नजरिया. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेन्द्रभाई मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज करवाई और केन्द्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. इसके बाद, एक के बाद एक प्रादेशिक चुनावों में भी कामयाबी का परचम लहराते हुए भाजपा ने डेढ़ दर्जन से ज्यादा राज्यों में सरकार बनाने में कामयाबी पाई, लेकिन... इन प्रदेशों में सत्ता मिलने के बावजूद 2014 के आम चुनावों के सापेक्ष मतदाताओं का समर्थन घटता गया? इन प्रादेशिक चुनावों में 2014 के सापेक्ष भाजपा का वोट प्रतिशत कम हो गया! अब भाजपा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती ही यही है कि 2019 के आम चुनाव के लिए अपना वोट प्रतिशत कैसे बढ़ाए?

यदि भाजपा ऐसा नहीं कर पाई तो 2014 की कामयाबी तो दूर, केन्द्र की सत्ता भी नहीं बचा पाएगी! कारण? वर्ष 2014 के बिखरे गैरभाजपाई 2019 में एकजुट हो कर आते नजर आ रहे हैं, मतलब... भाजपा के पास तकरीबन चालीस फीसदी वोट है, जबकि विरोध में साठ प्रतिशत? यदि गैरभाजपाई बिखरे नहीं तो भाजपा के लिए 2019 में 2014 की सफलता दोहराना मुश्किल हो जाएगा! आम चुनाव 2014 के बाद 26 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए जिनमें से भाजपा ने डेढ़ दर्जन प्रदेशों में अकेले या सहयोगियों के दम पर सरकारें बनाई, जबकि कांग्रेस गठबंधन को महज चार राज्यों की सत्ता मिली, बावजूद इसके भाजपा का इन प्रदेशों में आम चुनाव 2014 के मुकाबले वोट प्रतिशत घट गया!

अर्थात... जितने वोट भाजपा को इन प्रदेशों में आम चुनाव 2014 में मिले, उतने विधानसभा चुनावों में नहीं मिले? वर्ष 2014 के आम चुनाव के बाद जिन 26 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए उनमेंं से भाजपा ने 24 में चुनाव लड़ा, जिनमें से 16 राज्यों में भाजपा के वोट कम हुए और 8 राज्यों में भाजपा के वोट बढ़े? उधर, कांग्रेस ने सभी 26 राज्यों में चुनाव लड़ा जिनमें से 12 राज्यों के विधानसभा चुनावों में उसने 2014 के सापेक्ष वोट गवाएं परन्तु 14 राज्यों में उसके वोट बढ़ गए! मजेदार तथ्य यह है कि जिस पश्चिम बंगाल से भाजपा उत्तर भारत की कमी पूरी करने की सोच रही है, वहीं भाजपा को सबसे ज्यादा 36 प्रतिशत वोट का घाटा हुआ.

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में भाजपा को 86 लाख 92 हजार 297 वोट मिले थे, जबकि 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में 55 लाख 55 हजार 134 वोट मिले? हालांकि भाजपा की ताकत पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ रही है और वह ताजा चुनावों में कांग्रेस/वामपंथियों का पछाड़ कर दूसरे नंबर पर पहुंच गई है, किन्तु इतनी ताकतवर नहीं हुई है कि आम चुनाव में बहुत सारी सीटें हांसिल कर सके!

उधर, त्रिपुरा में भाजपा के सबसे ज्यादा 766 प्रतिशत वोट बढ़े, जहां आम चुनाव 2014 में भाजपा को त्रिपुरा में 1 लाख 15 हजार 319 वोट मिले थे वहीं विधानसभा चुनाव में 9 लाख 99 हजार 93 वोट मिले! लेकिन, पूर्वोत्तर की बढ़त उत्तर भारत का कितना घाटा कम कर पाएगी? सियासी संकेत यही हैं कि देश में इस वक्त भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी हो, परन्तु आम चुनाव 2019 में देश में सबसे ज्यादा सीटें हांसिल करना भाजपा के लिए आसान नहीं है, समय रहते भाजपा यदि उत्तर भारत में सुधारात्मक उपाय नहीं कर पाई तो भाजपा गठबंधन की केन्द्र सरकार भले ही बन जाए, 272 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी!

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