नई दिल्ली. आने वाले चार-पांच सालों में भारतीय सेना का आकार छोटा होगा. मसलन बड़ी संख्या में भारतीय सेना में छंटनी की जा सकती है. थल सेना में बड़े स्तर पर की गई एक समीक्षा के बाद इस निष्कर्ष निकाला गया है कि सेना को अपना प्रभाव बढ़ाने और भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार करना चाहिए. ऐसे में यह भारी-भरकम स्वरूप सेना को कमजोर करता है. एक अंग्रेजी अखबर में छपी खबर के अनुसार भारतीय सेना अगले चार से पांच सालों में 1,50,000 नौकरियों में कटौती कर सकती है. सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने एक विशेष बातचीत में यह बातें बताई हैं. 

पिछले एक साल से सेना में उनके खान-पान से लेकर रहन-सहन को लेकर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. सेना में छंटनी को लेकर समीक्षा किए जाने का आदेश 21 जून को दिया गया था.  जिसके बाद यह फैसला लिया गया है कि 12 लाख कि इस मजबूत सेना की विभिन्न इकाइयों में छंटनी की जाएगी. क्योंकि सेना के कई विभाग ऐसे हैं जहां एक ही पद पर कई-कई लोग तैनात हैं. सेना में हो रही बड़ी संख्या में छंटनी की समीक्षा सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल जेएस संधु की अध्यक्षता में 11 सदस्यों के पैनल ने की है. सेना की विभिन्न इकाइयों में काम कर रहे लोगों की यह समीक्षा इस महीने के अंत तक सेना प्रमुख बिपिन रावत के सामने पेश की जाएगी.

सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ ईकाइयों को एक साथ कर दिया जाएगा जिससे कि आने वाले दो वर्षों में 50,000 लोगों की भूमिका सेना से खत्म हो जाएगी.  वहीं एक लाख लोगों की छंटनी 2022-23 में की जा सकती है लेकिन यह सारी बातें अभी प्राथमिक अवस्था में हैं. सेना के वरिष्ट सूत्रों का कहना है कि ऐसा तभी संभव हो पाएगा जब समीक्षा की रिपोर्ट को तसल्ली से अध्ययन किया जाएगा. अभी फिलहाल इस विषय में केवल विचार आया है. 

अधिकारी ने बताया कि यह पूरी छंटनी सिर्फ  सेना में कनिष्ठ स्तर पर नहीं बल्कि सेना मुख्यालय में बैठे निदेशक स्तर से की जाएगी. जिसमें लॉजिस्टिक यूनिट, कम्यूनिकेशन, मरम्मत और दूसरे प्रशासन और सपोर्ट के क्षेत्रों से लोगों को हटाया जाएगा. वहीं सेना में हो रहे बड़े बदलावों को देखते हुए दूसरे अधिकारी ने कहा कि विभिन्न इकाइयों में सबकुछ बहुत धुंधला हो चुका है जिसकी वजह से एक ही स्तर पर या काम के लिए कई-कई लोग मौजूद हैं, यही नहीं अधिकारी ने यह भी बताया कि समय आ गया है कि इकाइयों में जांच की जाए और अगर जरूरत हुई तो इन्हें जोड़ा भी जाएगा जिससे सेना के खर्चों में बड़े स्तर पर कटौती भी संभव है.

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