शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

मासिक दुर्गाष्टमी

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:43:35

मास आषाढ

तिथि अष्टमी - 13:20:50 तक

नक्षत्र चित्रा - 08:09:53 तक

करण बव - 13:20:50 तक, बालव - 25:28:24 तक

पक्ष शुक्ल

योग सिद्ध - 08:17:42 तक

सूर्योदय 05:35:31

सूर्यास्त 19:19:06

चन्द्र राशि तुला

चन्द्रोदय 12:58:00

चन्द्रास्त 24:40:00

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: दक्षिण-पूर्व में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

देवी महागौरी

* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.

* देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप देवी महागौरी हैं. 

* नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है. * यह भोलेनाथ की अर्धांगिनी हंै जिन्होंने कठोर तपस्या के बाद शिवजी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था.

* देवी महागौरी की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशुल हंै और शेष दो हाथ- अभय और वर मुद्रा में हंै. 

* देवी महागौरी की पूजा-अर्चना से राहु ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है. 

* जिन श्रद्धालुओं की राहु की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें देवी महागौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. 

* जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता हो उन्हें भी देवी महागौरी की उपासना करनी चाहिए.

* संतान के गौरवर्ण, रूप-सौन्दर्य-वैभव प्राप्ति के लिए श्रद्धालुओं को देवी महागौरी की आराधना करनी चाहिए.

* जिन श्रद्धालुओं को रहस्यमय एवं अज्ञात शत्रुओं से भय हो उन्हें देवी महागौरी की रक्षार्थ आराधना करनी चाहिए.

* देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... ओम देवी महागौर्यै नम:॥

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 

तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

शुक्रवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- चर              पहला- रोग

दूसरा- लाभ             दूसरा- काल

तीसरा- अमृत           तीसरा- लाभ

चौथा- काल             चौथा- उद्वेग

पांचवां- शुभ             पांचवां- शुभ

छठा- रोग               छठा- अमृत

सातवां- उद्वेग           सातवां- चर

आठवां- चर             आठवां- रोग

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

* प्रदीप श्रीदवे (9772354346) कमलाश्री आश्रम, वागड़

panditshreepradeep'gmail.com

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