इनदिनों. मोदी मैजिक कमजोर होने के साथ ही भाजपा विरोधी महागठबंधन का अभियान भी कमजोर पड़ गया है, नतीजा? महागठबंधन का सियासी राग छोड़ कर कांग्रेस, बसपा आदि 2019 के लिए अपनी जमीन मजबूत करने में लग गए हैं! यही वजह है कि जहां कांग्रेस अपने नजरिए से आगे बढ़ रही है वहीं बसपा प्रमुख मायावती पीएम पद के मद्देनजर प्रादेशिक चुनावों में ही अपनी केन्द्रीय समीकरण सशक्त करने में लगी हैं? मतलब... अब लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की भूमिका कमजोर पड़ रही है और हर दल आम चुनाव में अधिक-से-अधिक सीटें जीतने की रणनीति में जुट गया है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि अगले आम चुनाव- 2019 में कोई एक दल स्पष्ट बहुमत हांसिल नहीं कर पाएगा और ऐसी हालत में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ जाएगी? अर्थात... कांग्रेस-भाजपा के अलावा जिस तीसरे दल के पास ज्यादा सीटें होंगी वह अपनी शर्तों पर केन्द्र में स्थापित हो सकेगा? कहने को तो ममता, मायावती के अलावा आधा दर्जन नेता बतौर पीएम उम्मीदवार चर्चा में हैं, लेकिन किसी विशेष परिस्थिति को छोड़कर केन्द्र सरकार में प्रभुत्व तो कांग्रेस या भाजपा का ही रहेगा, वजह? ममता बनर्जी के पास पश्चिम बंगाल के अलावा कोई और क्षेत्र नहीं है, अलबत्ता मायावती तकरीबन आधा दर्जन राज्यों में अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रही हैं! यह बात अलग है कि यूपी में सपा-बसपा गठबंधन में मायावती के हिस्से में अधिकतम आधी सीटें ही आएंगी और गठबंधन नहीं होता है तो सीटें जीत पाना मुश्किल हो जाएगा? जाहिर है, लोकसभा चुनाव में सीटों के मामले में कांग्रेस को मात देने के लिए मायावती को प्रादेशिक चुनावों में अधिकतम सीटों पर शक्ति प्रदर्शन करना होगा!

मायावती की राजनीति एकदम स्पष्ट है, बसपा समय आने पर किसी से भी तालमेल कर सकती है, इसलिए बसपा को प्रादेशिक चुनावों में क्षमता से अधिक सीटें देने के लिए कांग्रेस राजी नहीं है? यह बात मायावती ने छत्तीसगढ़ में अपनी चुनावी सभा के दौरान साफ कर दी! खबर है कि इस दौरान मायावती ने कांग्रेस पर बसपा को कमजोर करने का आरोप लगाया? मायावती ने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों में बसपा के बढ़ते जनाधार से कांग्रेस परेशान थी, कांग्रेस, बसपा को कमजोर करना चाहती थी और बहुत कम सीटें दे रही थी, जबकि हम सम्मानजनक सीट मांग रहे थे, इसी वजह से हमने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया! वैसे, मायावती के लिए एमपी, राजस्थान से ज्यादा छत्तीसगढ़ में बेहतर संभावनाएं हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस के बगैर बसपा कितनी कामयाबी हांसिल कर पाती है? इस दौरान मायावती के साथ जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रमुख अजीत जोगी भी मौजूद थे. यह पहला मौका था, जब मायावती ने छत्तीसगढ़ में किसी अन्य दल के साथ मंच साझा किया था? चुनाव गठबंधन समझौते के मुताबिक 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए बसपा 35 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि जेसीसीजे 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. अजित जोगी को गठबंधन में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को खासा प्रभावित करेगा! उल्लेखनीय है कि... छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं. 2013 में विधानसभा चुनाव भाजपा को 49, कांग्रेस को 39, बसपा को 1 और अन्य को एक सीट मिली थी. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने पिछले चुनाव में लगातार तीसरी बार कांग्रेस को मात देकर प्रादेशिक सत्ता हांसिल की थी. छत्तीसगढ़ में कुल 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं. सियासी सारांश यही है कि.... प्रादेशिक चुनावों के बहाने मायावती कई प्रदेशों में बसपा के विस्तार की संभावनाएं देख रहीं हैं! प्रादेशिक चुनाव के नतीजे बताएंगे कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन में किसका सिक्का चलेगा?

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