ये सारे ग्रह बारह राशियों में घूमते रहने के लिए विवश हैं .इन बारह राशियों में कोई घर(या कहें राशि ) तो उनका अपना होता है और कोई घर या राशि उनके मित्र की ,कोई घर (हाउस)उनके शत्रु का होता है और या फ़िर कोई घर में उनके साथ उनका कोई मित्र बैठकर उनका मूड अच्छा रखता है तो कोई घर में अपने शत्रु के साथ बैठने से इनका मूड खराब हो रहा होता है.

बात इतने भर की होती तो क्या कहने हैं मगर इसके अलावा इन ग्रहों के पास जिस घर (हाउस) में बैठते हैं उस घर पर तो अपनी शक्ति प्रदर्शन का अधिकार होता ही है मगर इन सभी ग्रहों की अपनी – अपनी (कई प्रकार की शक्तियों से संपन्न )नज़र भी होती है ये अपनी नज़र से जिस घर को देखते हैं उस घर का भाव या तो शुभ कर देते हैं या तो अशुभ कर देते हैं ,इसके अलावा ये अपनी नज़र  से जिस घर (House )को देखते हैं उस घर( हाउस) के शुभ भाव को (फल ) को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं या बुरे भाव या फल को कई गुना अधिक बुरा कर सकते हैं ,मगर ये सब उनके मूड पर निर्भर करता है ,उनका मूड कैसे बनता है और बिगड़ता है ये हम हमारे दैनिक जीवन की बातों से ही समझ सकते हैं.

एक बात तो पक्की है कि कि सभी नौ ग्रहों की सातवीं दृष्टी होती है ,इसका अर्थ है कि वो जिस घर  में बैठे होते हैं उस घर को गिनते हुए यदि हम आगे चलेंग तो जो सातवाँ घर होता है वहां उनकी सीधी दृष्टी होती है और वो अपनी इस सीधी दृष्टी या नज़र से अपने से सातवें घर का भाव कैसे कम या ज्यादा कर रहे होते हैं हम इन ग्रहों के स्वभाव के बारे में जानेगे तो समझ जायेंगे .अभी इसी समय हमारे लिए यह भी जान लेना जरूरी है कि जिस तरह हम किसी भी घर में रहते हैं तो हमें उस घरका कोई कमरा तो पसंद आता है और कोई बिलकुल नहीं पसंद आता ,इसी तरह जब ये नौ ग्रह किसी एक राशि में होते है तो वो राशी इनकी पसंद की होती है या नहीं मगर उस राशी के कुछ हिस्से होते हैं जों उन्हें कुछ ज्यादा या कम पसंद होते हैं वो हिस्से क्या हैं? वो हिस्से नक्षत्र हैं अर्थात हर राशी के अंतर्गत लगभग तीन नक्षत्र आते हैं उन नक्षत्रों का इन नौ ग्रहों में से ही कोई न कोई मालिक होता है और इनकी उस मालिक से कितनी बनती  है या ठनती है इसी बात पर निर्भर करता है कि उनकी उस मालिक से कैसी दोस्ती और कैसी दुश्मनी है

अब समय है सबसे पहले यह जान लेने का कि बारह राशियाँ कौनसी हैं और उनके मालिक कौन हैं-

1.मेष  -

मंगल ग्रह की राशि  या कहें उसका सौरमंडल में मंगल ग्रह का अपना और  पहला घर .

2.वृष -

शुक्र ग्रह की राशी या कहें कि  सौरमंडल में शुक्र ग्रह का  अपना और पहला घर.

3.मिथुन -

बुध  ग्रह की राशि या  कहें कि उसका सौरमंडल में बुध ग्रह का अपना और पहला घर.

4.कर्क -

चन्द्रमा हमारे ज्योतिष शास्त्र  में चंद्रमा  का अपना एक मात्र  घर या राशि  .

5.सिंह  - 

सूर्य का अपना एक मात्र घर या राशि  .

6.कन्या -

बुध  ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में बुध ग्रह का अपना दूसरा घर जहां वो बच्चा जैसा कम और बड़ों जैसा ज्यादा रहता है .

7.तुला -

शुक्र ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में शुक्र ग्रह का अपना दूसरा घर जहां शुक्र  ग्रह अपनी पूरी रूमानियत को ज़िंदा रखता  है  .

