भादो मास की चौथ सभी प्रकार के संकटों का नाश करने वाली तथा सर्व कामनाओ को देने वाली हैं.30 अगस्त 2018 को संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है. यह दिन भगवान गणपति को समर्पित है और इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजन करने पर सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

व्रत कथा 

पूर्वकाल में राजाओं में श्रेष्ठ राजा नल था उसकी रूपवती रानी का नाम दमयन्ती था .शाप वश राजा नल को राज्यच्युत होना पड़ा और रानी के वियोग से कष्ट सहना पड़ा . तब दमयन्ती ने इस व्रत के प्रभाव से अपने पति को प्राप्त किया . राजा  नल नल के ऊपर  विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा था. डाकुओं ने उनके महल से धन, गजशाला से हाथी और  घुड़शाला से घोड़े हरण कर लिये , तथा महल को अग्नि से जला दिया . राजा नल भी जुआ खेलकर सब हार गये .

व्रत विधि:-

गणपति के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और चंद्र दर्शन के बाद उपवास तोड़ते हैं. व्रत रखने वाले जातक फलों का सेवन कर सकते हैं. साबूदाना की खिचड़ी, मूंगफली और आलू भी खा सकते हैं.

संकष्टी चतुर्थी संकटों को खत्म करने वाली चतुर्थी है. ऐसा माना जाता है कि अगर किसी माह में संकष्टी चतुर्थी यदि मंगलवार के दिन आ रही हो तो विशेष रूप से लाभदायी मानी जाती है. अगर संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है.

पूजन विधि

1. सबसे पहले सुबह स्नान कर साफ और धुले हुए कपड़े पहनें. पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें. चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा पहले बिछा लें.

2. भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें और फिर उन्हें जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें. अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद ओम ‘गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें.

3. इसके बाद एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है.

4. त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें. इसी के साथ बीच में मसूर की दाल व सात लाल साबुत मिर्च को रखें.

5. पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें. पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.

अलग-अलग कष्टों के निवारण के लिए चढ़ावा

भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु गणेश जी पर बेल फल चढ़ाएं. पारिवारिक विपदा से मुक्ति के लिए गणेश जी पर चढ़े गोलोचन से घर के मेन गेट पर तिलक करें. रुके मांगलिक कार्य संपन्न करने के लिए शक्कर मिली दही में छाया देखकर गणपति पर चढ़ाएं.

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजन मुहूर्त: गुरुवार 30 अगस्त 2018 को सुबह 04 बजे से 10:30 बजे तक पूजन कर लें. सुबह  10:31 बजे राहुकाल लगेगा. 10:31 से 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा. इस काल में पूजन वर्जित है. इसके बाद दोपहर 12:01 से रात्रि 9:00 बजे तक पूजन कर सकते हैं.

चंद्र दर्शन मुहूर्त: रात 9:16 बजे पर होगा चंद्रोदय, इसी समय पर अर्घ्य दे सकते हैं. इसके बाद उपवास तोड़ सकते हैं.

नल असहाय होकर रानी के साथ वन को चले गए . शाप वश स्त्री से भी वियोग हो गया कहीं राजा और कहीं रानी दु:खी होकर देशाटन करने लगे . एक समय वन में दमयन्ती को महर्षि शरभंग के दर्शन हुए . दमयन्ती ने मुनि को हाथ जोड़ नमस्कार किया और प्रार्थना कि प्रभु ! मैं अपने पति से किस प्रकार मिलूंगी ? शरभंग मुनि बोले –दमयन्ती ! भादों की चौथ को एकदन्त गजानन की पूजा करनी चाहिए . तुम भक्ति और श्रद्धापूर्वक गणेश चौथ का व्रत करो तुम्हारे स्वामि तुम्हें मिल जाएंगे .

शरभंग मुनि के कहने पर दमयन्ती ने भादों की गणेश चौथ को व्रत आरम्भ किया और सात मास में ही अपने पुत्र और पति को प्राप्त किया . इस व्रत के प्रभाव से नल ने सभी सुख प्राप्त किये .विघ्न का नाश करने वाला तथा सुखा देने वाला यह सर्वोतम व्रत है  .

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