पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेलकर्मियों की लगातार बढ़ती समस्याओं, जिससे उत्पन्न होते तनाव ने रेलवे बोर्ड की चिंताएं बढ़ा दी है. कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित व समय पर निदान हो, इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे जोनल स्तर पर फास्ट ट्रेक कमेटी बनाएं और समय सीमा में उनकी समस्याओं का निदान करें. इस आदेश के बाद अब कर्मचारियों को अफसरों के पास नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि अफसरों को कर्मचारियों के बीच में पहुंचेेंगे और उनकी समस्याओं को हल करेंगे.

अभी तक अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए देशभर के 13 लाख रेल कर्मचारियों को परेशान होना पड़़ता था. श्रमिक संगठनों के माध्यम से वे अपनी समस्याओं के हल के लिए प्रयासरत रहते थे, लेकिन कई बार मंडल व जोनल स्तर के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र की बात नहीं कहते हुए मामले की टालामटोली करते रहे, लेकिन अब वे ऐसा नहीं कर सकेंगे. अब अधिकारी कर्मचारियों के पास पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे. रेलवे बोर्ड ने प्रत्येक जोनल मुख्यालय पर अपर महाप्रबंधक (एजीएम) की अध्यक्षता में फास्ट ट्रैक समिति बनाने का आदेश जारी किया है. समिति को कई अधिकार भी दिए गए हैं. 

एजीएम की अध्यक्षता में जोनल स्तर पर बनेगी समिति 

सुरक्षित ट्रेन संचालन करने वाले कर्मियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों के आफिस के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन समाधान न होने से कर्मचारी तनावग्रस्त हो रहे हैं. रेलवे बोर्ड ने रेल कर्मियों को तनाव मुक्त रखने के लिए जोनल स्तर पर फास्ट ट्रैक समिति बनाने का विशेष आदेश दिया है. रेलवे बोर्ड के अधिशासी निदेशक राजेश गुप्ता ने सभी महाप्रबंधकों को इस बारे में पत्र जारी किया है. 

 पमरे के 65 हजार कर्मियों को मिलेगा लाभ

समिति में वित्तीय विभाग के विभागाध्यक्ष के अलावा जिस विभाग की समस्या होगी, उस विभाग के विभागाध्यक्ष सदस्य होंगे. फास्ट ट्रैक की बैठक जोनल मुख्यालय की बजाय जिस मंडल की समस्याएं अधिक होंगी, उस मंडल में आयोजित करना अनिवार्य होगा. बैठक में जितनी भी समस्याएं होंगी, उनका समाधान किया जाएगा. समिति नियम के विरुद्ध व संरक्षा के मामले को छोड़कर रेल कर्मियों को राहत देने का काम करेगी. रेल कर्मचारी डाक, मेल, शिकायत कक्ष के माध्यम से फास्ट ट्रैक समिति तक समस्या भेज सकते हैं. इस व्यवस्था के बाद देश भर के 13 लाख और पश्चिम मध्य रेलवे के तीनों रेल मंडलों जबलपुर, भोपाल व कोटा के लगभग 65 हजारकर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी.

इनका कहना....

- पश्चिम मध्य रेलवे एम्पलाइज यूनियन, लगातार एआईआरएफ के माध्यम से रेलवे बोर्ड पर यह दबाव बनाती रही है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समयबद्ध निदान के लिए एक सिस्टम बना जाए, इसके लिए अधिकारियों को शक्तियां भी प्रदान की जाये. जिसके चलते रेलवे बोर्ड ने निर्णय ले लिया है कि रेलकर्मचारियों की समस्याओं का एक निश्चित समय अवधि में निदान के लिए फास्टट्रेक कमेटी का गठन किया जाएगा और यह कमेटी समय-समय पर समस्याओं का निदान करेगी.

मुकेश गालव, महामंत्री, पमरे एम्पलाइज यूनियन, जबलपुर.

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