मध्यप्रदेश के भोपाल निवासी एक 14 वर्षीय छात्र द्वारा उठाए गए कदम ने समाज को नई राह दिखलाई है. 10 वीं कक्षा में पढ़ रहे आयुष कुमार की अनोखी पहल से 14 कैदी स्वंतत्रता दिवस को रिहा होने वाले हैं. यह कैदी वो हैं जो जुर्माने की राशि जमा नहीं कर पाने के कारण अतिरिक्त सजा काट रहे हैं. आयुष ने अपनी छात्रवृति से इनके 21 हजार 350 रुपए जुर्माने की राशि भरी है.

आयुष बतातें है कि जब दो साल पहले भोपाल की सेंट्रल जेल से भागे सिम्मी आंतकियों ने एक पुलिस कर्मी की हत्या कर दी थी. तब उन्होंने शहीद पुलिस कर्मी के परिवार की मदद करने के लिए अपने माता-पिता से कहा था. वहीं सरकार ने तत्काल मदद का एलान कर दिया था. 

इस घटना के बाद उनका ध्यान कैदियों की ओर गया. बातचीत के दौरान उन्हें यह पता चला कि कुछ ऐसे भी कैदी है जिनका कोई नहीं है या जरा सी जुर्माने की राशि नहीं चुकाने के कारण वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं. तब उन्होंने ऐसे कैदियों कैदियों की मदद का फैसला लिया.

चकित हो गई थी मां

आयुष कुमार ने जुर्माना नहीं चुका पाने के कारण अतिरिक्त सजा काट रहे कैदियों की मदद करने की इच्छा जाहिर अपनी मां से की. एक बच्चे की बात सुनकर मां भी चौंक गई. उन्होंने जब पूछा कि रिहा के लिए रकम कहां से लाओगे तो आयुष ने जबाव दिया की अपनी स्कॉलरशीप से कैदियों की रिहाई कराऊंगा. वहीं माता-पिता ने आयुष के भावों को समझते हुए तत्काल इस पहल में अपनी सहमति दी.

करीब 1 लाख रुपए जमा है छात्रवृति

आयुष की मां विनीता मालवीय वरिष्ट पुलिस अधिकारी हैं. वे पुलिस मुख्यालय योजना शाखा में एआईजी पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि अलग-अलग विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण आयुष को छात्रवृति मिलती है. इस छात्रवृति को वे आयुष के बैंक खाते में जमा करती है.

अब तक पढ़ाई और क्रिकेट से आयुष को करीब 1 लाख रुपए की छात्रवृति मिल चुकी है. इतना ही नहीं बल्कि आयुष को अलोहा इंटरनेशनल मैंटल अर्थमेटिक कंप्टीशन 2013 मलेशिया में चैम्पियन ट्रॉफी मिली थी. इसके अलावा आयुष का नाम इंडिया बुक रिकार्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी दर्ज है. इनकी उपलब्धियों को देखते हुए दिल्ली में राष्ट्रपति भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं.

जनवरी 2018 को पहली बार रिहा कराए थे 4 कैदी

आयुष की पहल पर पहली बार 4 कैदी 26 जनवरी 2018 को रिहा हुए थे. उन्होंने इसके लिए अपनी छात्रवृति से 14 हजार रुपए जमा कर जुर्माने जमा राशि अभाव में सजा काट रहे अर्जुन सिंह, हाकम सिंह, जगदीश सोलंकी, नवीन डगोरिया को रिहा कराया था. साथ ही रिहा कैदियों से यह वचन भी लिया था कि अब वे कोई अपराध नहीं करेंगे. आयुष के पिता जीसी धवानियां भी एक आईईएस अधिकारी हैं जो महाराष्ट्र में पदस्थ हैं.

सिर्फ अच्छा इंसान बनाना चाहती हूं

आयुष कुमार ने भले ही अपने भविष्य का निर्धारण नहीं किया हो लेकिन मां विनीता मालवीय एक अलग ही सोच रखती हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे आयुष को डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी बनाने से पहले एक अच्छा इंसान बनाना चाहती हैं. उन्होंने बताया कि आयुष ने हमेशा से समाज सेवा के प्रति रूझान रहा है. वे कहती है कि आयुष खुद ही अपनी दिशा तय करेगा.

कोई और जुर्माना भर सकता है

नियमों में ये प्रावधान है कि यदि कोई कैदी जुर्माना नहीं भर पा रहा है तो उसके बदले कोई और जुर्माना भर दे तो कैदी को रिहा किया जा सकता है. जेल अधिकारियों की यही कोशिश होती है कि जुर्माना भरने वाला कभी कोई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त न रहा हो. गरीब कैदियों का जुर्माना भर कर छुड़ाने की यह पहल सराहनीय है.

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