबत्ता राम मंदिर निर्माण पर फैसला नहीं करने पर भाजपा को भारी नुकसान जरूर होगा!

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