इनदिनों. राफेल सौदे पर शरद पवार ने पीएम नरेन्द्र मोदी के समर्थन में बयान क्या दिया, शरद पवार खुद ही संदेह और सवालों के घेरे में आ गए, नतीजा? अब तक एनसीपी के एकाधिक बड़े नेता पार्टी छोेड़ चुके हैं, आगे और भी संकट गहराने की आशंका है! जहां एक ओर गैरभाजपाई एकता की बात है, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी और भाजपा के साथ संतुलन कायम करने की शरद पवार की दोहरी नीति ने खुद पवार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है? शरद पवार ने पीएम मोदी को तो चरित्र प्रमाण-पत्र दे दिया, लेकिन खुद शरद पवार का सियासी चरित्र संदेह के घेरे में आ गया! सवाल यह है कि शरद पवार अपने व्यक्तिगत भरोसे के आधार पर एक विवाद के मामले में किसी को सार्वजनिक प्रमाण-पत्र कैसे दे सकते हैं?

जबकि, वे वहां मौजूद ही नहीं थे? खबर है कि... इस मुद्दे पर एनसीपी की स्थापना के समय से शरद पवार के साथ रहे तारिक अनवर के त्यागपत्र के बाद महाराष्ट्र में पार्टी के नेता और राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष मुनाफ हकीम ने भी पार्टी के सभी पदों के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया! सियासी आशंका जताई जा रही है कि यह तो अभी शुरुआत है, आने वाले समय में शरद पवार के इस बयान से नाराज और एनसीपी में किनारे कर दिए गए कई नेता एनसीपी छोड़ सकते हैं? प्रेस रिपोटर््स की माने तो मुनाफ हकीम का कहना है कि महाराष्ट्र के कार्यकर्ता/पदाधिकारी उनके संपर्क में हैं, यही नहीं राफेल मामले को लेकर पार्टी प्रमुख की भूमिका से सख्त नाराज हैं?

उनके अनुसार... राफेल मामले में शरद पवार द्वारा पीएम मोदी का समर्थन करने से अब पार्टी का बचाव करना मुश्किल होगा! मुनाफ हकीम का तो यह भी कहना है कि यह पहला मौका नहीं है, जब भाजपा को शरद पवार का साथ मिला हो? इससे पहले भी महाराष्ट्र में भाजपा को बहुमत नहीं मिलने के बावजूद, पार्टी को भरोसे में लिए बगैर और भाजपा की ओर से समर्थन मांगे बिना ही, शरद पवार ने भाजपा की फडणवीस सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी, इसके अलावा गुजरात में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अलग चुनाव लड़ा, नतीजा? एनसीपी की छवि भाजपा के एजेंट की बनी, जिससे पार्टी के बहुत से कार्यकर्ता दुखी हो गए हैं!

उधर, शरद पवार की ऐसी दोहरी राजनीति के चलते कांग्रेस को भी अब उन्हें साथ लेने में खतरा है? हो सकता है वे आम चुनाव के नतीजों के बाद सियासी दिशा बदल लें! जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे में हुए कथित घोटाले के खिलाफ देशभर में जनमत जुटाने में लगे हैं, वहीं शरद पवार का ऐसा बयान गैरभाजपाई मोर्चे के लिए बड़ा सवाल है? बहरहाल, जिस तरह से केन्द्र सरकार राफेल मामले में सवालों के सीधे जवाब देने के बजाय शरद पवार जैसे नेताओं के बयानों की आड़ ले रही है, उससे इस सौदे को लेकर रहस्य और गहराता जा रहा है!

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