26 अगस्त 2018 

श्रावण पूर्णिमा

रक्षा बन्धन

यजुर्वेद उपाकर्म

हयग्रीव जयन्ती

संस्कृत दिवस

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 12:54:06

मास श्रावण

तिथि पूर्णिमा - 17:27:57 तक

नक्षत्र धनिष्ठा - 12:36:22 तक

करण बव - 17:27:57 तक

पक्ष शुक्ल

योग अतिगंड - 20:46:29 तक

सूर्योदय 05:55:48

सूर्यास्त 18:49:55

चन्द्र राशि कुम्भ

चन्द्रोदय 18:56:59

चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं

ऋतु शरद

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

* राखी पर्व श्रावण महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है.

* रक्षा बंधन भाई-बहन के भावनात्मक संबंधों और विश्वास को व्यक्त करनेेवाला पर्व है.  

* इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं, अपराह्न का समय रक्षा बन्धन के लिये उत्तम माना जाता है. 

* भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना जाता है, इस बार भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो गई है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार राखी-पर्व मनाएं!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 

कन्या, धनु, कुम्भ

*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग               पहला- शुभ

दूसरा- चर                 दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ                तीसरा- चर

चौथा- अमृत                चौथा- रोग

पांचवां- काल               पांचवां- काल

छठा- शुभ                  छठा- लाभ

सातवां- रोग               सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग              आठवां- शुभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

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