शनिवार, 11 अगस्त 2018

हरियाली अमावस्या

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:16:48

मास श्रावण

तिथि अमावस्या - 15:29:28 तक

नक्षत्र आश्लेषा - 24:05:34 तक

करण नाग - 15:29:28 तक, किन्स्तुघ्ना - 25:41:14 तक

पक्ष कृष्ण

योग व्यतीपात - 11:43:44 तक

सूर्योदय 05:47:48

सूर्यास्त 19:04:36

चन्द्र राशि कर्क - 24:05:34 तक

चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं

चन्द्रास्त 19:11:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: पूर्व में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में 24:05+ तक, पूर्व में 24:05+ से

हरियाली अमावस्या

अमावस्या हर माह की 30वीं अर्थात कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है, जिस तिथि में चन्द्र और सूर्य साथ रहते हैं, वही अमावास्या तिथि है.

सावन की अमावस्या हरियाली अमावस्या कहलाती है, जो प्रकृति की हरियाली की रक्षा करने की हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाती है.

श्रावण कृष्ण अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. यह सावन में पृथ्वी पर हरियाली के जन्मोत्सव की खुशियों का त्योहार है. इसका मुख्य उद्देश्य आमजन को प्रकृति के करीब लाना, हरियाली का महत्व दर्शाना एवं इसके प्रति हमारी जिम्मेेदारी की याद दिलाना है. कई जगहों पर इस दिन मेले लगते हैं.

इस दिन कल्पवृक्ष, पीपल आदि पवित्र वृक्षों की पूजा करने का उत्तम फल मिलता है. यदि इस दिन पौधा लगाकर उसकी रक्षा की जाए तो जैसे-जैसे पौधा वृद्धि करेगा वैसे-वैसे हमारी की प्रगति होगी. पौधा अपने प्रियजन की समृद्धि की कामना के साथ भी लगा सकते हैं. उत्तम होगा यदि प्रकृति धर्म कर्म के लिए हरियाली अमावस्या पर हरसाल एक पौधा लगाने का संकल्प लें!

हिन्दू धर्म में माना जाता है कि वृक्षों में देवताओं का वास होता है. धर्मशास्त्रों के अनुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है तो केले के पौधे में श्रीविष्णु निवास करते हैं. आंवले के पौधे में भगवान लक्ष्मीनारायण बसते हैं तो बरगद में पितृ देवों का अंश होता है. श्वेत आक में गणपति का निवास होता है. इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन पौधे लगाना बहुत पुण्य का कार्य माना गया है. धर्मशास्त्रों के अनुसार एक वृक्ष दस योग्य पुत्रों के समान होता है.

ंहिंदू धर्म की मान्यता है कि पितृदेव अपने कुल के रक्षक होते हैं. अमावस्या के दिन किए गए दान, श्राद्ध, तर्पण से उन्हें प्रसन्नता मिलती है जो आशीर्वाद के रूप में हमें प्राप्त होती है और भाग्योदय होता है.

अमावस्या के अवसर पर किसी पवित्र तीर्थ में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. हरियाली अमावस्या पर कई जगहों पर मेलों का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी लोगों उत्साह के साथ शामिल होते हैं. इस अवसर पर गुड़ और गेहूं की धानि का प्रसाद वितरित जाता है. इस अवसर पर धान की सांकेतिक बुआई भी होती है ताकि आनेवाली फसल का अनुमान लगाया जा सके. धर्मग्रंथों के अनुसार वृक्ष योनि पूर्व जन्मों के कमों का फल है जो परोपकार के लिए है.

अलग-अलग मनोकामनाएं पूर्ण करने हेतु विविध वृक्ष लगाए जाते हैं-

*धनलाभ प्राप्ति के लिए- तुलसी, आँवला, केल, बिल्वपत्र के वृक्ष लगाये. 

*उत्तम स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए- ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आँवला, सूरजमुखी, तुलसी लगाये. 

*भाग्योदय के लिए- अशोक, अर्जुन, नारियल, बड़ के वृक्ष लगाये. 

*संतान सुख के लिए- पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गुडहल, अश्वगन्धा लगाये. 

*पद-पदोन्नति के लिए- आँकडा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाये. 

*सुख-समृद्धि के लिए- नीम, कदम्ब और छायादार वृक्ष लगाये. 

*जीवन में आनन्द के लिए- पारिजात,   रातरानी, मोगरा, गुलाब आदि लगाये.

इनकी नियमित सेवा भी करें, क्योंकि जैसे-जैसे ये पेड़ पनपेंगे वैसे-वैसे सेवा करने वाला भी समृद्ध!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 24:05+ तक:

वृषभ, कर्क, कन्या, 

तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात - 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मिथुन, सिंह, तुला, 

वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

शनिवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

* प्रदीप श्रीदवे (9772354346) कमलाश्री आश्रम, वागड़

panditshreepradeep'gmail.com

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