वराह अवतार श्री हरि का यानी विष्णु का तीसरा अवतार है और इनकी जयंती  12 सितंबर यानी बुधवार को  है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु का जन्म वराह के रूप में हुआ था.

यह पर्व दक्षिण भारत में धूम धाम से मनाया जाता है. मथुरा में भी भगवान वराह के जन्मदिन पर भव्य आयोजन होता है. इस दिन भक्त भगवान वराह की पूजा अर्चना करते हैं और धरती पर सुख शांति की कामना करते हैं.

भगवान वराह का व्रत कैसे करें और वराह व्रत की पूजा विधि क्या है

सर्वप्रथम स्नान करने के बाद भगवान वराह की प्रतिमा के आगे कलश रखिए. 

कलश में पानी भर लीजिए और उसमें आम के पत्ते और नारियल उसके उपर रख दीजिए. 

भगवान वराह को फूल अर्पित कीजिए और जल चढ़ाईए. 

पूजा करने के बाद श्रीमदभागवद् गीता का पाठ कीजिए.

हाथ में जल लेकर भगवान वराह की उपासना का संकल्प लें.

तत्पश्चात ॐ वराय नमः मंत्र का उच्चारण कीजिए और प्रभु से अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना कीजिए. वराह मंत्र की मूंगे की माला या चंदन की माला से जप करें.

व्रत रखते समय किसी भी अनाज का ग्रहण न करें. अगले दिन व्रत तोड़ने के बाद आप कलश को ब्राह्मण को दान कर दीजिए. इस पावन दिन पर आप गरीबों को वस्त्र, कुछ आवश्यक सामग्री दान भी कर सकते हैं.

कथा

एक बार हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा को कठिन तप करने के बाद प्रसन्न कर लिया. उसके कठिन तप से ब्रह्मा जी बहुत खुश हुए और प्रकट हुए. हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उसे न ही कोई आदमी, न ही कोई भगवान और न ही कोई जानवर मार सके अर्थात वह अमर हो जाए. ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दे दिया. वरदान मिलते ही हिरण्याक्ष बहुत घमंडी हो गया और धरती पर आतंक का पर्याय बन गया. सभी उसके प्रकोप से डरने लगे. 

धरती पर उपस्थित मानव जाति इतनी परेशान हो गई कि वह भगवान से प्रार्थना करने लगी उन्हें कैसे भी हिरण्याक्ष से बचाएं. एक बार उसने धरती को समुद्र के नीचे पाताल लोक में छिपा दिया. इससे देवता भी परेशान हो गए. जब ब्रह्मा जी सो रहे थे तो उनके पास से वेंदों को भी चुरा कर अपने पास रख लिया था. अत्यंत बलवानशाली और अपने घमंड से प्रेरित हरिण्याक्ष का अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ती गई.

भगवान भी चिंतित होने लगे. तब देवताओं ने कहा कि हरिण्याक्ष ने जो ब्रह्मा जी वरदान मांगा है उसमें सभी जानवरों का नाम लिया है लेकिन उसने सूअर का नाम नहीं लिया है. विष्णु जी समझ गए कि इस पापी का अंत आ गया है और उन्होंने वराह का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का संहार किया. वराह एक मानवरूपी अवतार था जिसमें सर तो सूअर का था लेकिन बाकी शरीर मनुष्य का.

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