हमारे देश में बहुत से मंदिर अपने रहस्यमय चमत्कार के लिए इतने प्रसिद्ध है की वैज्ञानिक भी इनके बारे में सही से पता लगाने में असमर्थ है. इन मंदिरों में हर रोज ऐसे बहुत से चमत्कार होते है जिनके बारे में दिमाग विश्वास नहीं करता. लेकिन ये घटना यहां पर घटित होती है.

इन मंदिरों में ऐसे कई रहस्य छुपे हुए हैं जिसको अभी तक कोई समझ नहीं पाया. भारत में एक ऐसा ही अनोखा  मंदिर है जहां अखंड ज्योति से काजल की जगह केसर निकलता है. इस केसर को आख में लगाने से रोग दूर होते हैं.

राजस्थान के जोधपुर में बिलाड़ा नामक गांव में श्री आईजी माता मंदिर देश में भी बहुत  प्रसिद्ध है.  इस मंदिर के परिसर में सब को हैरान कर देने वाली प्रज्वलित अखंड ज्योति जलती है जहां से काजल के स्थान पर केसर निकलता है इस को अपनी आंख में लगाने से आँख से संबंधित सभी बीमारियां दूर होती हैं.  बिलाड़ा स्थित यही वो मंदिर है जहाँ विश्व का अनोखा एवं अद्वितीय चमत्कार “अखंड केसर ज्योत” है. माता सिरवी समाज की आराध्य देवी है. 

मंदिर के लिए पौराणिक मान्यता है कि यहां पर देवी मां रुकी थी जिसके कारण मंदिर का नाम आईजी माता पड़ा था श्री आई माता गुजरात के अंबापुर में अवतरित हो कर अंबापुर में कई चमत्कार करने के बाद भ्रमण करते हुए बिलाड़ा आई थी यहां पर उन्होंने भक्तों को 11 गुणों और सदैव सन्मार्ग पर चलने के उपदेश दिया. इसके बाद अपने कई भक्तों के सामने माता ने अपने को अखंड ज्योति में विलीन कर दिया. तब से अखंड ज्योति से केसर निकल रहा है. माता के इस मंदिर में लगभग 550 साल से लगातार यह अखंड दीपक जल रही है.

हमारे देश में मां दुर्गा के बहुत से मंदिर स्थित हैं पर कुछ मंदिर सच में चमत्कारी हैं जिन्हे देख लोग भी दंग रह जाते है. आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में यहां जानकारी दे रहें हैं. इस चमत्कारी मंदिर का नाम “आई जी माता मंदिर” है. यह मंदिर मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा नामक स्थान पर स्थित है. इस स्थान पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं और नवरात्रों में इस स्थान पर भक्तों का मेला लगा रहता है. इस स्थान पर एक दीपक पिछले 550 वर्ष से लगातार जलता आ रहा है और उससे केसर टपकता रहता है. मान्यता है कि इस दीपक से टपकने वाले केसर को आंखों पर लगाने से आंखों के सभी रोग दूर हो जाते हैं.

इस मंदिर के मुख्य पुजारी भेरूलाल शर्मा ने इस मंदिर के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि “इस मंदिर का निर्माण राजस्थान के जोधपुर स्थित बिलाड़ा नामक क्षेत्र के निवासी हरिसिंह दीवान और उनके परिजन ने रामपुरा स्टेट में मिली जागीरदारी से कराया था.”, ऐसा माना जाता है कि उस समय देवी मां ने स्वयं आकर इस स्थान पर ज्योत जलाई थी. उस समय से आज तक 550 वर्ष गुजर चुके हैं और आज भी इस स्थान पर देसी घी से माँ की अखंड ज्योत जलती रहती है. आई जी माता मंदिर की कमेटी के आनंद श्रीवास्तव ने इस मंदिर के बारे में बताते हुए कहा कि इस मंदिर का एरिया 20 हजार स्क्वेयर क्षेत्रफल का है तथा मंदिर का मुख्य परिसर ढाई हजार स्क्वेय मीटर में निर्मित है. जिन श्रद्धालुओं की मन्नत यहां पूरी होती है वे आईजी माता मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते हैं तथा भंडारा आदि कराते हैं.” इस मंदिर के सभी कार्य गांव के लोगों द्वारा किये जाते हैं और नवरात्र के दिनों में इस आई जी माता मंदिर में सत्संग भी चलता है.

वैसे तो इस मंदिर का एक-एक भाग दर्शनीय है, फिर भी समझने की दृष्टि से विवरण प्रस्तुत है-

आई माता जी की झोपड़ी-

मंदिर परिसर के प्रथम तल पर आई माताजी की झोपड़ी को संरक्षित किया गया है. यह वही झोपड़ी है जहाँ आई माताजी निवास करते थे.

चित्र प्रदर्शनी- 

मंदिर के एक भाग में आई माताजी के संपूर्ण जीवन चरित्र को दर्शाने वाली भव्य प्रदर्शनी है. यहाँ आई माताजी के जीवन वृत्त एवं विभिन्न घटनाओं को अनेक चित्रों के माध्यम से समझाया गया हैं. प्रदर्शनी के अंतिम छोर पर परम भक्त दीवान रोहितदास की धूणी है जहाँ वे तपस्या करते थे.

संग्रहालय-

मंदिर परिसर के एक भाग में विशाल एवं भव्य संग्रहालय है. यहाँ सैंकडों साल पुरानी अनेकों अनेक वस्तुएं, बर्तन, वाद्य यन्त्र, पुराने दस्तावेज़, फर्नीचर , धातु की मूर्तियाँ, कलाकृतियाँ, पुरानी तकनीकी वस्तुएं आदि संरक्षित हैं. इसी म्यूजियम में अनेक प्रकार के हथियार, जैसे तलवारें, कटार, भाले, ढाल आदि भी संरक्षित किये गए हैं. वर्तमान दीवान श्री माधोसिंह जी के द्वारा करवाए गए इस संरक्षण को देखकर निश्चित रूप से आप कह उठेंगे- आश्चर्यजनक! 

रावटी झरोखा

- यह झरोखा मंदिर परिसर के द्वार के पास ऊपर बना हुआ है. यह पत्थर पर नक्काशी का सुन्दर उदाहरण है. इस झरोखे के अन्दर की तरफ कांच की अत्यंत सुन्दर कारीगरी की गयी है. बेजोड़ स्थापत्य कला युक्त यह झरोखा बरबस ही सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करता है.

वाड़ी महल-यह महल दीवान साहब का निवास स्थान है. इसका निर्माण लगभग 300 वर्षों पहले हुआ था. इस महल की बनावट भी बेजोड़ है.

कैसे पहुंचे:

बिलाडा क़स्बा जोधपुर से 45  किमी दूर जयपुर-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है. जयपुर, अजमेर, जोधपुर से यहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है. 

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