रविवार, 9 सितंबर 2018 

भाद्रपद अमावस्या

पोला

वृषभोत्सव

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:31:11

मास भाद्रपद

तिथि अमावस्या - 23:32:57 तक

नक्षत्र मघा - 08:01:27 तक, पूर्वा फाल्गुनी - 29:41:23 तक

करण चतुष्पाद - 13:07:07 तक, नाग - 23:32:57 तक

पक्ष कृष्ण

योग सिद्ध - 14:42:05 तक

सूर्योदय 06:02:50

सूर्यास्त 18:34:01

चन्द्र राशि सिंह

चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं

चन्द्रास्त 18:32:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 29:41+ से

चन्द्र वास: पूर्व में

* धर्मग्रथों में पूर्णिमा, अमावस्या, ग्रहण आदि का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि इस दौरान मन सापेक्षरूप से धनात्मक/ऋणात्मक प्रभाव में रहता है.

* सामान्य अवस्था से हटकर किसी भी अन्य अवस्था में सुरक्षा के लिए धर्मकर्म पर जोर दिया जाता है और इसी दृष्टि से अमावस्या का विशेष महत्व है.

* एक वर्ष में बारह पूर्णिमा और बारह अमावस्या होती हैं. 

* एक माह में दो पक्ष... शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष होते हैं. 

* कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या (अमावस) कहते हैं और शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा (पूरनमासी), शेष तिथियां इनके बीच होती हैं.

* हर महीने की पूर्णिमा/अमावस्या पर कोई धर्मपर्व रहता ही है ताकि व्यक्ति का मन विचलित नहीं हो और ध्यान धर्मकर्म में लगा रहे.

* सालभर की प्रमुख अमावस्याएं इस प्रकार हैं... सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दीपावली कार्तिक अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या आदि. 

* इन अमावस्याओं का अलग-अलग विशेष महत्व है.

* अमावस्या विशेषतौर पर पितृदेव को समर्पित है इसलिए इस अवसर पर पितृदेव से संबंधित दान-धर्म-कर्म आदि करें और यदि पितृदोष है तो पितरों से दोषमुक्ति की प्रार्थना करें.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा          रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग               पहला- शुभ

दूसरा- चर                  दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ                तीसरा- चर

चौथा- अमृत                चौथा- रोग

पांचवां- काल                पांचवां- काल

छठा- शुभ                  छठा- लाभ

सातवां- रोग                सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग              आठवां- शुभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

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