फ्रायड न्यूज. एमपी, राजस्थान सहित पांच राज्यों के प्रादेशिक चुनाव आ गए हैं, जाहिर है सर्वे तो होंगे ही, इसलिए एक के बाद एक सर्वे आ रहे हैं! यह बात अलग है कि अब सर्वे असली तस्वीर कम ही दिखा पाते हैं, मनोरंजन ज्यादा करते हैं? दरअसल, सर्वे भी एक तरह से अप्रत्यक्ष प्रचार का जरिया बनते जा रहे हैं जो सियासी माहौल को बदलने का प्रयास करते नजर आते हैं? हालांकि, कुछ समय से सर्वे का असर कम हुआ है और कई बार चुनावी नतीजे सर्वे से बहुत अलग नजर आए है, मतलब... आमजन इन सर्वे से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं, अलबत्ता कई विश्वसनीय सर्वे चुनावपूर्व मतदाताओं का रूझान बताने में जरूर सफल रहे हैं!

अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं है और इन प्रादेशिक चुनाव में भाजपा शासित तीन राज्यों- राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश पर सब की नजरें टिकी हुई हैं कि इन राज्यों में सत्ता किसके हाथ आाएगी? कुछ समय पहले आए सर्वे में भाजपा को तीनों राज्यों से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन इसके बाद के नतीजे भाजपा को थोड़ा काल्पनिक संतोष प्रदान करने वाले हैं! इसी क्रम में तीसरे सर्वे की माने तो राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने के आसार हैं तो एमपी और छत्तीसगढ़ में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना नहीं है? सर्वे में बताया तो यह जा रहा है कि... दोनों राज्यों में भाजपा ही सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती है, लेकिन तीसरा मोर्चा निर्णायक भूमिका में आ सकता है, मतलब... कर्नाटक नाटक की ओर बढ़ रहे हैं ये प्रादेशिक चुनाव!

सर्वे का सारांश यह है कि... मध्य प्रदेश में भाजपा को 109 से 113 सीटें और कांग्रेस को 107 से 111 सीटें मिल सकती हैं, छत्तीसगढ़ में भाजपा को 43 से 47 एवं कांग्रेस को 36 से 40 सीटें तो जेसीसी को 3 से 7 सीटें और अन्य को 1 से 3 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलता नजर आ रहा है, जहां भाजपा को 71 से 75 सीटें, कांग्रेस को 113 से 117 सीटें एवं अन्य को 10 से 14 सीटें मिलने के आसार हैं! वास्तव में किसे? कितनी? सीटें मिलेंगी यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन ये सर्वे इशारा कर रहे हैं कि इस बार के प्रादेशिक चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए आसान नहीं हैं, अर्थात... चुनावी प्रबंधन में पारंगत भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है कि वह सर्वे के संदेश को कैसे गलत साबित करती है? दिलचस्प बात यह है कि इसी साल कुछ महीनों पहले हुए सर्वे के नतीजे एकदम अलग थे? इसी वर्ष मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तब जो सर्वे आया, उस पर भरोसा करें तो एमपी में भाजपा 230 विधानसभा सीट में से 153 सीट जीत सकती है? सियासी जानकारों का कहना है कि इतना शानदार सर्वे तो शायद भाजपा भी नहीं कर पाती! हो सकता है कि...

कांग्रेस थोड़ी कमजोर रह जाए तो एमपी में चैथी बार भाजपा की सरकार बन जाए, लेकिन सर्वे के ऐसे नतीजे सियासी जानकारों की समझ से परे हैं, कारण? एमपी में इन चार वर्षों अब तक हुए उपचुनावों और विभिन्न छोटे-बड़े चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है, ऐसे में अचानक क्या हुआ कि कांग्रेस जनता की नजरों से इतनी उतर गई! सर्वे का कहना है कि कांग्रेस को इस बार महज 58 सीटे जीत सकती है? अलबत्ता... मायावती की बसपा 12 सीट पर तो निर्दलीय 14 सीट पर कब्जा जमा सकते हैं! बताया गया था कि... यह सर्वे 15 मार्च से 20 अप्रैल 2018 के बीच हुआ, जिसमें सभी 230 सीट पर 42550 मतदाताओं से राय ली गई थी?

एमपी कांग्रेस की कमान कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावी नेता कमलनाथ को दी गई है तो इन चार वर्षों में जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस लगातार सक्रिय रही है, उधर सत्ता विरोधी लहर भी जोर मार रही है, इसलिए कांग्रेस को कम आंकना संभव नहीं है? यकीनन... शिवराज सिंह चैहान ने एमपी में बेहतर काम करने की काफी कोशिशें की हैं लिहाजा वे प्रदेशवासियों की पहली पसंद जरूर हो सकते हैं, लेकिन... सबकुछ एक तरफा हो? यह थोड़ा अविश्वसनीय है! सियासी सारांश यही है कि ऐसे सर्वे में दम है, लेकिन... थोड़ा कम है! बहरहाल, जिन्हें ये सर्वे जीत दे रहा है, वे खुशियां मनाएं और जिन्हें हार दिखा रहा है, वे थोड़ा इंतजार करें, अभी और सर्वे आने वाले हैं, शायद उनमें उनकी किस्मत खुल जाए?

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