गुरुवार, 6 सितंबर 2018

अजा एकादशी

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:36:11

मास भाद्रपद

तिथि एकादशी - 12:17:08 तक

नक्षत्र पुनर्वसु - 15:14:01 तक

करण बालव - 12:17:08 तक, कौलव - 22:47:27 तक

पक्ष कृष्ण

योग वरियान - 25:58:25 तक

सूर्योदय 06:01:20

सूर्यास्त 18:37:32

चन्द्र राशि मिथुन - 09:46:00 तक

चन्द्रोदय 27:02:00

चन्द्रास्त 16:03:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में 09:46 तक, उत्तर में 09:46 से

भगवान श्रीविष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं और इनकी पूजा-आराधना  करने से जीवन सरल और सफल हो जाता है. श्रीविष्णु का नाम मात्र लेने से ये भक्तों का बेड़ा पार लगाते हैं. भगवान श्रीविष्णु की प्रसन्नता और आशीर्वाद के लिए एकादशी व्रत-पूजा सर्वोत्तम है. वैसे तो हर एकादशी का अलग-अलग महत्व है लेकिन जो भक्त पवित्र मन, वचन और कर्म से संपूर्ण वर्ष की एकादशियों की व्रत-पूजा करते हैं, उनके समस्त सपने साकार हो जाते हैं. अजा एकादशी ने तो सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र का खोया हुआ राजपाट लौटाया था...

सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र का नाम धर्मग्रंथों में बड़े आदर के साथ लिया जाता है जिन्होंने सत्यनिष्ठा के कारण सबकुछ खो दिया लेकिन अपने सत्यपथ से हटे नहीं. एक समय की बात है कि देवताओं ने इनकी परीक्षा लेने की योजना बनाई. राजा ने सपने में देखा कि ऋषि विश्ववामित्र को उन्होंने अपना सारा राजपाट दान कर दिया है. प्रात:काल विश्वामित्र उनके द्वार पर आकर कहने लगे कि तुमने सपने में मुझे अपना राज्य दान कर दिया है. राजा हरिश्चन्द्र ने सत्यनिष्ठ व्रत का पालन करते हुए संपूर्ण राज्य विश्वामित्र को सौंप दिया. दान के लिए दक्षिणा चुकाने हेतु राजा हरिश्चन्द्र को पूर्व जन्म के कर्मफल के कारण पत्नी, पुत्र एवं स्वयं को बेचना पड़ा. हरिश्चन्द्र को श्मशान के प्रबंधक ने खरीद लिया जो श्मशान भूमि में लोगों के दाह संस्कार का काम करवाता था.

राजा हरिश्चन्द्र को श्मशान भूमि में दाह संस्कार के लिए कर वसूली का काम दिया गया. एक दिन सौभाग्य से गौतम ऋषि से राजा हरिश्चन्द्र की मुलाकात हो गई. गौतम ऋषि ने राजा से कहा कि- हे राजन्! पूर्व जन्म के कर्मोंं के कारण यह कष्टमय जीवन है इसलिए आप अजा एकादशी का व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णु की पूजा करें और रात में जागरण करते हुए भगवान का ध्यान करेंगे तो आपको कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी. राजा ने ऋषि के निर्देशानुसार अजा एकादशी का व्रत किया. इसी दिन इनके पुत्र को एक जहरीले सांप ने काट लिया और मरे हुए पुत्र को लेकर इनकी पत्नी श्मशान में दाह संस्कार के लिए आई. राजा हरिश्चन्द्र ने सत्यधर्म का पालन करते हुए पत्नी से भी अपने ही पुत्र के दाह संस्कार के लिए कर मांगा. उनकी पत्नी के पास कर चुकाने के लिए धन नहीं था इसलिए उसने अपनी साड़ी का आधा हिस्सा फाड़कर राजा को कर के रूप में दे दिया. राजा ने जैसे ही साड़ी का टुकड़ा लिया आसमान से फूलों की वर्षा होने लगी. समस्त देवगण राजा हरिश्चन्द्र की जय-जयकार करने लगे. इन्द्रदेव ने कहा कि- हे राजन्! आप सत्यनिष्ठ व्रत की परीक्षा में सफल हुए. आप अपना राज्य स्वीकार कीजिए. इस तरह अजा एकादशी व्रत के शुभ प्रभाव से राजा हरिश्चन्द्र को अपना खोया हुआ राजपाट और परिवार फिर से मिल गया!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 09:46  तक:

मेष, मिथुन, सिंह, 

कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, कन्या, 

तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ             पहला- अमृत

दूसरा- रोग              दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग          तीसरा- रोग

चौथा- चर              चौथा- काल

पांचवां- लाभ           पांचवां- लाभ

छठा- अमृत            छठा- उद्वेग

सातवां- काल           सातवां- शुभ

आठवां- शुभ          आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

* प्रदीप श्रीदवे (9772354346) कमलाश्री आश्रम, वागड़

panditshreepradeep'gmail.com

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. माना की पीएम मोदी बहादुर हैं, पर प्रेस से क्यों दूर हैं?

2. कैशलेस पर भरोसा नहीं? लोगों के हाथ में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कैश

3. अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने मांगे 22 हजार अतिरिक्त जवान

4. कीनिया को रौंदकर भारत ने हीरो इंटर कांटिनेंटल फुटबॉल कप जीता

5. SCO समिट- भारत समेत कई देशों के बीच महत्वपूर्ण एग्रीमेंट, PM मोदी ने दिया सुरक्षा मंत्र

6. ट्रंप से मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया से चाइना होते हुए सिंगापुर पहुंचे किम जोंग

7. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने यूजीसी बड़े बदलाव की तैयारी में

8. सुपर 30 का दबदबा कायम आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 26 छात्र सफल

9. रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी, भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.?

10. क्या आप भी पूजा-पाठ करने के लिए स्टील के लोटे का करते हैं इस्तेमाल?पहले जान लें ये बात

11. काम में मन नहीं लगता तो यह करें उपाय

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।