बुधवार, 8 अगस्त 2018

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:21:00

मास श्रावण

तिथि द्वादशी - 26:12:25 तक

नक्षत्र मृगशीर्षा - 10:48:02 तक

करण कौलव - 15:48:00 तक, तैतिल - 26:12:25 तक

पक्ष कृष्ण

योग हर्शण - 23:44:37 तक

सूर्योदय 05:46:08

सूर्यास्त 19:07:08

चन्द्र राशि मिथुन

चन्द्रोदय 27:11:00

चन्द्रास्त 16:17:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: दक्षिण-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

एकादशी व्रत का पारण 

* पारण, व्रत को पूरा करने को कहा जाता है. 

* एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं. 

* एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है. 

* एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में भी नहीं होता है.

* हरिवासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई समयावधि होती है.

* व्रत पूर्ण हो जाने के बाद पहले भोजन के लिए सबसे सही समय सवेरे होता है. 

* मध्याह्नकाल में पारण से बचें लेकिन सवेरे किसी कारण से पारण नहीं हो पाए तो मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए.

* कभी-कभी एकादशी व्रत दो दिनों के लिए लगातार हो जाता है तब स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहली या दूजी एकादशी करनी चाहिए.

* श्रीविष्णुभक्त ऐसे अवसर पर दोनों एकादशी करते हैं. 

* संन्यासी और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रीनारायणभक्तों को दूजी एकादशी का व्रत करना चाहिए.

* यथासंभव व्रत नियमों का पालन करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की उलझन होने पर स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार निर्णय करना चाहिए.

* जानबूझ कर नियमों के उलंघन से ही व्रतभंग होता है इसलिए अनजाने में हुई गलती के लिए मन में आशंकाएं नहीं पालें और व्रत के अंत में पारण के समय जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए अपनी भाषा और भाव में श्रीविष्णुदेव से क्षमा प्रार्थना कर भोजन ग्रहण करें. 

-आज का राशिफल

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, सिंह, 

कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

बुधवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- लाभ               पहला- उद्वेग

दूसरा- अमृत               दूसरा- शुभ

तीसरा- काल               तीसरा- अमृत

चौथा- शुभ                 चौथा- चर

पांचवां- रोग               पांचवां- रोग

छठा- उद्वेग               छठा- काल

सातवां- चर               सातवां- लाभ

आठवां- लाभ             आठवां- उद्वेग

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

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