खबरंदाजी. राफेल समझौते को लेकर राहुल गांधी और पीएम नरेन्द्र मोदी के बीच सियासी जंग जारी है? राहुल गांधी आरोप-पर-आरोप लगाते जा रहे हैं और पीएम मोदी चुप्पी साधे हैं! अलबत्ता, कई सरकारी-असरकारी नेता पीएम का बचाव कर रहे हैं?

इधर, खबर है कि... जहां राहुल, पीएम मोदी पर लगातार राजनीतिक हमला बोल रहे हैं और उनकी नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस के ही करीबी नेता शरद पवार ने पीएम मोदी की नीयत पर सवाल न उठाने की नसीहत दे डाली है! 

ऐसे शानदार मौके पर आभार तो बनता है, इसलिए लगे हाथ- शरद पवार का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल बाबा को शरद पवार की राह पर चलने की नसीहत दे दी?

अमित भाई, राहुल बाबा की तो मजबूरी है कि वे शरद पवार की तरह उल्टी दिशा में नहीं चल सकते हैं, लेकिन भाजपा के बिहारी बाबू श़त्रु भइय्या को ही राफेल की कथा समझा दीजिए, बड़े कंफ्यूज्ड हैं! बेहतर होगा, यदि थोड़ी जानकारी शिवसेना को भी देंगे?

जब से एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि- पीएम मोदी के इरादों पर शक नहीं किया जा सकता, उनकी पार्टी के कुछ नेता शरद पवार के इरादों पर ही शक करने लग गए हैं, यही नहीं कुछ पुराने साथी इस मुद्दे पर साथ तक छोड़ गए हैं?

यही नहीं, राफेल सौदे को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच अब भाजपा के भीतर से ही आवाज उठने लगी हैं? भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भी सरकार से इस मुद्दे पर जवाब की मांग कर डाली है. खबर है कि शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि- सरकार को राफेल के मामले में जवाब देना चाहिए? पटना साहिब से भाजपा सांसद सिन्हा ने कहा कि सच कहना कोई खिलाफत नहीं है और सिद्धांतों में बात करना कोई बगावत नहीं है. उसके बावजूद अगर सच कहना बगावत है तो मैं बागी हूं, क्योंकि मैं सच के आधार पर बात करता हूं! 

उनका कहना है कि- मुझे किसी व्यक्ति विशेष से कोई शिकायत नहीं है. मैं भारतीय जनता पार्टी का जरूर हूं, लेकिन इससे पहले मैं भारत की जनता का हूं. बिहार की जनता का हूं. बिहार की जनता के प्रति मेरी जिम्मेदारी है. उनके प्रति मेरी जवाबदेही है. उन्होंने कहा कि- आप सिर्फ इनका जवाब दें दे कि 126 विमानों की बात हुई थी, हमने 36 पर समझौता क्यों किया? किन शर्तों पर समझौता किया? दाम इतने क्यों बढ़ा दिए गए? एक झूठ या एक सच को छिपाने के लिए हम 10 झूठ बोले जा रहे हैं, दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए!

उन्होंने कहा कि- मेरी आदत है कि सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की, मेरी आदत है सच को सच कहने की, मेरी आदत है कि अगर कोई तारीफ करता है, भले ही वह विपक्षी पार्टी के हो या फिर तारीफ के लायक काम करें तो मैं उनकी तारीफ करता हूं? और वह शिकायत करें या गड़बड़ करें, या फिर अपने लोग ही गड़बड़ करें तो मैं जरूर सफेद को सफेद और काले को काला कहता हूं!

सिन्हा का कहना है कि- राफेल मुद्दे पर मैं यह नहीं कह रहा हूं कि कौन दोषी है? और कौन नहीं? वह तो जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन जो कुछ बातें सीधी-सीधी पूछी जा रही है, उनका राष्ट्रहित में और देशहित में जवाब दें! 

आप राहुल गांधी को जवाब नहीं देना चाहते हों, या विपक्ष पार्टियों को जवाब नहीं देना चाहते हैं तो नहीं दें, लेकिन पूरे देश में चिंता इस तरह फैली हुई है कि क्या वजह है कि राफेल डील 13 दिन पहले जो कंपनी बनाई गई उसके हवाले कर दी, वह भी एचएएल जैसी कंपनी को छोड़कर? क्या वजह है, सिर्फ आप यही बता दो? उनका कहना है कि- सरकार अगर खुद अपनी जांच के लिए खुद एजेंसी तय कर दे तो एक सवालिया निशान रह जाएगा? जनता इस पर भरोसा नहीं करेगी, मेरा मानना है कि जांच जेपीसी से होनी चाहिए! 

सिन्हा बोले कि- सच्चाई को सामने आना ही होगा, अभी देर कर रहे हैं, राफेल का सवाल लोगों को परेशान कर रहा है? उन्होंने कहा कि- राफेल कहीं बोफोर्स का ग्रेट ग्रैंड फादर न बन जाए! 

खबर यह भी है कि भाजपा की सहयोगी शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने राफेल सौदे को- बोफोर्स का बाप, करार दिया? और कहा कि- इस सौदे के खिलाफ बार-बार बोलने से देश की राजनीति में राहुल गांधी का महत्व बढ़ा है! 

शिवसेना के मुखपत्र सामना में राउत ने कहा कि जिन लोगों ने बोफोर्स सौदे में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के रिश्तेदार पर 65 करोड़ की घूस लेने का आरोप लगाया था वे अब सत्ता में हैं, आज उन पर राफेल विमान सौदे में 700 करोड़ रूपये की घूस लेने का आरोप है, राफेल बोफोर्स का बाप है?

सौदे पर फ्रांस्वा ओलांद के दावों को लेकर भाजपा की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने हैरानी व्यक्त की कि- पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति को कांग्रेस अध्यक्ष का समर्थक कहा जाएगा या एक राष्ट्र विरोधी करार दिया जाएगा? फ्रांसीसी मीडिया की एक रिपोर्ट में 21 सितंबर को ओलांद के हवाले से कहा गया था कि भारत सरकार ने राफेल के निर्माता दसॉल्ट एविएशन को 58, 000 करोड़ रूपये के इस सौदे में रिलायंस डिफेंस का ऑफसेट साझेदार बनाने का प्रस्ताव दिया था और फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था!

उन्होंने कहा कि- यही आरोप बोफोर्स सौदे (1980 के दशक के आखिरी वर्षों में) के दौरान कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए थे, क्या तब इससे पाकिस्तान की मदद नहीं हो रही थी? जो सत्ता में हैं वे बोफोर्स को एक घोटाला मानते हैं, लेकिन वे यह मानने को तैयार नहीं कि राफेल भी एक घोटाला है! 

उन्होंने कहा कि- देश में सिर्फ राहुल गांधी राफेल करार के खिलाफ बोल रहे है, जबकि शेष सभी राजनीतिक दल खामोश हैं? इसलिये राहुल अब देश की राजनीति में ज्यादा महत्व पा रहे हैं!

राफेल सौदे को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है, इस बीच एक छोटा-सा सवाल है कि- राफेल के भारतीय आधार के लिए पीएम मोदी सरकार ने कौन-कौन-सी? और कितनी भारतीय कंपनियों के सुझाव दिए थे?

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