पलपल संवाददाता, जबलपुर. बड़ी कठिन है डगर पनघट की, ऐसी ही कुछ हालात इस समय भाजपा की हो रही है. कांग्रेस के बढ़ते जनाधार ने भाजपा नेताओं को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है, आलम यह है कि कुछ दावेदार तो कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे है जिन्होने दूसरे विधानसभा क्षेत्र से टिकट के लिए प्रयास शुरु कर दिए है, या ऐसा भी कहे कि सेंधमारी की जा रही है.

विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही भाजपा व कांग्रेस के नेताओं से लेकर दावेदारों ने अपने अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा दी है, जहां तहां दावेदारों से लेकर नेताओं ने अपने अपने समर्थकों के साथ बैठकें करते हुए रणनीति बनाना शुरु कर दिया है, जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों पर कमोवेश यही स्थिति है. इन सब के बीच यह चर्चा भी भाजपा में जोरों पर है कुछ दावेदार जहां से टिकट का दावा कर रहे थे, उन्होने जब क्षेत्र की जमीनी हकीकत को जाना तो हालात कुछ बेहतर नजर नहीं आए, जिसके चलते उन्होने दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में सेंध मारना शुरु कर दिया है, खासतौर पर वे नेता जो चुनाव तो कहीं और से लड़ते है, निवास कहीं और है, क्योंकि इस बार मतदाता भी काफी जागरुक है, वह भी पिछले पांच वर्षो में किए गए कार्यो का हिसाब मांगने के मूड में है, जो अभी से मुखर है ऐसे में भाजपा के कुछ नेताओं को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, इससे पहले हालात और बिगड़े उन्होने अभी से पैंतरा बदलते हुए सेंधमारी करना शुरु कर दिया है.

इस सेंधमारी को लेकर भाजपाई खेमें में भी विवाद होने के आसार है क्योंकि वे दावेदार तो एक ही क्षेत्र से टिकट मांग रहे है, उन्हे यह बात तो बिलकुल बर्दाश्त नहीं है तो दूसरे क्षेत्र का नेता उनके क्षेत्र में घुसे. कुछ ने तो यहां तक कहना शुरु कर दिया है ऐसा तो कांग्रेस में होता था, अब भाजपा में होने लगा है. सूत्रों की माने तो मध्य व केंट में रहने वाले नेताजी पश्चिम से दावेदारी कर रहे है, वहीं पहले मध्य में निवास करने वाले नेता जो वर्तमान में पश्चिम में निवासरत है, वे तय नहीं कर पा रहे थे कि कहां से दावेदारी करे, लेकिन चर्चा है कि उनकी नजर भी उत्तर मध्य विधानसभा सीट पर है.

वहीं पनागर के नेता भी उत्तर मध्य पर अपनी एक नजर दौड़ा रहे है. ऐसे ही कुछ हालात पूर्व के है यहां पर टिकट में बदलाव होने के आसार तो कम है लेकिन केंट विधानसभा क्षेत्र में निवासरत एक नेता की नजर पूर्व की ओर है, अंदरुनी रुप से वे अपना दावा पूर्व से पेश कर चुकी है. कुछ मिलाकर भाजपा नेताओं के बीच इस बार सेंधमारी की जा रही है, कौन इसमें सफल होता है कौन नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन ऐसे में पार्टी स्तर पर टिकट का वितरण आसान नहीं होगा. गौरतलब है कि सर्वे में भाजपा को अपनी स्थिति पहले से बहुत बेहतर नजर नहीं आ रही है, ऐसे में पार्टी के आला नेता भी टिकट वितरण काफी चिंतन-मनन के बाद ही करेगें चाहे समय क्यों न लग जाए.

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