अभिमनोज: एससी/एसटी एक्ट संशोधन पर सामान्य वर्ग की प्रतिक्रिया को भाजपा ने भ्रम का परिणाम करार दिया?

इन दिनों पूरे देश में एससी/एसटी एक्ट संशोधन पर भले ही पर सामान्य वर्ग की कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हों, मगर केन्द्रीय भाजपा ने इसे भ्रम का परिणाम करार दिया है?

खबर है कि... भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अमित शाह का कहना था कि एससी/एसटी कानून पर भ्रम फैलाया जा रहा है? और भाजपा इसका डटकर मुकाबला करेगी! 

यही नहीं, एसएसी-एसटी एक्ट को लेकर हो रही सियासत पर भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना था कि इस मुद्दे का 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई असर नहीं पड़ेगा? 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के पदाधिकारियों की बैठक में कहा कि... एससी/एसटी के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन इससे 201 9 के चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, उन्होंने कहा कि जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, इसका डटकर मुकाबला किया जाएगा, सरकार भाजपा की ही बनेगी! 

अमित शाह ने इस मौके पर अजेय भाजपा का आह्वान किया और दावा किया कि हम पूर्ण बहुमत के साथ आएंगे, संकल्प की शक्ति को कोई नहीं हरा सकता?

जाहिर है, जो लोग यह धारणा बना रहे थे कि भाजपा ने एससी/एसटी एक्ट संशोधन करने की गलती कर दी, उन्हें साफ हो जाना चाहिए कि केन्द्र की पीएम मोदी सरकार ने यह निर्णय अनजाने में नहीं, बल्कि सोच-समझ कर लिया है!

सवाल यह है कि इसके पीछे केन्द्रीय भाजपा की सोच क्या है? 

दरअसल गैस, पेट्रोल, रोजगार, नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दों पर केन्द्र की पीएम मोदी सरकार नाकामयाब रही है और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला सामान्य वर्ग भाजपा से दूर होता जा रहा है, ऐसी स्थिति में इतने कम समय में सामान्य वर्ग का 2014 जैसा समर्थन फिर से हांसिल करना संभव नहीं है, लिहाजा पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिश भाजपा को ज्यादा असरदायक नजर आ रही है!

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केन्द्रीय भाजपा यह मान कर चल रही है कि जितना सामान्य वर्ग का मतदाता दूर होगा उससे कईं ज्यादा पिछड़े वर्ग का मतदाता भाजपा का साथ देगा, इसलिए 2019 के लिए भाजपा पिछड़ा वर्ग पर फोकस कर रही है?

प्रमुख मुद्दा यह भी है कि केन्द्रीय सत्ता का महत्वपूर्ण केन्द्र यूपी है जहां भाजपा को सपा-बसपा से संयुक्त चुनौती मिल रही है, यदि सपा-बसपा का वोट बैंक- पिछड़ा वर्ग, मजबूती के साथ सपा-बसपा के साथ खड़ा रहा तो केन्द्र की सत्ता भाजपा के हाथ से निकल जाएगी? उधर, 2014 से भाजपा के साथ जुड़े पिछड़े वर्ग के नेता भी भाजपा से नाराज चल रहे थे, लिहाजा भाजपा को पिछड़ा वर्ग को साथ रखना बेहद जरूरी है? और इसीलिए, भाजपा ने सामान्य वर्ग के बजाए पिछड़ा वर्ग को फोकस किया है!

इनके अलावा, इन चार वर्षों में भाजपा ने अपनी योजनाओं में सबसे ज्यादा ध्यान पिछड़ा वर्ग का रखा और इसीलिए केन्द्रीय भाजपा का मानना है कि इन योजना के लाभार्थी भाजपा का साथ देंगे! हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कितना मिला यह चुनाव के बाद ही साफ हो पाएगा?

बहरहाल, भाजपा ने अपने परंपरागत वोट बैंक- सामान्य वर्ग से हट कर अपना फोकस पिछड़ा वर्ग पर किया है, लेकिन मायावती से इस वर्ग को दूर करना आसान नहीं है? अलबत्ता, इससे पीएम मोदी को तत्काल कोई नुकसान नहीं होगा! क्योंकि, इस नई रणनीति की प्रयोगशाला बनेंगे- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़, प्रादेशिक विधानसभा चुनाव में स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा सही दिशा में आगे बढ़ रही है या नहीं? प्रादेशिक चुनाव जीते तो ठीक, नहीं तो लोकसभा चुनाव के लिए नई रणनीति पर विचार होगा!

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