सोमवार, 30 जुलाई 2018

श्रावण सोमवार व्रत 

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:32:39

मास श्रावण

तिथि द्वितीया - 06:42:04 तक

नक्षत्र धनिष्ठा - 06:31:55 तक

करण गर - 06:42:04 तक, वणिज - 19:46:03 तक

पक्ष कृष्ण

योग सौभाग्य - 13:49:12 तक

सूर्योदय 05:41:04

सूर्यास्त 19:13:44

चन्द्र राशि कुम्भ

चन्द्रोदय 20:56:00

चन्द्रास्त 07:37:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

शिवोपासना

भोलेनाथ शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होनेवाले देव है तथा भक्तों को तत्काल तन, मन और जीवन का आध्यात्मिक सुख प्रदान करते हैं.

यों तो भोलेनाथ की आराधना कभी भी की जा सकती है क्योंकि आराधना में भाव का विशेेष महत्व है, भाषा, स्थान और समय की सीमाओं से ऊपर है आराधना!

सोमवार और सावन, महादेव को प्रिय हैं और इसी लिए श्रावण में सोमवार को व्रत-पूजा का महत्व बढ़ जाता है. महादेव की साधना के लिए अनेक मंत्र, स्तोत्र, आरती हैं, जिनसे शिवकृपा मिलती है!

शिव मंत्र-

ओम नम: शिवाय.. 

महामृत्युंजय मंत्र-

ओम त्रयम्बकं यजामहे 

सुगन्धिं पुष्टिवर्धन

उर्वारुकमिव बन्धनान् 

मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ्.

रुद्र गायत्री-

ओम तत्पुरुषाय विद्महे 

महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात..

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 

कन्या, धनु, कुम्भ

*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा        रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत              पहला- चर

दूसरा- काल               दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ              तीसरा- काल

चौथा- रोग               चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग           पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                छठा- शुभ

सातवां- लाभ            सातवां- अमृत

आठवां- अमृत            आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

दिन का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

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