अंबिकापुर. झारखंड के नक्सली संगठन में लंबे समय से सक्रिय छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों के दो नक्सलियों को झारखंड की गढ़वा पुलिस व सीआरपीएफ ने संयुक्त घेराबंदी कर झारखंड के बूढ़ापहाड़ क्षेत्र से लगे कुल्ही गांव के नजदीक धरदबोचा. बूढ़ापहाड़ को नक्सलमुक्त करने चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दोनों नक्सली कुल्ही गांव में आकर फोर्स की गतिविधियों पर नजर रखने का काम कर रहे थे. छत्तीसगढ़ से लगे झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में हुए कई नक्सली वारदातों में ये दोनों नक्सली शामिल थे.

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से लगे झारखंड का बूढ़ापहाड़ लंबे समय तक नक्सलियों की शरणस्थली के रूप में जाना जाता था, लेकिन फोर्स के बढ़े दबाव तथा नक्सली संगठन के कई बड़े ओहदेदारों के मारे जाने तथा कुछ के पकड़े जाने के बाद से यह इलाका भी धीरे-धीरे नक्सलमुक्त होने लगा है.

समय-समय पर छत्तीसगढ़ और झारखंड पुलिस द्वारा सशस्त्र बलों के साथ सीमावर्ती इलाकों में सघन सर्चिंग भी की जाती है. बताया गया कि गढ़वा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बूढ़ापहाड़ से लगे कुल्ही गांव में दो नक्सलियों ने अपना डेरा बनाया है.

ये दोनों नक्सली फोर्स की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सूचना संकलन का कार्य कर रहे थे. इस पुख्ता सूचना के आधार पर गढ़वा पुलिस व सीआरपीएफ के संयुक्त दल ने रविवार को नक्सलियों की धरपकड़ के लिए कार्ययोजना तय कर आगे बढ़ रहे थे, उसी दौरान जंगल के रास्ते दो संदिग्ध लोगों के भागते नजर आने पर पकड़ा गया. पूछताछ में पता चला कि दोनों लंबे समय से झारखंड में सक्रिय नक्सली संगठन के लिए काम कर रहे हैं. इनके खिलाफ झारखंड के कई थानों में नामजद अपराध भी पंजीबद्ध है.

बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं दोनों नक्सली

झारखंड की गढ़वा पुलिस व सीआरपीएफ के संयुक्त दल ने झारखंड के कुल्ही गांव के नजदीक जंगल में जिन दो नक्सलियों को गिरफ्तार किया है, वे दोनों बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं. पकड़े गए एक नक्सली का नाम नंदू कोरवा उर्फ गोपाल पिता मुनेश्वर कोरवा है. वह रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के सिलाजू का रहने वाला है. दूसरे नक्सली की पहचान झारखंड सरहद से लगे बलरामपुर जिले के पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे पीपरढाब सामरी निवासी दिलीप कोरवा पिता स्व. मुनेश्वर कोरवा के रूप में हुई है. दोनों से पूछताछ की जा रही है.

लगभग सात वर्षों से थे सक्रिय

बलरामपुर जिले के दोनों नक्सली झारखंड के नक्सली संगठन में लगभग सात वर्षों से सक्रिय थे. पिछले 26 जून को बूढ़ापहाड़ के नजदीक खपरीमहुआ में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी ब्लास्ट में भी दोनों शामिल थे. इन दोनों के खिलाफ नामजद अपराध भी पंजीबद्घ था. नक्सली नंदू कोरवा लातेहार, गुमला व गढ़वा जिले में हुए कई नक्सली घटनाओं में शामिल था. पुलिस व सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाओं में भी वह सक्रिय रहा. नंदू कोरवा, विमल के दस्ते का तथा दिलीप कोरवा, नक्सली अमन दस्ते का सदस्य था. दोनों से पूछताछ की जा रही है.

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