भिलाई. छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों की सक्रियता से ठिठके नक्सलियों ने तीन राज्यों की सीमा पर नया रेड कॉरीडोर बनाना शुरू कर दिया है. बस्तर को लालगढ़ में तब्दील करने के बाद नक्सलियों ने लाल आतंक के कॉरिडोर का विस्तार करने में लगे है. इस बार उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचने के लिए कवर्धा, चिल्फी और अमरकंटक की पहाडिय़ों का सहारा लिया है. 47 लाख के इनामी नक्सली पहाड़ सिंह ने गुरुवार को आईजी जीपी सिंह के सामने सरेंडर किया था. पहाड़ सिंह पर छत्तीसगढ़ के साथ ही महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार ने इनाम घोषित कर रखा है.

पहाड़ सिंह ने नक्सलियों की नई योजना का खुलासा करते हुए बताया कि बस्तर में बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स के साथ ही डीआरजी और एसटीएफ के जवान तैनात किए जाने के बाद से नक्सलियों को कड़ी चुनौती मिल रही है. सुरक्षा बलों की तगड़ी घेराबंदी से नक्सलियों को मौत का सामना करना पड़ रहा है. वहीं आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. जिसके चलते नक्सलियों के बड़े नेताओं के सामने बस्तर में संगठन के संचालन को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. इससे निपटने राजनांदगांव के उत्तरी हिस्से से लेकर कबीरधाम, गोंदिया और मंडला, बालाघाट और अमरकंटक एरिया में नया रेड कॉरीडोर बनाने योजना बनाई.

बच्चों को पढ़ाता था: पहाड़ सिंह को ग्राम पंचायत फाफामार द्वारा स्कूल में शिक्षक की कमी को देखकर 500 रुपए महीने देकर बच्चों को पढ़ाने के लिए रखा गया. वर्ष 1999 में वह अपने रिश्तेदार जगत कुंजाम ग्राम खेडेपार से मिलने गया था, इस दौरान देवरी दलम के कमांडर देवचंद उर्फ चंदू उर्फ नरेश के संपर्क में आया. पीजीए भर्ती की मिली जिम्मेदारी: कमांडर नरेश ने उसे युवक युवतियों को पीजीए (पीपुल्स गुरिल्ला आर्मी) के लिए भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी. उसके काम से संतुष्ट होकर देवरी दलम कमांडर द्वारा उसे वर्ष 2000 में देवरी दलम सदस्य के रूप में नक्सली संगठन में भर्ती किया गया एवं 8 एमएम बंदूक देकर देवरी दलम में पायलट बनाया.

एमएमसी का गठन: वर्ष 2014 में केन्द्रीय कमेटी के निर्णय व नक्सलियों की विस्तार रणनीति के तहत नक्सलियों द्वारा महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन को केंद्र मानकर एमएमसी जोन बनाने का निर्णय लिया गया. जिसके अन्तर्गत जीआरबी पहाड़ सिंह को डिवीजनल कमेटी का सचिव बनाया गया. देवरी एरिया का मेंबर: वर्ष 2003 में देवरी एरिया कमेटी सदस्य बनाया गया. वर्ष 2006 में डिवीजन अधिवेशन (प्लीनम) में सर्वसम्मति से टाण्डा मलाजखंड संयुक्त एरिया कमेटी सचिव की जवाबदारी दी गई.

2008 में टिपागढ़ में उत्तर गढ़चिरौली गोंदिया डिवीजन के प्लीनम में डिवीजन सदस्य नियुक्त किया गया. चार्ज लेते ही बना लिया था टार्गेट आईजी जीपी सिंह ने दुर्ग रेंज आईजी का चार्ज लेने के बाद से ही नक्सलियों के नए रेड कॉरीडोर को लेकर एक्शन प्लान तैयार कर लिया था. चार्ज लेने के बाद उन्होंने सबसे पहले नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात पुलिस अफसरों की बैठक ली. एमएमसी में युवकों को जोड़ने में लगे पहाड़ सिंह को आईजी उस समय से जान रहे हैं, जब वे राजनांदगांव के एसपी थे. 

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