8.वृश्चिक -

मंगल  ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में मंगल ग्रह का अपना दूसरा घर.

9.धनु -

बृहस्पति ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में अपना पहला घर.

10.मकर -

शनि  ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में अपना पहला घर.

11.कुम्भ -

शनि  ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में अपना दूसरा घर घर.

12.मीन  

-बृहस्पति  ग्रह की राशि या उसका सौरमंडल में अपना दूसरा घर .

ग्रहों की नाराजगी को दूर करने के सरल उपाय

सूर्य-

भूल कर भी झूठ न बोलें, सूर्य का गुस्सा कम हो जाएगा .झूठ क्या है ?झूठ वो है जो अस्तित्व में नहीं है और यदि हम झूठ बोलेंगे तो सूर्य को उसका अस्तित्व पैदा करना पडेगा (आश्चर्य की कोई बात नहीं है -ये नौ ग्रह हमारे जीवन के लिए ही अस्तित्व में आये हैं ) सूर्य का काम बढ़ जाएगा और मुश्किल भी हो जाएगा.

चंद्रमा 

जितना ज्यादा हो सके सफाई पसंद हो जाईये ,और साफ़ रहिये भी – चंद्रमा का गुस्सा कम हो जाएगा . चंद्रमा को सबसे ज्यादा डर राहू से लगता है .राहू अदृश्य ग्रह है , राहू क्रूर है .हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में राहू गंदगी है .हम हमारे घर को, आसपास के वातावरण को कितना भी साफ़ करें -उसमें ढूँढने जायेंगे तो गंदगी मिल ही जायेगी ,या हम हमारे घर और आस पास के वातावरण को कितना भी साफ़ रखें वो गंदा हो ही जाएगा और हम सब जानते हैं कि गंदगी कितनी खतरनाक हो सकती है और होती है — ज़िंदगी के लिए ,न जाने कितने बेक्टीरिया , वायरस ,जो अदृश्य होते हुए भी हमारी ज़िंदगी को भयभीत कर देते हैं , बीमार करके ,ज़िंदगी को खत्म तक कर देते हैं ,चंद्रमा (जो सबके मन को आकर्षित करता है स्वय राहू के मन को भी) राहू से डरता है .अतः यदि आप साफ़ रहेंगे तो चंद्रमा को अच्छा लगेगा और उसका क्रोध शांत रहेगा . चंद्रमा का गुस्सा उतना ही कम हो जाएगा.

मंगल

यह ग्रह सूर्य का सेनापती ग्रह है भोजन में गुड है .सूर्य गेंहू है रविवार को गेहूं के आटे का चूरमा गुड डालकर बनाकर खाएं खिलाये ,मंगल को बहुत अच्छा लगेगा .सूर्य गेहूं है, मंगल गुड है और घी चंद्रमा है , अब तीनो प्रिय मित्र हैं तो तीन मित्र मिलकर जब खुश होंगे तो गुस्सा किसे याद रहेगा.

बुध 

बुध ग्रह यदि आपकी जन्म पत्रिका में क्रोधित है तो बस तुरंत मना लीजिये –गाय को हरी घास खिलाकर – धरती और गाय दोनों शुक्र  ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है . हरी घास है जो बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है -बुध ग्रह का रंग हरा है ,वो बच्चा है नौ ग्रहों में शारीरिक रूप से सबसे कमजोर और बौद्धिक रूप में सबसे आगे आगे . घास है जो पृथ्वी के अन्य पेड़ पौधों के मुकाबले कमजोर है बिलकुल बुध ग्रह की तरह , घास भी शारीरिक रूप से बलवान नहीं होती है मगर ताकत देने में कम नहीं अतः बुध स्वरूप ही है . हरी हरी घास से सजी धरती कितनी सुंदर और खुश दिखती है -घास =बुध और धरती = शुक्र इसी तरह गाय हरी – हरी घास खा कर कितनी खुश होती है इसलिए – हरी- हरी घास =बुध ग्रह और गाय (और धरती )= शुक्र इसलिए गाय को हरी हरी घास खिलाएंगे तो दो बहुत अच्छे दोस्तों को मिला रहे होंगे. ऐसी हंसी खुशी के वातावरण में हर कोई गुस्सा थूक देता है और बुध ग्रह भी अपना क्रोध शांत कर लेंगे.

