यह सर्वविदित है कि हमारा शरीर पांच तत्त्वों- अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी एवं आकाश से बना हुआ माना गया है. इन तत्त्वों का संतुलन पृथ्वी पर होने से ही मानव एवं अन्य जीवों की उत्त्पत्ति हुई. इन तत्त्वों का असंतुलन ही मानव में रोग उत्पन्न करता है. वास्तु रचना द्वारा इन प्राकृतिक तत्त्वों का संतुलन स्थापित करें.

मानव के रहने के लिए पृथक स्थिति बनाई जाती है. वास्तु से रोग उत्त्पत्ति मकान की वास्तु रचना एवं मकान में रहने की स्थिति में दोष के कारण होती है. क्योंकि वस्तुत: स्थिति पर प्राकृतिक नियमों के पालन नहीं किया जाता है. वास्तु तथा मानव का शरीर का घनिष्ठ संबंध है. वास्तु स्थिति में किसी प्रकार का दोष मानव शरीर को रोगाक्रांत बनाती है. 

रोग वास्तु के बारे में निम्न बिंदुओं से भवन में शारीरिक रोग पर विचार किया जाता है:-

1. भवन के उत्तर-पूर्व में भारी निर्माण तथा शौचालय बनाने से अनिद्रा, मानसिक रोग, तनाव, चिड़चिड़ापन, एवं शरीर निरंतर रोगी रहने लगता है क्योंकि यहां पर प्राकृतिक ऊर्जा बाधित होती है.

2. दक्षिण-पूर्व का विस्तार या सोने से या द्वार होने से मानसिक तनाव, अशांत चित्त, उच्च रक्तचाप, आदि रोग होते हैं. इस दिशा में भूमिगत जलस्रोत होने से निर्जलीकरण, हैजा, संतान पीड़ा, किसी किडनी में तकलीफ, मानसिक अशांति इत्यादि रोग होते हैं.

3. वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम में निरंतर सोने या बैठने से व्याकुलता एïवं मन उच्चाटन प्रवृत्ति का होना, वायु विकार आदि रोग होते हैं. इस कोण में भूमिगत जल, मानसिक पीड़ा, अनिद्रा, बच्चे कम उम्र में प्रौढ़ होने तथा इस दिशा में द्वार होने से दुर्घटनाएं होती हैं.
उत्तर में भारी तथा दक्षिण में हल्का या पूर्व में भारी तथा पश्चिम में हल्का रखने से स्वास्थ्यवर्धक ऊर्जा एवं हवा बाधित होती है जिससे अनिद्रा, मानसिक तनाव, शारीरिक दुर्बलता तथा दीर्घकालीन रोग होते हैं.

ब्रह्म स्थान अर्थात घर के मध्य भाग में निर्माण, भूमिगत जल स्रोत एïवं अग्नि की स्थापना से विनाशकारी रोग, भ्रमिता का शिकार, पेट में पीड़ा, अनिद्रा, मानसिक रोग होते हैं.

नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) का विस्तार एवं भूमितगत जलस्रोत, पुत्र को रोग, मानसिक पीड़ा, भय, अनिद्रा, दुर्घटनाजनित रोग एवं गुर्दे में जलित रोग देता है.

पश्चिम दिशा में भूमिगत जल, मंदाग्नि, स्त्रीजनित रोग, दौरे पडऩा एवं अस्थिरता पैदा करता है.

दक्षिण दिशा में भूमिगत जलस्रोत, स्त्री रोग, मानसिक तनाव एवं अशांतच्ति करता है.

भवन के दरवाजे आवाज करते हैं तो अनिद्रा, मानसिक अशांति एवं भय इत्यादि पीड़ा आती है.

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