इनदिनों. चाहे विपक्ष के महागठबंधन का मजाक उड़ाया जाए, मगर यह तय है कि 2019 में किसी एक दल को केन्द्र में बहुमत मिलना मुश्किल है, लिहाजा केन्द्र में अगली गठबंधन सरकार ही होगी! बस, सवाल यह है कि केन्द्र सरकार किसकी होगी? भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की या गैरभाजपाई नेतृत्व वाले गठबंधन की! यदि सीटों के बंटवारे के वक्त विवाद नहीं होता है तो यह तय लग रहा है कि इस बार आम चुनाव 2019 में भाजपा के सामने संयुक्त विपक्ष की तगड़ी चुनौती होगी? सियासी खतरे का भांप कर ही भाजपा सक्रिय हो गई है और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भाजपा शासित प्रदेशों का दौरा कर रहे हैं!

इस वक्त तीन तरह के प्रदेश है, एक... जहां भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस से हैं, दो... जहां भाजपा का सीधा मुकाबला क्षेत्रीय दलों से है, और तीन... जहां बहुकोणीय मुकाबला है, यदि विपक्षी एकजुट नहीं होते है? जाहिर है, पहले वाले दो प्रदेशों में यदि विपक्षी एक नहीं भी होते हैं तो भी भाजपा के लिए परेशानी है, लेकिन भाजपा को केन्द्र से हटाने का गैरभाजपाई सपना तो तभी साकार हो सकता है जब विपक्षी एकजुट हो कर भाजपा के सामने आएं! और इसीलिए लंबे समय से गैरभाजपाई महागठबंधन पर सैद्धान्तिक सहमति बनी हुई है, परन्तु प्रायोगिक आधार का अभी अभाव है?

तकरीबन 14 राज्यों की 300 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जिन पर आम चुनाव 2014 में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने शानदार कामयाबी दर्ज करवाई थी, कारण? गैरभाजपाई मतों का विभाजन! जाहिर है, इससे प्रेरणा लेकर ही महागठबंधन की बात बार-बार हो रही है, परन्तु जहां पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी जैसी नेता तीसरे मोर्चे का अपना अलग राग चला रही हैं वहीं शरद पंवार जैसे नेता चुनाव पूर्व गठबंधन को जरूरी नहीं मानते हैं, लेकिन इस संबंध में पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने विपक्षी नेताओं को सतर्क करते हुए कहा है कि यदि चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हुआ तो चुनाव में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी रहने की स्थिति में राष्ट्रपति भाजपा को सरकार के गठन के लिए आमंत्रित कर सकते हैं? और तब जोड़-तोड़ की राजनीति के चलते केन्द्र में भाजपा की सरकार बन सकती है!

गैरभाजपाई, जिन 14 राज्यों में भाजपा को एकजुट होकर घेरना चाहते हैं, वे हैं- उत्तर प्रदेश (80), पश्चिम बंगाल (42), आंध्रप्रदेश (42), बिहार (40), कर्नांटक (28), महाराष्ट्र (48), झारखंड (14), मध्यप्रदेश (29), छत्तीसगढ़ (11), राजस्थान (25), गुजरात (26), उत्तराखंड (5), पंजाब (13), हरियाणा (10) और हिमाचल प्रदेश (4). इस वक्त भाजपा के पास सबसे ज्यादा सीटें यूपी में हैं, जहां भाजपा की टक्कर सपा-बसपा गठबंधन से होगी और ऐसी स्थिति में कोई चमत्कार ही भाजपा को 2014 वाली कामयाबी दिला सकता है! जिन आधा दर्जन राज्यों में भाजपा की कांग्रेस से सीधी टक्कर है उनका रूझान भी इसी साल के अंत में होने जा रहे एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में नजर आ जाएगा! जिन आधा दर्जन राज्यों में भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर होगी वहां तकरीबन 100 लोकसभा सीटें हैं.

सीटों के बंटवारे को लेकर सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस का ही है, जैसे यूपी में कांग्रेस की मौजूदगी सब जगह है लेकिन गत आम चुनाव में वह तकरीबन एक दर्जन सीटों पर ही दूसरे नंबर पर रही थी, लिहाजा सपा-बसपा कांग्रेस को अधिकतम एक दर्जन सीटें ही दे सकते हैं, मतलब... यदि कांग्रेस त्याग की भावना नहीं रखती हैं तो संयुक्त विपक्ष का फार्मूला फेल हो जाएगा? ऐसी स्थिति में भाजपा को करीब एक दर्जन सीटों का फायदा हो सकता है! इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी कांग्रेस को कोई खास महत्व नहीं दे रहीं हैं तो वहां भी कांग्रेस की छोटी ताकत टीएमसी का बड़ा नुकसान कर सकती है? अलबत्ता, कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस-बसपा का गठबंधन लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ेगा जो भाजपा के लिए परेशानी का सबब है?

महाराष्ट्र में शिवसेना यदि भाजपा को साथ नहीं देती है तो शिवसेना का फायदा हो-न-हो, भाजपा को घाटा हो जाएगा! भाजपा की सबसे बड़ी परेशानी बिहार में है जहां आरजेडी और कांग्रेस का गठबंधन पहले से ही है. यही नहीं, जीतनराम मांझी भी आरजेडी के साथ हैं. सीटों के बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार के तेवर भाजपा को बेचैन कर रहे हैं, यदि नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ दिया तो भाजपा के लिए बिहार से सीटें हांसिल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा? सियासी संकेत यही हैं कि भाजपा के लिए नए प्रदेशों में बेहतर संभावनाएं बन रही हैं जबकि भाजपा के पुराने क्षेत्रों में परेशानी बढ़ रही है, इसलिए यदि... भाजपाई प्रदेशों का घाटा, गैरभाजपाई प्रदेशों से पूरा नहीं हो पाया तो केन्द्र की सत्ता हांसिल करने में भाजपा को पसीने आ जाएंगे!

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