बृहस्पति 

चने की दाल parrots को खिला दे .बृहस्पति कभी गुस्सा नहीं करेंगे. चने की दाल पीले रंग की होती है और बृहस्पति भी पीले रंग के हैं .बृहस्पति का भी घनत्व सौरमंडल में ज्यादा है और चने की दाल भी हलकी फुल्की नहीं होती पचाने में हमारी आँतों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है . तोता हरे रंग का होता है .बुध ग्रह भी हरे रंग का होता है . तोता भी दिन भर बोलता रहता है और बुध ग्रह भी बच्चा होना के कारण बोलना पसंद करता है . अतः तोता =बुध ग्रह और चने की दाल = बृहस्पति ग्रह बुध ग्रह बृहस्पति के जायज पुत्र और चंद्रमा के नाजायज पुत्र है. बुध के पिता बृहस्पति हैं और बृहस्पति के चंद्रमा अच्छे मित्र हैं और बृहस्पति की पत्नी तारा ने चंद्रमा से नाजायज शारीरिक सम्बन्ध बनाकर बुध ग्रह को जन्म दिया था इस बात से बृहस्पति अपनी पत्नी तारा से नाराज़ रहते है और बुध की माँ से नाराज़ रहने के कारण अपने जायज पिता बृहस्पति से बुध ग्रह नाराज़ रहता है .इस बात से बृहस्पति दुखी रहता है अतः जब तोता जो बुध स्वरूप है जब चने की दाल खाकर पेट भरेगा और खुश होगा तो बृहस्पति को खुशी मिलेगी और गुस्सा तो अपने आप कम हो जाएगा.

शुक्र

यदि नाराज़ हो तो गाय को रोटी खिलाओ . सूर्य गेहूं है और शुक्र गाय . किस बलवान व्यक्ति को उसके खुद के अलावा कोई और राजा हो तो अच्छा लगता है ! शुक्र को भी सूर्य के अधीन रहना पसंद नहीं है अतः जब आप उसके शत्रु सूर्य जो गेहूं को गाय जो शुक्र है को खिलाएंगे तो वो अपने आप ही गुस्सा भूल जाएगा .

शनि

जिस किसी से भी नाराज़ हो तो उसकी पीड़ा तो बस वो खुद ही जानता है . शनि समानतावादी है. ये बड़ा है और ये छोटा है ऐसी बातें शनि को क्रोधित कर देती है क्योंकि शनि सूर्य (राजा ) का पुत्र है और उसके पिता सूर्य ने उसकी माँ का सम्मान नहीं किया इसलिए शनि को अपनी माँ छाया से प्यार होने के कारण सूर्य पर बहुत गुस्सा आता है –किसी का बड़े होने का अहंकार ज़रा भी नहीं भाता है . अतः जो सर्वहारा वर्ग (मेहनतकश लोग )है उसको खुश रखो तो शनि खुद ही खुश हो जाएगा .आपको उन्हें दान नहीं देना है क्योंकि शनि श्रम का पुजारी है .शनि ईमानदार है और मेहनतकश लोग भी दान लेने के बजाय मेहनत कर के खुश रहते हैं अतः किसी मेहनतकश की मेहनत का तन ,मन और धन से उचित सम्मान करने से शनि खुश हो जाता है और खुश हो जाएगा तो गुस्सा तो कम हो ही जाएगा .

राहू-केतु

राहू के दिए दुःख गैबी होते हैं (जिनका कारण समझ में ना आये ). राहू स्वय अदृश्य रहता है .(अतः उसके दिए दुखों को समझना भी मुश्किल है ).राहू एक हिस्सा उसके शरीर का ऊपरी भाग वो स्वय है और उसके नीचे का हिस्सा केतु है . (समुद्र मंथन के समय छल से देवताओं का रूप धर अमृत पीने जब वो आया तो विष्णु ने उसे पहचान लिया और अपने सुदर्शन चक्र से उसके दो टुकड़े कर दिए (एक बूँद अमृत उसके शरीर में जा चुका था अतः उसकी मृत्यु नहीं हुयी )ऊपर का हिस्सा राहू कहलाया और नीचे का हिस्सा केतु.

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