खबरंदाजी. भारतीय राजनेताओं को ठीक-से समझ में आ गया है कि जननीति से तो पांच साल सरकार चलाना भी मुश्किल काम है, इसलिए वर्षों तक राज करने के लिए अंग्रेजो की- फूट डालो और राज करो की नीति ही कामयाब है?

केन्द्र की पीएम मोदी सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके और पक्ष-विपक्ष के राजनेताओं ने प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष इसका समर्थन करके यह साबित किया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में इन राजनेताओं का कोई भरोसा नहीं है? यही नहीं, आजादी के बाद सामान्य वर्ग के उन महान नेताओं की त्याग-तपस्या पर भी पानी फेर दिया है जिन्होंने पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए, समाज सुधार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था!

गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के संयुक्त पिछड़े क्षेत्र में मामा बालेश्वर दयाल ने अपना पूरा जीवन पिछड़ों की सेवा में गुजार दिया तो बांसवाड़ा के चिमनलाल मालोत इसी जन्म में पिछड़ा वर्ग में शामिल हो गए थे? छुआछूत मिटाने जैसे समाज सुधार के लिए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को आजादी के आंदोलन के दौरान बांसवाड़ा राज्य छोडऩा पड़ा तो वागड़ में जनसंघ का दीपक प्रज्ज्वलित करने वाले श्रीपतिराय दवे ने पिछड़ों के अधिकारों के लिए हर संभव संघर्ष किया? 

लेकिन, आज केन्द्र सरकार के निर्णय और पिछड़े वर्ग के नेता, अपनी कुर्सी बचाने के लिए वोटों की राजनीति के चलते सामान्य वर्ग और पिछड़ा वर्ग के आपसी सद्भाव को नष्ट कर रहे हैं... एक-दूसरे के लिए जहरीला वातावरण तैयार कर रहे हैं?

सोचने वाली बात यह है कि यदि सत्तर वर्षों तक सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए सक्रिय नहीं रहता तो क्या आरक्षण जारी रहना संभव था? लेकिन, केन्द्र सरकार ने तो दोनों वर्गों को ही आमने-सामने खड़ा कर दिया?

इस मुद्दे पर अब जबकि भारत बंद सफल हो गया तो हर मुद्दे पर हर रोज टीवी पर दहाडऩे वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता-प्रवक्ता अचानक गायब हो गए हैं? क्योंकि... सवाल न्याय का नहीं है? वे जानते हैं कि इस बंद के समर्थन में बोले तो पिछड़ा वोट बैंक हाथ से निकल जाएगा और विरोध में बोले तो सामान्य वर्ग माफ नहीं करेगा!

बहरहाल, इस भारत बंद ने राजनेताओं की नींद उड़ा दी है? सफल भारत बंद के दौरान सामान्य वर्ग ने पहली बार अपना नजरिया साफ कर दिया है कि वह पिछड़ा वर्ग के खिलाफ नहीं है, लेकिन वोटों की राजनीति के चलते राजनेताओं के सामान्य वर्ग के खिलाफ लिए गए गैरकानूनी फैसलों को भी स्वीकार नहीं कर सकता है! जाहिर है, तीन प्रमुख प्रदेशों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में ही नहीं, आम चुनाव- 2019 में भी राजनेताओं को सामान्य वर्ग की नाराजगी की कीमत चुकानी पड़ेगी?

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. माना की पीएम मोदी बहादुर हैं, पर प्रेस से क्यों दूर हैं?

2. कैशलेस पर भरोसा नहीं? लोगों के हाथ में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कैश

3. अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने मांगे 22 हजार अतिरिक्त जवान

4. कीनिया को रौंदकर भारत ने हीरो इंटर कांटिनेंटल फुटबॉल कप जीता

5. SCO समिट- भारत समेत कई देशों के बीच महत्वपूर्ण एग्रीमेंट, PM मोदी ने दिया सुरक्षा मंत्र

6. ट्रंप से मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया से चाइना होते हुए सिंगापुर पहुंचे किम जोंग

7. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने यूजीसी बड़े बदलाव की तैयारी में

8. सुपर 30 का दबदबा कायम आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 26 छात्र सफल

9. रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी, भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.?

10. क्या आप भी पूजा-पाठ करने के लिए स्टील के लोटे का करते हैं इस्तेमाल?पहले जान लें ये बात

11. काम में मन नहीं लगता तो यह करें उपाय

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।