गुरुवार, 13 सितंबर 2018

गणेश चतुर्थी

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:24:29

मास भाद्रपद

तिथि चतुर्थी - 14:53:18 तक

नक्षत्र स्वाति - 24:53:42 तक

करण विष्टि - 14:53:18 तक, बव - 26:33:11 तक

पक्ष शुक्ल

योग एन्द्र - 24:35:28 तक

सूर्योदय 06:04:47

सूर्यास्त 18:29:16

चन्द्र राशि तुला

चन्द्रोदय 09:31:59

चन्द्रास्त 21:11:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

गणेश चतुर्थी 

* भगवान श्रीगणेश के प्रकटोत्सव को गणेश चतुर्थी कहते है. इस तरह यह श्रीगणेश जन्म दिन है. भारत में भगवान श्रीगणेश को बुद्धि, समृद्धि और सुवृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है. धर्मग्रंथों के अनुसार- भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था. श्रीगणेशोत्सव- गणेश चतुर्थी से शुरू होनेवाला उत्सव जो दस दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन सम्पन्न होता है. यह दिन श्रीगणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है. श्रीगणेशोत्सव के दौरान श्रीगणेश भक्त यथाशक्ति पूजा-आराधना और भजन-कीर्तन करते हैं और अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु बड़े ही धूम-धाम के साथ जुलूस निकालते हुए भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का पवित्र जलाशय में विसर्जन करते हैं.

* श्रीगणेश पूजा विधि-विधान से करें कि परंपरागत तरीके से, बस! पवित्र मन से पूजा करें...सारे सपने साकार होंगे! जैसे एक माता अपने बालक को सजाती-संवारती-भोजन करवाती है ठीक उसी तरह श्रीगणेश को सजाएं, संवारें और लडुअन का भोग लगाकर पूजा-आरती करें...श्रीगणेश का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा!  

* श्रीगणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र-दर्शन नहीं करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन चन्द्र दर्शन से मिथ्या-दोष, मिथ्या-कलंक लगता है. धर्मग्रथोंं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक नामक बहुमूल्य मणिचोरी का झूठा आरोप लगा था. झूठे आरोप से प्रभावित भगवान श्रीकृष्ण को नारद मुनि ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्र दर्शन से श्रीकृष्ण पर मिथ्या दोष लगा. नारद मुनि ने श्रीकृष्ण को बताया कि भगवान श्रीगणेश ने चन्द्रदेव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दौरान चन्द्र दर्शन करेगा उस पर मिथ्या-दोष लगेगा, चोरी का झूठा आरोप लगेगा. नारद मुनि की सलाह पर भगवान श्रीकृष्ण ने मिथ्या दोष-मुक्ति के लिये श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत को किया और दोष-मुक्त हुए. जो व्यक्ति जीवन में झूठे आरोपों का सामना कर रहे हों उन्हें श्रद्धा के साथ श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत का व्रत करना चाहिए और 

मिथ्या दोष निवारण हेतु श्रीमद् भागवत्, के 10वें स्कन्ध के 56-57वें अध्याय में दी गयी- स्यमंतक मणि की चोरी, की कथा सम्मानपूर्वक सुननी/पढऩी चाहिए. संभव हो तो इस मंत्र से पवित्र किया हुआ जल पीना चाहिए- 

सिंह: प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हत:. 

सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक:॥

भावार्थ...सुन्दर, सलोने कुमार! इस मणि के लिए सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है, अत: तुम रोओ मत, अब इस स्यमंतक मणि पर तुम्हारा अधिकार है...

* इनसे मिथ्या दोषमुक्ति मिलती है. 

संपूर्ण श्रीगणेश चतुर्थी तिथि के प्रारम्भ से लेकर अन्त समय तक, चाहे दिन हो या रात, चन्द्र दर्शन से बचना चाहिए!

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 

तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ             पहला- अमृत

दूसरा- रोग              दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग          तीसरा- रोग

चौथा- चर              चौथा- काल

पांचवां- लाभ           पांचवां- लाभ

छठा- अमृत            छठा- उद्वेग

सातवां- काल           सातवां- शुभ

आठवां- शुभ           आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

* प्रदीप श्रीदवे (9772354346) कमलाश्री आश्रम, वागड़

panditshreepradeep'gmail.com

* गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं...

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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