इनदिनों. एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के साथ ही पलपल इंडिया ने आनेवाले तूफान के संकेत सबसे पहले दिए थे... 12 अगस्त 2018 की रिपोर्ट- क्या सामान्य वर्ग के लिए पीएम मोदी, वीपी सिंह साबित हो रहे हैं? 

रिपोर्ट के अनुसार सामान्य वर्ग शुरू से ही न केवल भाजपा का प्रमुख मतदाता रहा है, बल्कि वर्ष 2014 में सियासी तस्वीर बदलने का सबसे बड़ा प्रेरक वर्ग भी रहा है, लेकिन... इन चार साल के कड़वे अनुभवों के बाद सामान्य वर्ग का धैर्य जवाब देने लगा है, और इसीलिए बड़ा प्रश्र है कि- क्या सामान्य वर्ग के लिए पीएम मोदी, वीपी सिंह साबित होने जा रहे हैं?

नोटबंदी, जीएसटी, बैंकों के नए-नए कानून-कायदे आदि से सबसे ज्यादा प्रभावित और परेशान यह सामान्य वर्ग ही रहा है, लेकिन... सामान्य वर्ग को राहत तो दूर, आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी केन्द्र सरकार न्यायोचित निर्णय नहीं ले पाई? अब आम चुनाव- 2019 के मद्देनजर हो सकता है कि इस संबंध में कोई आश्वासन पकड़ा दिया जाए!

इसी मुद्दे पर आज तक में विवेक पाठक की 7 सितंबर 2018 की रिपोर्ट है- आंदोलनरत सवर्ण: वीपी सिंह और नरेंद्र मोदी, दो 'फकीरोंÓ की कहानी, जिसके प्रमुख अंश हैं...

* एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ 6 सितंबर को देशभर में सवर्णों ने केंद्र सरकार के खिलाफ  नाराजगी जाहिर करते हुए भारत बंद किया. देश के सवर्णों का जातिगत मामले में मंडल आंदोलन के बाद यह इस तरह का दूसरा सबसे बड़ा प्रदर्शन था, जिसमें वे सरकार के खिलाफ  सड़क पर उतरे.

* एक समय वो था जब पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह द्वारा मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के विरोध में सवर्ण उग्र हुए थे. आज उसकी पुनरावृत्ति होती दिख रही है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट में संशोधन कर इसे मूल स्वरूप में बहाल कर दिया. मोदी सरकार के इस फैसले से बीजेपी का मूल वोट बैंक (सवर्ण) आक्रोशित होकर सड़कों पर आ गया.

* सामाजिक न्याय के लिए इतना प्रतिबद्ध होने के बावजूद उन्हें एक खलनायक की तरह याद करने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है. उनका विरोध करने वाले मानते हैं कि उन्होंने अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए मंडल कमिशन की सिफारिशों को लागू किया था.

* देश और प्रदेश के हालात पर चर्चा के बाद सवर्णों के आंदोलन ने मोदी सरकार और बीजेपी को धर्मसंकट में डाल दिया है. धर्म के नाम पर जातियों में बंटे हिंदू समाज को इक_ा करने की रणनीति एक बार फिर जाति के नाम पर टूटती दिख रही है.

* इतिहास देखें तो आने वाले समय में मोदी सरकार को अपने इस फैसले का खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है. क्योंकि सामाजिक न्याय को लेकर इतना बड़ा फैसला लेने के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह सार्वजनिक जीवन में हाशिए पर चले गए थे.  

* दरअसल इस देश की राजनीति का एक कटु सत्य है कि जो भी अपने जाति समूह के हितों से ऊपर उठकर काम करेगा वो सार्वजनिक जीवन में हाशिए पर चला जाएगा. क्योंकि हमारे देश का लोकतंत्र एक ऐसे चुनावी तंत्र में तब्दील हो गया है, जिसका ख्याल सभी राजनीतिक दल रखते हैं या रखने को मजबूर हैं. 

* आज तक की रिपोर्ट... https://aajtak.intoday.in/story/sc-st-act-bharat-bandh-swarn-protest-government-narendra-modi-vp-singh-1-1026986.html

* पलपल इंडिया की रिपोर्ट... http://www.palpalindia.com/2018/08/12/delhi-PM-Modi-VP-Singh-proven-general-class-BJP-main-voter-note-taking-GST-banks-new-laws-news-in-hindi-249786.html

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