जब किसी की कुंडली मे कोई ग्रह नीच का होता है तब उसकी सातवीं दृष्टि अपनी ही उच्च राशि मे होती है तब ऐसा व्यक्ति अपने जीवन मे अथाह सम्पत्ति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है,लेकिन शर्त यह है की उस ग्रह की नीच राशि अशुभ और उच्च राशि शुभ भाव मे पढ़नी चाहिये,ऐसी स्थिति मे जातक की पत्रिका मे एक प्रकार का विपरीत राज़योग का निर्माण होता है,जो अशुभ भाव की हानि और शुभ भाव से जुड़े फलों मे वृद्धि करता है,ऐसा योग केवल नीच राशि के ग्रहों द्वारा ही निर्मित होता है.

*विभिन्न ग्रहों द्वारा निर्मित योग*

*सूर्य द्वारा निर्मित योग*

सूर्य एक क्रूर ग्रह है जब ये अशुभ भाव मे स्थित रहता है तब अशुभ भाव की हानि करता है,तीन,छह और आठवां स्थान अशुभ भावों की गिनती मे आता है,जब ऐसा सूर्य सिंह लग्न मे तीसरे स्थान मे आता है तब व्यक्ति पराक्रमी होता है भाग्य भाव मे सूर्य की उच्च राशि मे दृष्टि उसके भाग्य को मान सम्मान राज्य प्रतिष्ठा देता है ऐसे व्यक्ति का भाग्य सूर्य के समान तेजस्वी होता है.

*शाहरुख खान*-

इनका सिंह लग्न है नीच का सूर्य भाग्य स्थान मे अपनी उच्च राशि को देखता है.

*मंगल द्वारा निर्मित राज़योग*

-मंगल ग्रह की गिनती भी पाप ग्रहों मे आती है,यह ग्रह वृषभ लग्न मे तीसरे स्थान मे बैठकर भाग्य स्थान मे अपनी उच्च राशि को देखता है,फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति का भाग्य विदेश मे खास सफलता प्राप्त करता है,ऐसे लोग अच्छे खिलाड़ी तथा पराक्रमी योद्धा होते है.

*शनि द्वारा निर्मित राज़योग*

शनिदेव की गिनती भी पाप ग्रहों मे होती है,लेकिन सूर्य,मंगल राहु केतु जिस स्थान मे बैठते है उस स्थान की हानि करते है वही शनि महाराज जिस जगह बैठते है उस स्थान की वृद्धि करते है,कुम्भ लग्न मे शनि देव तीसरे स्थान मे बैठकर भाग्य की वृद्धि करते है.

*गुरु ग्रह द्वारा निर्मित राज़योग*-

गुरु ग्रह शुभ ग्रहों की गिनती मे आता है इसकी उच्च दृष्टि तो शुभ परिणाम देती है लेकिन जहां बैठक होती है वहां अशुभ परिणाम मिलते है,इसीलिये वृश्चिक लग्न मे तीसरा और मिथुन लग्न मे आठवां गुरु शुभ परिणामदायक होता है.

*बुध द्वारा निर्मित राज़योग

*-यह ग्रह वाणिज्य और व्यापार का कारक होता है,लेकिन शुभग्रह की श्रेणी मे आता है,मकर लग्न,वृषभ लग्न,मिथुन लग्न,सिंहलग्न मे नीच का ग्रह शुभ परिणाम देता है.

*चंद्र द्वारा निर्मित राज़योग*

-चंद्रमा माता का कारक और सभी सुख दुख का दाता है'जब यह ग्रह अपनी उच्च राशि पर दृष्टि डालता है तो जातक की मन की इक्छायें पूर्ण होती है,मेष लग्न,कर्क लग्न,कन्या लग्न,वृश्चिकलग्न

मकर लग्न,कुम्भलग्न,मीनलग्न

मे नीच राशि का चंद्रमा शुभ परिणाम देता है.

*शुक्र ग्रह द्वारा निर्मित राज़योग*-

शुक्र ग्रह को लक्ष्मी का कारक ग्रह कहा गया है,सारा वैभव विलास और ऐश्वर्य इस ग्रह के द्वारा ही आता है,व्यय भाव से इस ग्रह का खास नाता है क्योंकि लक्ष्मी का गुण चंचलता और खर्च्

मे ही निहित होता है,व्यय भाव मे यह ग्रह सबसे उत्तम परिणाम देता है,छठे भाव का सम्बंध भी व्यय भाव से होता है,इसिलिए छठा शुक्र भी जातक को शुभ परिणाम देता है,तुला लग्न मेष लग्न मे नीच का शुक्र शुभ परिणाम देता है,इसके अलावा वृषभ लग्न,कर्कलग्न,कन्या लग्न

मकरलग्न,कुम्भ लग्न मे नीच राशि का शुक्र जातक को विशेष शुभ परिणाम देता है,जातक को ऐश्वर्य,धन,सम्पत्ति और वैभव विलास की प्राप्ति होती है.

*प.चंद्रशेखर नेमा "हिमांशु"*

9893280184,7000460931

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