सोमवार, 13 अगस्त 2018

हरियाली तीज

श्रावण सोमवार व्रत

अन्दल जयन्थी

शक सम्वत 1940   विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:13:55

मास  श्रावण

तिथि द्वितीया - 08:38:27 तक, तृतीया - 29:46:36 तक

नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी - 19:09:34 तक

करण कौलव - 08:38:27 तक, तैतिल - 19:08:46 तक

पक्ष शुक्ल

योग शिव - 24:19:44 तक

सूर्योदय 05:48:55

सूर्यास्त 19:02:50

चन्द्र राशि सिंह - 24:39:31 तक

चन्द्रोदय 07:40:00

चन्द्रास्त 20:41:59

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 19:10 से

चन्द्र वास: पूर्व में 24:40+ तक, दक्षिण में 24:40+से

हरियाली तीज

देवी पार्वती की पूजा-आराधना का प्रमुख दिन है- हरियाली तीज! इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं, निर्जला व्रत रखती हैं. 

यह कठिन व्रत है, जिसमें महिलायें पूरा दिन बिना भोजन और जल के रहती हैं और दूसरे दिन प्रात:काल पवित्र स्नान और पूजा के बाद भोजन ग्रहण करती हैं. 

इस व्रत की कथा भोलेनाथ ने देवी पार्वती को उनके पूर्व जन्म का स्मरण करवाने के उद्देश्य से कही थी- हे पार्वती! प्राचीन समय में तुमने हिमालय पर मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था. तुमने अन्न-जल त्याग कर दिया था. 

तुम्हारी मनोदशा देखकर तुम्हारे पिता बहुत दु:खी और क्रोधित थे, तब देवऋषी नारद तुम्हारे महल पधारे और आगमन का कारण बताया कि- हे गिरिराज! मैं भगवान श्रीविष्णु के भेजने पर यहां आया हूं जो आपकी बेटी की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर उससे विवाह करना चाहते हैं? देवऋषी नारद की बात सुनकर पर्वतराज अति प्रसन्न हुए और बोले- हे देव! यदि स्वयं भगवान श्रीविष्णु मेरी बेटी से विवाह करना चाहते हैं तो इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती! मैं इस शुभ विवाह के लिए तैयार हूं.

पर्वतराज की स्वीकृति पाकर देवऋषी नारद, श्रीविष्णु के पास गए और यह शुभ संदेश सुनाया, लेकिन जब तुम्हें इस बारे में पता चला तो तुम्हें बहुत दु:ख हुआ. तुम मुझे मनोमन अपना पति मान चुकी थी.

तुमने अपने बेचैन मन की बात अपनी सखी को बताई. तुम्हारी सखी ने सुझाया कि  तुम्हें वन में ले जाकर छुपा देगी और वहां रहकर तुम भोलेनाथ को प्राप्त करने की तपस्या करना. तुम्हारे पिता तुम्हें महल में नहीं पाकर दु:खी और परेशान हो गए कि यदि विष्णुदेव बारात लेकर आ गए और तुम महल में नहीं मिली तो क्या होगा? उन्होंने तुम्हारी बहुत तलाश की लेकिन तुम नहीं मिली. 

तुम तो तपस्या में मग्न थी और तुमने शिवलिंग बना कर मेरी आराधना की जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूर्ण की. तुमने अपने पिता से कहा कि- पिताश्री! मैंने अपने जीवन का समय भोलेनाथ की तपस्या में बिताया है, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने मुझे स्वीकार भी कर लिया है. अब मैं आपके साथ तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे. पिताश्री ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर ली और तुम्हें महल वापस ले गये. इसके बाद उन्होंने विधि-विधान से हमारा शुभ विवाह किया.

भगवान् शिव ने कहा- हे पार्वती! तपस्या करके जो व्रत किया था, उसी के परिणाम स्वरूप यह शुभ विवाह संभव हो सका, इसलिए इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली हर स्त्री को मनवांछित शुभफल देता हूं. इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे अखंड सौभाग्य प्राप्त होगा. इस दिन निर्जला व्रत और भगवान शिव और देवी पार्वती की सपरिवार पूजा की जाती है. सायंकाल व्रत की कथा सुनी जाती है. देवी पार्वती और भोलेनाथ की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 24:40+ तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या, 

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

- सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा            रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत                  पहला- चर

दूसरा- काल                   दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ                  तीसरा- काल

चौथा- रोग                    चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग                पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                     छठा- शुभ

सातवां- लाभ                 सातवां- अमृत

आठवां- अमृत                 आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

दिन का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

* श्रावण सोमवार को भोलेनाथ की आराधना करें...

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