नजरिया. मोदी-शाह की जोड़ी एससी/एसटी एक्ट के मामले में उलझती नजर आ रही है, और क्योंकि इस वक्त भाजपा का पर्याय यह जोड़ी ही है, इसलिए यह खतरा भाजपा पर मंडरा रहा है!

सवाल यह है कि क्या इससे सामान्य वर्ग की नाराजगी का अंदाज नहीं था मोदी-शाह को? शायद नहीं! नोटबंदी, जीएसटी जैसे निर्णयों से सर्वाधिक प्रभावित और परेशान यह सामान्य वर्ग ही रहा, लेकिन देशहित में इसे स्वीकार कर लिया, लिहाजा मोदी-शाह मान कर चल रहे होंगे कि इस बार भी सामान्य वर्ग खामोशी से इस फैसले को स्वीकार कर लेगा, किन्तु ऐसा हुआ नहीं और इस बार सामान्य वर्ग की नाराजगी 2019 के आम चुनाव तक कायम रहेगी?

क्योंकि, यह सामान्य वर्ग ही भाजपा का सबसे बड़ा समर्थक और प्रचारक रहा है इसलिए सामान्य वर्ग की नाराजगी के परिणाम का अंदाज सहज लगाया जा सकता है कि आम चुनाव में भाजपा को भारी सियासी कीमत चुकानी होगी!

पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों के साथ राजनीतिक मंथन किया और अगले साल 2019 में होने वाले आम चुनाव को जीतने का मास्टरप्लान बनाया! लेकिन, सामान्य वर्ग के मतदाताओं की नाराजगी को दूर करने का कोई जादूई रास्ता नजर नहीं आया?

अलबत्ता, बड़े नेताओं, खासकर सामान्य वर्ग के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई कि वे लोगों के बीच जाएं और उन्हें समझाएं! पर बड़ा सवाल यह है कि- समझाएंगे क्या?

दरअसल, पीएम मोदी के नाकामयाब वादों और इरादों को छोड़ भी दें तो कम-से-कम तीन बड़े सवाल भाजपा के लिए परेशानी बढ़ाने वाले हैं, पहला... विपक्षी एकता, दूसरा... ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का कमजोर होना, और तीसरा... सामान्य वर्ग की नाराजगी!

लगातार आ रहे सर्वे बता रहे हैं कि न केवल तीन प्रमुख राज्यों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने जा रहे चुनावों में भाजपा के लिए सत्ता बचाना मुश्किल है, बल्कि 2019 के आम चुनाव में भी पीएम मोदी के लिए 2014 दोहराना मुश्किल है!

यदि तीन राज्यों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार नहीं बना पाई तो मोदी-शाह की जोड़ी को केन्द्रीय भाजपा में एकाधिकार बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा? 

खबर है कि... केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए में सीटों के बंटवारे पर कहा कि जो लोग नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनते नहीं देखना चाहते, वे अफवाह फैलाकर एनडीए में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं!

कुशवाहा का कहना था कि... एनडीए में कुछ लोग मोदीजी को फिर से प्रधानमंत्री बनते नहीं देखना चाहते हैं? ऐसे लोग जान बूझकर अफवाह फैलाकर एनडीए में दरार डालना चाहते हैं!

जाहिर है, शत्रुघ्र सिन्हा जैसे प्रत्यक्ष बागियों के अलावा भी कई पीएम मोदी विरोधी भाजपा में हैं जो इस वक्त खामोश हैं, किन्तु आम चुनाव से पहले खुलकर सामने आ सकते हैं? यही वजह है कि पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर राजनाथ सिंह का नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं!

सियासी संकेत कहते हैं कि सामान्य वर्ग की नाराजगी दूर करने में यदि भाजपा कामयाब नहीं हुई तो 2019 में 2014 के उलट नतीजे भी सामने आ सकते हैं?

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